संविधान निर्माता सर बी.एन. राव सुरक्षा परिषद की 474वीं बैठक में महासचिव ट्रिग्वे ली के साथ अध्यक्षता कर रहे हैं।
जो #BN_राव को क्लर्क कहते हैं, ये वीडियो उनके मुंह पर करारा तमाचा है।
इतिहास गवाह है – राव साहब सिर्फ नाम नहीं, ब्रांड हैं।
महाराज ने फरमान निकाला —
प्रजा चाहे भूखी हो, आंदोलन में ब���ठी हो या सिस्टम से टूटी हो…
परीक्षा तो देनी ही होगी।
पहले RAS के रण को रौंदा,
अब स्कूल लेक्चरर की तलवार को म्यान में ही जंग लगवाने चले हैं।
राजनेताओं की स्क्रिप्ट वही है :
आपका काम हो जाएगा…
पर हर बार काम उनका ही होता है-पोस्ट, प्रोफाइल ��र प्रतिष्ठा का।
बेरोजगार नेता मंचों पर गरजते हैं,
फोटो खिंचवाते हैं,
और फिर अगली मीटिंग की तारीख देकर निकल जाते हैं।
आयोग और सरकार बस लुका-छिपी खेलते हैं,
जैसे परीक्षा नहीं, कोई दरबारी तमाशा हो।
और बेचारा अभ्यर्थी?
ना तलवार है, ना ढाल।
सिर्फ उम्मीदों की राख उठाकर फिर बैठ गया है अगले इम्तिहान की चिता पर।
ये भर्ती नहीं, सत्ता का शिकार है।
और हम? हम सिर्फ आंकड़े हैं सरकारी प्रेस नोट में।
किरोड़ीलाल की भी क्या मजबूरियां है ?
बाबा आप इतना मजबूर मत होइए या तो आप सत्ता का आनंद ले लीजिए या युवाओं के साथ आ जाए
कभी सत्ता और कभी युवा ये कब तक चलेगा?
क्योंकि राजस्थान में थोपी गयी सरकार में सत्ता और युवा दोनों एक जगह संभव ही नहीं है
@DrKirodilalBJP
कोई बताओ भाई... ये सक्ष्म स्तर ...उचित निर्णय क्या है???
प्रदेशाध्यक्ष, उपमुख्यमंत्री, मंत्री और 40 से ज्यादा विधायक एक परीक्षा को स्थगित नहीं करा सके....
लगता है भाजपा में आपसी सहमति से कोई निर्णय नहीं लिया जाता..केवल थोपे जाते हैं........
@BJP4India@bjpraj@BhajanlalBjp
"मदन राठौड़ जी को तो बीजेपी में कोई मानता ही नहीं है, RAS Mains परीक्षा को लेकर उन्होंने खुद ने आश्वासन दिया...लेकिन हुआ क्या...जिस पार्टी में प्रदेश अध्यक्ष की ये हालत है...यहां ना सीएम, ना अध्यक्ष की चल रही...यहां पर्ची और खर्ची से सब चल रहा है"
- PCC चीफ @GovindDotasra
#Rajasthan #RASMAINSPOSTPONE2025
अब RAS भर्ती देश की आज़ादी के बाद का सबसे बड़ा आयोजन है!
वाह सरकार!
हर सरकारी हैंडल से एक ही संदेश –
RAS के एडमिट कार्ड जारी हो गए हैं।
सरकारी हैंडलों से ऐसे प्रचारित किया जा रहा है, जैसे चंद्रयान नहीं, Admit Card उतरा हो।
जैसे प्रशासनिक परीक्षा नहीं, राष्ट्रीय उत्सव हो।
हर घर खुशहाली।
हर स्टेटस पर मुख्यमंत्री की फोटो।
और साथ में –अभ्यर्थि���ों को घूरती हुई भाषा।
सवाल यह नहीं कि एडमिट कार्ड निकले।
सवाल यह है कि ��र क्यों दिखाया जा रहा है?
किस अफसर की नजरे इतनी ऊँचाई से देख रही हैं,
कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष, पूर्व मुख्यमंत्री, विधायक… सब धुंधले लगने लगे?
पत्र लिखे गए।
सड़कों पर प्रदर्शन हुआ।
लेकिन सरकार ने चुप्पी ओढ़ ली।
जैसे सब कुछ सामान्य हो।
भर्ती आंदोलन को दबाने की कोशिश की जा रही है।
किसके इशारे पर?
कौन चाहता है कि अभ्यर्थी थक हार जाएं?
भाजपा भूल रही है –
उसे कांग्रेस की भर्ती घोटालों ने ही सत्ता में बैठाया था।
अब वही कहानी दोहराई जा रही है।
बस चेहरे बदले हैं।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को समझना होगा –
सिर्फ प्रचार से खुशहाली नहीं आती।
सुनवाई से आती है। समाधान से आती है।
वरना जिस जनता ने सत्ता दी है,
वही परीक्षा परिणाम भी बदल सकती है।
और तब कोई एडमिट कार्ड बचा नहीं पाएगा।
कल शाम RAS -2024 की मुख्य परीक्षा की तिथि को स्थगित करके आगे बढ़ाने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने जयपुर आवास पर मुलाकात की,मेरी प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp से अपील है कि हठधर्मिता छोड़कर इन अभ्यर्थियों की इस उचित मांग पर संज्ञान लेते हुए तत्काल परीक्षा तिथि को आगे बढ़ाया जाए साथ ही फर्स्ट ग्रेड परीक्षा की तिथि भी आगे बढ़ाई जाए |
इस प्रेस नोट में जितने भी वक्तव्य छापे गए हैं, वे सभी फ़र्ज़ी कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स बेचने वालो से फ़र्ज़ी ट्वीट करवा कर छापे गए हैं। RPSC ने फ़र्ज़ीवाड़े की हद्द ही कर दी। तभी इतनी जल्दबाजी की जा रही है RAS Mains करवाने के लिए। और वो कानपुर वाली प्रेस का भी कुछ मसला चल रहा है।
माननीय मुख्यमंत्री जी,
“मुट्ठी भर बाजरे के लिए राजस्थान की बादशाहत मत खो दीजिएगा”
चुन��वों के समय वोट सिर्फ ब्यूरोक्रेसी के लोग नहीं देंगे बल्कि RAS Mains और स्कूल व्याख्याता के अभ्यर्थी और उनके ��रिवार के लोग भी देंगे।
जनभावना को समझने की आवश्यकता है।
https://t.co/EcuoPfKoqs
‘संवाद सरकार का महत्वपूर्ण पहलू’
धरना प्रारंभ होने से लेकर आज दिन तक शांति पूर्वक रूप से चल रहा था। सरकार ने एक भी प्रशासनिक अधिकारी या नेता को धरने स्थल पर वार्ता के लिए भेजा हो इसकी जानकारी नहीं आई है। जो अभ्यर्थी अनशन कर रहे थे उनकी मांगे उचित या अनुचित हो सकती है। इस पर चर्चा भी की जा सकती है। परन्तु सरकार माय बाप कहलाती है। एक बार अभ्यर्थियों से बात करके उनसे समझाइश करनी चाहिए थी कि परीक्षा तिथि को आगे बढ़ाना क्यों संभव नहीं है।
अगर एक संवाद स्थापित किया जाता तो सेकेंडों अभ्यर्थी इस बात को समझकर तैयारी में लग जाते। सरकार ने अंत समय तक स्थ���ति को अधरझूल में ही रखा इसलिए अधिकांश बच्चे परीक्षा का अंतिम महीना जो बहुत महत्वपूर्ण होता है में डिस्टर्ब हो गए और आंदोलन में भागीदारों की संख्या दिन ब दिन बढ़ती गई।
जब शुरुआत से ही सरकार की मंशा तय थी तब उपमुख्यमंत्री, मंत्री, पार्टी के विधायकों को हिदायत देनी चाहिए थी कि इस बेतुकी मांग को तुल देने के लिए ऐसे पत्र न लिखे क्योंकि जनप्रतिनिधि पूरे क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते है उनके द्वारा लिखना सामान्य बात नहीं है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ और कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा कल रात तक अभ्यर्थियों को आश्वासन देते रहे। इसलिए इन आश्वासनों ने भी अभ्यर्थियों को किताबों से दूर किया और अचानक हठधर्मिता दिखाते हुए शुभकामनाएं देना कही न कही छात्रों के एक वर्ग को लगता है कि उनके साथ छल हुआ है।
सरकार एक बार को एक संवाद चैनल चालू रखना चाहिए। परीक्षा तिथि बढ़ाई ही जाए यह आवश्यक नहीं मगर संवादहीनता ने उलझनों को बढ़ाने का ही काम किया है। ऊपर से रही सही कसर तथाकथित बेरोजगारों के मसीहों ने पूरी कर दी कि बस चंद घड़ी बाद जीत तय है।
ख़ैर परीक्षाएं तय समय पर आयोजित होनी चाहिए और यह मेहनती अभ्यर्थियों के लिए अनुकूल है। मगर सरकार को UPSC की तर्ज़ पर अपना वार्षिक कले��डर जारी करना चाहिए परीक्षा तिथियां प्रत्येक वर्ष के लिए तय होनी चाहिए। अगर व्यवस्था में अनुशासन स्थापित किया जाता है तो गाहे बजाए होते धरने ख़त्म हो जाएंगे। मेहनत करने वाले अभ्यर्थी सरकार को सिर आखों पर बिठायेंगे। फ़िलहाल तो ऐसी दुरस्त व्यवस्थाओं को लेकर कोई कवायद होती नहीं दिखाई दे रही है मगर RPSC के नए अध्यक्ष UR साहू की नियुक्ति के बाद एक उम्मीद का चिराग़ अवश्य चमक उठा है।