On Nov 1, 2025, Amaira, a Class 4 student, died by suicide after jumping from the fourth floor of the Neerja Modi School in Jaipur.
She had been bullied for 18 months, with classmates targeting her using "bad words," many of which carried sexual undertones. However, her class teacher repeatedly dismissed complaints from both Amaira and her parents, telling them instead that she needed to adjust to the other kids.
The parents have now released the school CCTV footage they obtained to the public. The footage reveals that even on the day of her death, Amaira approached the teacher multiple times for help but was ignored.
Hard to believe that teachers, even at such posh schools, are not trained to handle severe bullying or recognize a child in deep psychological distress. Totally preventable death.
On 18th June, a 13-year-old girl took e-rickshaw to go to her home in Sriganganagar, Rajasthan.
Instead of taking her home, the driver kidnapped her and sold her to someone in a hotel. She was rescued from a hotel on 22nd June by police.
In these five days, this minor girl was moved between four different local hotels, forced to consume alcohol to suppress her cries, and sexually assaulted by 32 men.
All the hotels connected to this case have been demolished. 12 people linked to the exploitation have been arrested including the rickshaw driver.
Anyone who assaulted or helped others to assault this little girl should be hanged to death. Anything less than that is just waste of time and resources. These people so filthy and unworthy that they should not be allowed to breathe the same air.
#Jaipur: सब इंस्पेक्टर भर्ती-2021 को रद्द कर पुनः परीक्षा आयोजित करने से जुड़ा मामला
राजस्थान हाईकोर्ट में जस्टिस आनन्द शर्मा की बेंच ने RPSC को दिए आदेश, याचिकाकर्ता गणेश नारायण छापोला व अन्य को...
#RajasthanWithFirstIndia@omsharma8888
“जब भर्ती दोबारा हो रही है, तो मौका भी एकसमान हर अभ्यर्थी को मिलना चाहिए”!
SI भर्ती 2021 रद्द होने के बाद अब सितंबर 2026 में दोबारा परीक्षा आयोजित की जा रही है, लेकिन RPSC द्वारा केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को अवसर देने की बात कही जा रही है जिन्होंने वर्ष 2021 में परीक्षा दी थी, जबकि आवेदन करने वाले अन्य हजारों युवाओं को इससे बाहर रखा जा रहा है।
यह सिर्फ एक भर्ती का मुद्दा नहीं, बल्कि सभी अभ्यर्थियों के अधिकार और समान अवसर का सवाल है। इसी मामले को लेकर कुछ युवाओं ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जिस पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार और RPSC से जवाब मांगा है। अभ्यर्थियों की ओर से यह भी पक्ष रखा गया कि पूर्व में EO/RO भर्ती रद्द होने के बाद सभी अभ्यर्थियों को मौका दिया गया था, तो फिर SI भर्ती में ऐसा भेदभाव क्यों?
हम सभी युवाओ�� की ओर से सरकार और RPSC से विनम्र निवेदन ��ै कि इस भर्ती में सभी आवेदनकर्ताओं को अवसर दिया जाए। पेपरलीक के कारण कई युवा उस समय परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए थे, ऐसे में उन्हें अब दोबारा अवसर से वंचित करना उचित नहीं होगा।
“पेपरलीक ने पहले ही युवाओं के सपने तोड़े हैं,
अब अवसर छीनकर उनके हौसले मत तोड़िए।”
न्याय वही है जहां हर मेहनतकश युवा को समान अवसर मिले !
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#si_भर्ती_2021
एसआई भर्ती रद्द होने के बाद भी खेल जारी! RPSC और सरकार की मंशा पर सवाल
राजस्थान की सब इंस्पेक्टर भर्ती 2021 एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार ��वाल पेपर लीक या धांधली पर नहीं, बल्कि भर्ती रद्द होने के बाद सरकार और RPSC की नीयत पर उठ रहे हैं। हाईकोर्ट के फैसले और सरकार की अनुशंसा के बाद भर्ती रद्द हुई तो युवाओं को उम्मीद थी कि अब न्यायपूर्ण तरीके से नई परीक्षा होगी और सभी आवेदकों को बराबरी का अवसर मिलेगा। लेकिन RPSC के हालिया प्रेस नोट ने हजारों युवाओं को फिर से सड़क और अदालत के बीच खड़ा कर दिया है।
सबसे बड़ा विवाद यही है कि आयोग ने दोबारा प��ीक्षा में केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को मौका देने का निर्णय लिया जिन्होंने 2021 में परीक्षा दी थी। जबकि अदालत की टिप्पणियों, सरकार की कमेटी की सिफारिशों और पूरे विवाद की भावना स्पष्ट रूप से “सभी आवेदकों” को अवसर देने की ओर इशारा करती थी। सवाल उठता है कि जब भर्ती ही निरस्त हो चुकी है तो फिर चयन प्रक्रिया का दायरा सीमित करने का अधिकार RPSC को किसने दिया?
यही वह बिंदु है जहां सरकार और आयोग दोनों की मंश��� पर गंभीर सवाल खड़े होत�� हैं। क्योंकि राजस्थान में इससे पहले EO/RO भर्ती रद्द होने पर सभी आवेदकों को दोबारा मौका दिया गया था। तब आयोग ने यह तर्क नहीं दिया कि केवल परीक्षा देने वाले ही पात्र होंगे। फिर SI भर्ती में अलग नियम क्यों? क्या अलग-अलग भर्तियों में न्याय और समानता की परिभाषा भी बदल जाती है?
इस पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू 2021 और 2025 कांस्टेबल बैच के साथ हुए अलग व्यवहार को लेकर है। जानकारी के अनुसार 2021 कांस्टेबल बैच के कई अभ्यर्थियों ने जॉइनिंग से पहले SI भर्ती का फॉर्म भरा था। लेकिन ट्रेनिंग के दौरान ADG की ओर से आदेश जारी कर उन्हें परीक्षा देने से रोक दिया गया। उस समय विभाग का तर्क था कि ट्रेनिंग के बीच परीक्षा की अनुमति नहीं दी जा सकती।
अब 2026 में वही पुलिस विभाग 2025 कांस्टेबल बैच को विशेष आदेश निकालकर SI परीक्षा में बैठने की अनुमति देता है। दोनों मामलों में परिस्थितियां लगभग समान थीं — दोनों कांस्टेबल ब��च थे, दोनों ने जॉइनिंग से पहले आवेदन किया था, दोनों एक ही विभाग के अधीन थे। फिर एक बैच को ��ोकना और दूसरे को विशेष छूट देना क्या प्रशासनिक निष्पक्षता कहलाएगा? या यह साफ तौर पर चयनात्मक रवैया और संस्थागत भेदभाव है?
सरकार के लिए यह मामला इसलिए भी असहज है क्योंकि शुरुआत से ही उस पर भर्ती रद्द न करने का आरोप लगता रहा। युवाओं ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी, तब जाकर भर्ती निरस्त हुई। लेकिन अब जब दोबारा परीक्षा का रास्ता खुला, तो RPSC ने ऐसा प्रेस नोट जारी कर दिया जिसने नए विवाद को जन्म दे दिया। इ��से यह धारणा मजबूत हो रही है कि सरकार और आयोग भर्ती को निष्पक्ष तरीके से दोबारा आयोजित करने के बजाय उसे सीमित दायरे में समेटना चाहते हैं।
राजनीतिक रूप से भी यह मामला @BhajanlalBjp सरकार के लिए चुनौती बनता जा रहा है। विपक्ष को सरकार पर हमला करने का मौका मिल चुका है, जबकि युवा वर्ग के भीतर यह संदेश जा रहा है कि नियम परिस्थिति और सुविधा देखकर बदले जा रहे हैं। अगर EO/RO में सभी को अवसर मिल सकता है, तो SI भर्ती में क्यों नहीं? अगर को��्ट “आवेदकों” की बात करता है, तो आयोग उसे “परीक्षा देने वालों” तक सीमित कैसे कर सकता है?
सरकार और RPSC को समझना होगा कि भर्ती परीक्षाएं केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं होतीं, वे लाखों युवाओं के भविष्य और व्यवस्था पर भरोसे से जुड़ी होती हैं। जब एक ही राज्य में, एक ही आयोग द्वारा, अलग-अलग मामलों में अलग-अलग मानदंड अपनाए जाते हैं तो सबसे बड़ा नुकसान संस्थाओं की विश्वसनीयता को होता है।
अब यह मामला फि��� अदालत पहुंच गया है। यदि कोर्ट ने RPSC के इस सीमित दायरे वाले फैसले पर सवाल खड़े कर दिए, तो सरकार को एक बार फिर असहज स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। और तब सबसे बड़ा प्रश्न यही रहेगा — क्या राजस्थान में भर्ती प्रक्रियाएं नियमों से चल रही हैं या परिस्थितियों और दबावों से?
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#Jaipur: सब इंस्पेक्टर भर्ती-2021 को रद्द कर पुनः परीक्षा आयोजित करने से जुड़ा प्रकरण
सभी आवेदकों को पुनः भर्ती परीक्षा में शामिल नहीं करने को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती, पूर्व में आयोजित परीक्षा के दोनों...
#RajasthanWithFirstIndia@omsharma8888
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