ये चाचा उसी गांव के हैं जिस गांव का भरत तिवारी था। जब सामने वाले ने पूछा कि भरत क्या किए इस गांव के लिए तो रोने लग गए।बोले जब बाढ़ आई थी तो लड़ लड़ कर खाना पीना से लेकर सारा इंतजाम पंडी जी अकेले करते थे। ये जो रोड/ बिजली जो भी थोड़ा बहुत देख रहे हैं इन्हीं के प्रयास से आया था।।
लड़ चाटने के लिए हज़ारों करोड़ का बजट रक्खते हो? जब गरीब को एक एम्बुलेंस नहीं मिल सकता है?
यह घटना सहरसा की है, जहाँ एक गरीब गर्भवती महिला को हाथगाड़ी पर अस्पताल लाया गया। @Nishantjdu