विज्ञापन संख्या-14/2026 के तहत शिक्षा विभाग, बिहार के अंतर्गत विद्यालय अध्यापक के कुल 32,388 रिक्त पदों पर नियुक्ति हेतु योग्य भारतीय उम्मीदवारों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।
ऑनलाइन आवेदन एवं शुल्क भुगतान की प्रक्रिया 01 सितंबर 2026 से शुरू होगी। शुल्क भुगतान की अंतिम तिथि 29 सितंबर 2026 तथा ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है।
विस्तृत सूचना एवं आवेदन संबंधी दिशा-निर्देश आयोग की आधिकारिक वेबसाइट https://t.co/BYs3bdy0zk पर उपलब्ध हैं।
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रिया अहीर ने एक लाइन में सब बोल दिया
"न बेटियों को पढने दे रहे हैं, न बेटियों को बचने दे रहे हैं'
रिया वही लड़की है जिसने मुंबई पुलिस की बैन के सामने खड़े रहकर 20 छात्रों को बैन से उतरवा लिया था !
पचास करोड़ की गर्लफ्रेंड…जर्सी गाय…दीदी ओ दीदी…ये सब फूहड़ और छिछोरी बातें क्या Gen Z ने बोली थीं? आज जब अपने पर आई तो भाषा और नैतिकता का पाठ पढ़ाने लगे?
बेशर्मों की फ़ौज है .
हज़ारों छात्रों ने सड़क पर उतरकर मंत्री का इस्तीफा लिया , इनके नकारेपन की वजह से बीस बच्चों की जान जा चुकी है और इनका स्वागत ऐसे हो रहा है, जैसे कोई किला फतह करके आए हों
इरफान,
मेरे देश को बहुत ज़रूरत है तुम्हारी और तुम्हारे जैसे बहुत सारे नौजवानों की
तुम्हें अपने आस पास, अपने समाज की चिंता अपनी ख़ुद की परेशान��यों से ज़्यादा है
इतनी दिक्कतों के बावजूद तुम्हारा संविधान में अटूट विश्वास हौसला देता है
तुम हिंदुस्तान हो 🇮🇳🇮🇳
पत्रकार का सवाल; इस प्रोटेस्ट की फंडिंग कहां से आ रही है!
एक किन्नर का शानदार जवाब; मैं कर रही हूं फंडिंग मैंन��� फंड दिया है मेरे जैसे और भी बहुत सारे लोगों ने फंडिंग की है!
बेचारे मीडिया वाले पाकिस्तान और बांग्लादेश कनेक्शन ढूंढ रहे लेकिन उनको मिल नहीं रहा है! 😂
24 जून 2024, धर्मेंद्र प्रधान जब लोकसभा में शपथ ले���े आए तब नारा लगा था, नीट, नीट, शेम, शेम...अगर धर्मेंद्र प्रधान में तब भी जज़्बा होता तो पेपर लीक को जड़ से ख़त्म कर देते। दो साल बाद आज 24 जुलाई 2026 है। यह वीडियो इसलिए देखिए ताकि उन लोगों को आप जवाब दे सकें जो कह रहे हैं कि प्रधान के इस्तीफे से क्या होगा। क्य���ंकि प्रधान फेल रहे हैं। नीट की चोरी को लेकर विपक्ष ने ठीक एक साल एक महीना पहले याद दिला दिया था। कम से कम इन दो सालों में वे नहीं कर पाए। यह तो साबित होता है।
कई दिन हो गए, कोई विपक्षी दल नहीं तोड़ा गया है ताकि देश में दहशत पसर जाए कि अब क्या होगा, कोई बचेगा या नहीं। सरकार अगर युवाओं से संवाद करना चाहती है तो राघव चड्ढा को उनके बीच भेज दे, वे जेन ज़ी स्कूल ऑफ नायकत्व के प्रोडक्ट हैं। उन्हें मालूम ह���गा या उन 20 सांसदों की परेड करा दे जो जनता की नब्ज़ को सुपर फास्ट गति से समझते हुए तृणमूल छोड़ कर NCPI में शामिल हो गए। जिसे श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने बनाया न अटल बिहारी वाजपेयी न संघ ने सुरेंद्र नाथ बनर्जी, मुलायम सिंह यादव या नीतीश कुमार ने। NCPI के संस्थापक का कम से कम एक इंटरव्यू तो छपना ही चाहिए कि अगर विपक्ष ने ज़ुबान बंद नहीं की तो 24 घंटे के भीतर राहुल गांधी और अखिलेश यादव को छोड़ कर उनसे सारे सांसद NCPI में होंगे।
यह मान लीजिए कि इस देश में दो चार कालेज यूनिवर्सिटी को छोड़ कर सब के सब इस तरह काम कर रहे हैं जैसे युवाओं को किसी लायक नहीं बनने देना है। किसी लायक बन जाएंगे तो वे धर्म की राजनीति को ठीक से समझ जाएंगे। विपक्ष से भी सवाल करने लग जाएंगे।