@aajtak ऐसा हाल क्यों हो गया है जनता दरबार का 😢😣
गोदी मिडिया ' मेलोडी ' पर
ध्यान देता रहेगा और शिक्षा पर चुपचाप बैठे रहेंगे
तो फिर जनता के पास सड़क ही मंच हैं 😳
कोकरोच पार्टी/सोनम वांगचुक का जंतर-मंतर Gen Z आंदोलन सफल रहा। अपर मिडिल क्लास महिलाएं भी निकलीं। धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। क्या ये AAP या BJP द्वारा मैनेजड है? विदेशी ताकतें? नहीं-ये युवाओं का गुस्सा है। मोदी-शाह ने नहीं समझा तो लेने के देने पड़ सकते हैं।
आज़म ख़ान जी की बनवाई मुहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को गिराने की तैयारियाँ चल रही हैं. बुलडोजर में तेल भरवाया जा चुका है. बस एक इशारे की देरी है…
ये लोग राम मंदिर में चोरी करके सोमनाथ के लुटेरे महमूद गज़नवी को पहले ही पछाड़ चुके हैं, अब जौहर यूनिवर्सिटी गिराकर बख़्तियार ख़िलजी से भी आगे निकल जाएँगे…लेकिन क्यों?
सरकार बख़्तियार ख़िलजी के नक्शेकदम पर क्यों चल रही है?
एक बनी-बनाई तैयार यूनिवर्सिटी पर बुलडोज़र चलवाने वाला आदमी किस तरह सोचता होगा? क्या ऐसे आदमी पर रिसर्च नहीं की जानी चाहिए?
क्या यूनिवर्सिटी तोड़ने का ख्याल आने से पहले सरकार ने एक बार भी सोचा कि उसने ख़ुद कितने विश्वविद्यालय बनवाये?
अगर यूनिवर्सिटी तोड़ दी गई तो इसमें पढ़ने वाले हज़ारों छात्रों का भविष्य क्या होगा?
अरे…मैं भी कैसा सवाल पूछ रही हूँ! अब सरकार को छात्रों के भविष्य से क्या लेना-देना? छात्रों का भविष्य तो उनके माँ-बाप पहले ही बिगाड़ चुके हैं! भाजपा को वोट देने की क़ीमत तो चुकानी ही पड़ेगी!
The child, Mahmoud Faiq Al-Yazji, urgently needs to travel abroad for medical treatment to save his life. His health has severely deteriorated due to complications from malnutrition and muscle weakness, leaving him unable to eat normally. Although he has an approved medical referral for travel, delays in the necessary procedures continue to prevent him from receiving the treatment he urgently needs outside the Gaza Strip.
इनका नाम मोहम्मद अकबर है.
इनको 18 जुलाई को हाई ब्लड प्रेशर, निमोनिया के चलते GTB हॉस्पिटल के वार्ड NO 27 में एडमिट करवाया गया था.
कल इनके इलाज के दौरान इनके ऊपर लगा छत वाला पंखा टूटकर बैड पर गिर गया.
इनकी वहीं मौत हो गयीं.
वोट मंदिर मस्जिद के नाम पर दोगे तो ऐसे ही डायरेक्ट भगवान अल्लाह के पास पहुंच जाओगे.
डबल इंजन की सरकार में Healthcare की ये हालत है.. जागो जनता जागो.
नासिर-जुनैद को ज़िंदा जलाकर मारने वाले आरोपी के साथ ख़ुशगवार माहौल में फोटो खिंचवाने वाले फरीदाबाद पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर राजेश दुग्गल साहब से पूछना है कि आप इस तरह से पुलिस का इक़बाल बुलंद कर रहे हैं ?
मुख्यमंत्री @NayabSainiBJP जी क्या एैसे चलेगी प्रदेश की क़ानून व्यवस्था ?
@FBDPolice@police_haryana
हाँ तो आपको क्या लगा था? साहब आयेंगे और जूस पिलायेंगे?
क्या लगा था? प्रधान साहब इस्तीफ़ा लेकर आयेंगे और अनशन तुड़वायेंगे?
गया वह ज़माना जब प्रधानमंत्री जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया करते थे।
भाजपा सरकार की ‘आज़म’ से दुश्मनी समझ में आती है। भाजपा को अपने पारंपरिक वोट बैंक के तुष्टिकरण के लिए आज़म को सताया जाना लाज़िमी हैं। लेकिन आज़म द्वारा स्थापित विश्विद्यालय को ज़मींदोज़ करने की योजना बनाने की मंशा क्या है? यही! कि इस सरकार को इस देश में शिक्षण संस्थान चाहिए ही नहीं।
अगर जौहर विश्विद्यालय के भवनों का नक्शा पास भी नहीं है, तब भी उसे गिराए जाने का फरमान जारी करना कहाँ तक सही है? जबकि पैनल्टी के साथ नक्शा भी पास हो जाता है। और अगर यही ज़िद है कि बिना नक्शा पास कराए हुए जौहर विश्विद्यालय के भवनों को गिराना ही है, तब यह नियम सिर्फ जौहर विश्विद्यालय पर ही लागू क्यों है? यही आदेश हर जिले में तमाम शिक्षण संस्थानों, गैर शिक्षण संस्थानों, निजी भवनों पर भी लागू कर दीजिए। ताकि इस देश में सिर्फ खंडहर ही नज़र आएं। भाजपा सरकार के लिए ये कोई मुश्किल काम भी नहीं है, जब यह सरकार श्री माता वैष्णो देवी कॉलेज की MBBS की मान्यता रद्द कर सकती है, तो बाकी को खंडहर बनाना कौनसा मुश्किल काम है?
सरकार के पास जौहर विश्विद्यालय के भवनों को गिराए जाने के विकल्प के अलावा उसे टेक ओवर करने का भी रास्ता है। सरकार के पास जामिया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय की तर्ज़ पर ‘अपने’ लोगों को ‘सैट’ करने का भी विकल्प मौजूद है। और जब यह सब काम भी ना आए तो जहां अडाणी और अंबानी पर इतनी संपत्तियां लुटाई गईं हैं, वहीं जौहर विश्विद्यालय को भी उसे ही सौंपा जा सकता है। लेकिन नहीं! इस सरकार का गुस्सा यह है कि ‘आज़म’ ने विश्विद्यालय क्यों बनाया? और जब बना ही लिया था तो उसमें ग़रीब और यतीम बच्चों के लिए मुफ्त पढ़ाई का प्रावधान क्यों किया। आज़म के उस भाषण की क्लिप अक्सर वायरल होती रहती है, जिसमें वो मुसलमानों को संबोधित करते हए कह रहे थे कि, “ये लिबास काम नहीं आएगा, हमारे मज़बूत मकानात महफ़ूज़ नहीं रह जाएंगे। ज़माना तुम्हें जाहिल और अनपढ़ देखना चाहता है, हिंदुस्तान के मुस्तकबिल का हिस्सेदार नहीं बनाना चाहता। अगर तुम भी अपने बारे में नहीं सोचोगे, तो अब सात समंदर पार से कोई आकर तुम्हें क़लम देने वाला नहीं आएगा।”
क्या अब वही नहीं हो रहा है? किसके मकान महफ़ूज़ हैं? किसका दामन बचा है? ऐसी कौनसा षडयंत्र है जो कलम छीनने के लिए ना किया गया हो? इस देश के बुद्धिजीवियों को अब परीक्षा से गुज़रना है! क्या वो जौहर विश्विद्यालय को खंडहर होता हुआ देखेंगे? या फिर विश्विद्यालय को बचाने के लिए सामने आएंगे?
@aajtak ज़मीन घोटाले पर कोई कुछ नहीं मिला ??
मुझे लगता है कि अंग्रेजी शासन में कैसे शिक्षा
व्यवस्था शुरु किया था !!😳
ऐसी परमिशन राज्य में कितने बिल्डिंग्स की है