आला हज़रत को इश्क़े रसूल ﷺ की बिना पर ये ऐजाज़ मिला है कि उनका लिखा हुआ कलाम "मुस्तफ़ा ﷺ जाने रहमत पे लाखों सलाम" पूरी दुनिया में अज़ान के बाद सबसे ज़्यादा पढ़ा जाता है! ❤
#YoumeRaza
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इस फ़ोटो को गौर से देखिए।
जब देख चुके हों तो जवाब दें कि इसमें क्या गलत है?
देश का हर नागरिक अपनी धार्मिक पहचान के साथ जीने के लिए स्वतंत्र है।
इस लोकतंत्र में अपनी पहचान के साथ अपनी आवाज़ खुद बनने के लिए स्वतंत्र है।
अब मुख्य बिंदु पर आते हैं।
एक सो कॉल्ड प्रगतिशील तबका ऐसा भी है जिसको इसमें लग रहा है कि समाज में द्वेष फैल जायेगा!
कैसे फैल जायेगा?
इसका जवाब चाहिए।
इसमें किसी के ईष्ट का अपमान हो रहा?
नही न।
फिर कैसे कह दिया?
वो तबका खुद में इतना ज़हर भर चुका है कि
असद ओवैसी साहब को अपनी लीडरशिप की बात करने के जुर्म मे�� जिन्ना तक कहने से गुरेज़ नही कर रहा।
इस नफरती मानसिकता के बाद भी वो उम्मीद करते हैं कि उनको अदबन जवाब दिया जाए।
ये चाहते हैं कि मुसलमान सिर्फ़ इनके उस सो कॉल्ड ज्ञान को सुने जिसमे ये कहते हैं कि,
मुसलमान को पढ़ना लिखना चाहिए।दौड़ दौड़ कर वोट करना चाहिए।सबके लिए विरोध प्रदर्शन करना चाहिए।
लेकिन
अपनी आवाज़ खुद नही बनना चाहिए।
मैं एक दलील मांग रहा हूं कि वो देश के संविधान से दिखा दे जिसमे लिखा है कि मुसलमान अपनी आवाज़ खुद नही बन सकता।
अपनी कयादत की बात सुनते ही देश का एक खास “बुद्धिजीवी तबका” ऐसे तिलमिलाता है
जैसे किसी ने उनके बौद्धिक साम्राज्य के सिंहासन पर लात मार दी हो।
अगर देश का संविधान मुसलमानों को खुद उनकी आवाज़ बनने की इजाज़त दे रहा है तो कोई ��से रोक नही सकता।
इमरान प्रतापगढ़ी उत्तर प्रदेश से है, राज्यसभा सांसद महाराष्ट्र से है अभी चुनाव प्रचार बिहार में कर रहे हैं फिर वो दूसरे नेता को बाहरी कैसे बोल सकते हैं..!
प्यारे X साथियों ये वीडियो क्लिप मेरे दोस्त ने भेजी है
इसे देख के आपको ये बताना है कि ये कहां की है
हिंट्स...के लिए मै आपको बता देता हूं इसके लास्ट का वर्ड डी है? लगाओ दिमाग
नोट...हमारे देश मे ऐसा विकास करने के लिए कौन रोक रहा है?