कल प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने मामले का संज्ञान लिया और आज छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित आदिवासी परिवारों के ‘चिता आंदोलन’ पर दमनकारी पुलिस कार्रवाई हो गई।
जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर के आमरण अनशन का 14वाँ दिन था। उन्हें भी, सोनम वांगचुक जी की तरह, पुलिस उठाकर भाग गई।
अहंकार के नशे में चूर यह सत्ता संवाद नहीं; दमन चुनती है।
#KenBetwa #Satyagraha
today marks the 11th day of social activist Amit Bhatnagar's hunger strike. he has lost over 6 kg while standing with Adivasi families in Bundelkhand resisting the Ken–Betwa Link Project by staging a 'Fansi Satyagraha.'
these communities have lost their homes, forests and livelihoods, while many are still fighting for fair compensation and rehabilitation that was promised but never delivered.
save Adivasis from Modi's best friends Adani and Ambani. this deserves national attention.
#KenBetwa #Bundelkhand #AdivasiRights
योगेंद्र यादव सोनम वांगचुक की तरफ से पंचशील की प्रतिज्ञा दे रहे हैं👇
1. एक झंडा हो,किसी पार्टी का नहीं।
2. गांधी आंबेडकर या भगत सिंह की तस्वीर हो।
3. जय हिंद जय भीम भारत माता की जय जैसे नारे हों।
4.वालंटियर्स की बात मानें।
5. कुछ भी हो हिंसा नहीं करनी है।
सोनम वांगचुक जी के समर्थन में आए फिल्मी दुनिया के जाने माने अभिनेता सयाजी सिन्दे उन्होंने कहा👇
शांतिपूर्ण मार्ग से भी क्रांति लाई जा सकती है, यह एक बार फिर सिद्ध हो रहा है। उपवास कमजोरी की निशानी नहीं, बल्कि अपनी भूमिका पर दृढ़ विश्वास की भाषा है। जो खुद के लिए नहीं, बल्कि प्रकृति के लिए, हिमालय के लिए और आने वाली पीढ़ियों के लिए उपवास करते हैं, उनकी आवाज सुनी जानी चाहिए। सोनम वांगचुक के शांतिपूर्ण आंदोलन को मेरा मन से पूरा समर्थन।
एक काबिल साइंटिस्ट अपनी जान दाँव पर लगा दिया है।
कॉकरोचों जंतर मंतर से संसद तक भर दो 20 जुलाई को,
NEET से बड़ा Exam चल रहा है।
नीति का एग्ज़ाम चल रहा है, नीयत का एग्ज़ाम चल रहा है।
@Wangchuk66@Cockroachisback
17 जुलाई को देहरादून आ रहा हूँ। पर उत्तराखंड ही क्यों? क्योंकि देवभूमि को पेपर लीक का epicentre बना दिया गया है।
UKSSSC परीक्षा में यहाँ एक “सिस्टम” बैठ गया है, जहाँ पटवारी, लेखपाल, या कोई और पद क़ाबिलियत से नहीं, अपराधियों के तय किए रेट से मिलता है।
सरकार ने सख़्त नकल-विरोधी क़ानून बनाया - फिर भी लीक होते रहे। क़ानून काग़ज़ पर रहा, और पेपर बाज़ार में बिकते रहे।
ज़रा सोचिए, एक बच्चे ने सालों तैयारी की। फ़ॉर्म भरा, फ़ीस दी, दूर के सेंटर तक गया। और उसका पद किसी और ने ख़रीद लिया।
यह लीक नहीं - यह चोरी है। उस युवा के हक़ की, उसके रोज़गार की, उसके भविष्य की।
मैं उत्तराखंड के हर अभ्यर्थी, हर छात्र, हर युवा से कहता हूँ - यह आपकी लड़ाई है, और मैं आपके साथ हूँ।
17 जुलाई, देहरादून। आइए, ‘छात्रों की गूँज’ को हुंकार बनाएँ। भविष्य नीलाम नहीं होने देंगे। सपने लीक नहीं होने देंगे।
अभी जुड़ें: https://t.co/g6mbw7X5XC
#ChhatronKiGoonj
पिछले सप्ताह हुई UGC-NET परीक्षा को लेकर सामने आए गंभीर आरोप बेहद चौंकाने वाले हैं।
NEET पेपर लीक के कुछ ही हफ्तों बाद अब खबरें आ रही हैं कि -
- UGC-NET परीक्षा से ठीक पहले 100 पन्नों की एक PDF प्रसारित हुई।
- यह PDF उस question paper setting की है, जो सिर्फ़ NTA के पास उपलब्ध होती है।
- PDF के लगभग 90 सवाल Sociology के असली प्रश्नपत्र से मेल खाते हैं।
- वही प्रश्नपत्र ₹2.25 लाख में बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान में बेचा जा रहा था।
- इसी नेटवर्क ने CSIR-NET, HTET और ADA जैसी आगामी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का भी दावा किया।
NEET और NET में बार-बार सामने आए घोटालों के बाद भी मोदी सरकार आंखें मूंदकर सो रही है, क्योंकि लाखों छात्रों की रात-रात जागकर की गई सालों की मेहनत उनके लिए कोई मायने नहीं रखती।
सारा देश जानता है कि प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री से किसी भी तरह की जवाबदेही या कार्रवाई की उम्मीद बेकार है - न जांच होगी, न छात्रों को न्याय मिलेगा।
बदलाव का एकमात्र औज़ार हमारी सम्मिलित आवाज़ है - देश भर के छात्रों की गूंज, जो भारत में शिक्षा revolution लाकर रहेगी।
Indian Express में प्रकाशित खबर बेहद चौंकाने वाली है कि केंद्रीय कृषि मंत्री को उन्ही की मंत्रालय की योजना के तहत ₹99 लाख की सब्सिडी मिली है!
जब केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री स्वयं NHB बोर्ड के उपाध्यक्ष हैं, तो क्या यह मामला Conflict of Interest से जुड़ा हुआ नहीं है?
इसी प्रकार, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव जी और उनके परिजनों पर उज्जैन में बड़े पैमाने पर जमीन खरीद से जुड़े बेहद गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यह मामला भी पारदर्शिता और निष्पक्षता पर बड़े प्रश्नचिह्न खड़े करता है।
भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, राज्य सरकारों के मंत्री और केंद्रीय मंत्रियों से जुड़े आरोप और उनकी संलिप्तता लगातार उजागर हो रहे हैं, लेकिन जवाबदेही तय नहीं की जा रही है।
इन सभी मामलों की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए, जिससे देश की जनता के सामने सच्चाई आए।
सत्ता के अहंकार में डूबी मोदी सरकार अब इस मुकाम पर पहुँच गई है कि अपने अधिकारों, निष्पक्ष परीक्षाओं और सुरक्षित भविष्य की मांग करने वाले छात्रों को ही शिक्षा मंत्री “आतंकवादी” कह रहे हैं।
ज़रा सोचिए - जिसकी नाकामी से इतने पेपर लीक हुए, जिसके राज में 20 बच्चों ने जान दे दी, जिसने करोड़ों युवाओं का भविष्य अंधेरे में धकेल दिया - वो आज पीड़ित बच्चों और उनकी आवाज़ उठाने वालों को “दहशतगर्द” बता रहा है।
पर यह कोई नई बात नहीं: अन्नदाता किसानों को "आंदोलनजीवी और परजीवी" कहा। सवाल पूछने वाले को “Anti-National” कहा। और अब युवाओं को “दहशतगर्द।”
जो भी सरकार से सवाल पूछे - उसे देशद्रोही बता दो, यही इनकी पूरी राजनीति है।
धर्मेंद्र प्रधान जी, देश के करोड़ों युवाओं से तुरंत माफ़ी माँगिए और अपनी नाकामियों के लिए इस्तीफ़ा दीजिए।
और रही मेरी बात - आप मुझ पर जितने चाहें हमले कर लीजिए। मैंने कोटा में कहा था, और फिर कहता हूँ: यह शिक्षा व्यवस्था आज सिर्फ़ एक वसूली तंत्र बन गई है। मैं इसे ऐसे ही नहीं रहने दूँगा।
हर बच्चे को सस्ती, अच्छी शिक्षा और निष्पक्ष परीक्षा मिले - इस आवाज़ को उठाना मैं कभी बंद नहीं करूँगा।
#ChhatronKiGoonj
#ChhatraJodo
मुज़फ्फरनगर में मजदूरों की बंधुआ मजदूरी का मामला बेहद चौंकाने वाला है।
बिना मज़दूरी दिए काम करवाने के अलावा, मजदूरों को कुत्तों से कटवाया गया, भाले से गोदा गया, कोड़े मारे गए, और उन्हें मवेशियों का चारा खिलाया गया। यह इंसानी गरिमा पर हमला है - पीड़ितों को न्याय के साथ पुनर्वास और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
साथ ही हमें यह भी पूछना ज़रूरी है कि मज़दूर ऐसी खतरनाक परिस्थितियों में किन मजबूरियों में फंस जाते हैं।
जब रोज़गार ख़त्म हो जाते हैं, आमदनी ठहर जाती है, और सबसे कमज़ोर वर्गों के लिए बने मनरेगा और श्रम कानूनों जैसी सुरक्षाएं कमज़ोर कर दी जाती हैं, तो हताशा बढ़ती जाती है। जिन लोगों के पास कोई और विकल्प या सुरक्षा नहीं होती, वो ऐसे शोषण का आसान शिकार बन जाते हैं।
यह कोई आम आपराधिक घटना नहीं है - यह एक धराशाई हुई अर्थव्यवस्था का मलबा है।
जंतर-मंतर पर जोरदार रोस्टिंग! 😂
प्रसिद्ध यूट्यूब शिक्षक अभिनय सर ने CJP के प्रदर्शन के दौरान रोस्ट करके जो मुद्दे की बात बोली है न 😄
यह सुनते ही वहां मौजूद लोग अपनी हंसी नहीं रोक पाए।
आदर्श प्रकरण में अशोक चव्हाण की सास के नाम पर फ़्लैट होने का आरोप लगा तो इस्तीफा हुआ, लेकिन मोहन यादव से जुड़े मामले में मीडिया पर सन्नाटा है।
अरुणाचल प्रदेश से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया, लेकिन मुख्यमंत्री अब भी कुर्सी पर बैठे हैं। वही हाल अब MP में भी है।
इसका कारण गैर-रजिस्टर्ड RSS है, क्योंकि ये सब उसी से जुड़े हैं और अयोध्या के मामले में भी इन्हीं के लोग शामिल हैं।
: AICC मीडिया एवं पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन @Pawankhera जी
📍 दिल्ली
सब मालामाल हो रहे हैं
पहले ख़बर आई
एमपी में 50 IAS/IPS अधिकारियों ने मिलकर भोपाल में एक ही दिन कृषि भूमि खरीदी . बाद में उसी इलाके में 3200 करोड़ की वेस्टर्न बायपास परियोजना को मंजूरी मिली और कृषि योग्य जमीनों का लैंड यूज़ बदल गया . जमीनों की क़ीमत कई गुना बढ़ गई .
अब ख़बर आई
मुख्यमंत्री मोहन यादव के कुनबे ने 168 एकड़ कृषि योग्य ज़मीनें उज्जैन के उन इलाकों में खरीदी , जहां सरकार की कई परियोजनाओं पर हजारों करोड़ खर्च होने हैं और लैंड यूज़ बदल व्यवसायिक और रिहायशी में बदल जाना है . करोड़ों के वारे न्यारे की तैयारी है .
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव सरकार पर अपने लोगों को लाभ पहुंचाने का गंभीर आरोप। इंडियन एक्सप्रेस ने बड़े भ्रष्टाचार को उजागर किया।
क्या बीजेपी इस्तीफ़ा लेगी मोहन यादव से ? जिस तरह फैक्ट्स रखे गए हैं,यहाँ से मोहन यादव के लिए आगे की राह बहुत मुश्किल।
ऐसे बच्चों की बातों का असर नेताओं की बातों से 10 गुना ज्यादा होता है।
वो जो बोल रहे हैं उसे झेल रहे हैं महसूस कर रहे हैं, उस पीड़ा का आपसी कनेक्ट कहीं ज्यादा होता है।
कॉकरोच कितने सफल होंगे कितने नहीं, कौन जाने मगर प्रतिरोध हमेशा चुप्पी से बेहतर होता है।