मेट्रो बंद करो।
रास्ते बंद करो।
दुकानें बंद करो।
Internet बंद करो।
खाना बंद करो।
अपना हक़ मांग रहे छात्रों के ख़िलाफ़ सरकार ने ये क्रूर कदम उठाए।
बस एक चीज़ बंद नहीं कर पाए, मोदी जी - पेपर लीक।
देश के 21% बच्चे मायोपिया बीमारी के शिकार हो गए हैं, अर्थात चश्मा लग गया है, दूर देखने की कुदरती क्षमता खो दी है।
2050 तक 50% बच्चे बिना चश्मे के बाहर चलने लायक नहीं होंगे।
प्राकृतिक तौर पर हमारी आँख दूर देखने के लिए बनी है, हमने पास देखने का काम ज्यादा कर दिया है, जिसके चलते आँख की नस पर भारी दबाव पड़ता है।
आँख बाहर की तरफ फैल कर लंबी हो जाती है, दूर का सब धुंधला दिखाई देने लगता है, यही मायोपिया है।
मोबाइल, किताबों और टीवी ने आँखों को भारी तनाव दिया है। दिन में एक घंटा ऐसा करने से भरपूर नुकसान हो जाता है, आप हो जाते मायोपिक।
इसे रोकने का आसान तरीका भी है, जो आज की इंडोर लाइफ स्टाइल ने मुश्किल बना दिया है। दो घंटे की धूप हमें इस समस्या से बचा लेती है।
पहले यह ट्रिगर नहीं था, लेकिन कोविड के लॉकडाउन ने हमें अंधेरे में क़ैद कर दिया। ऑनलाइन एजुकेशन ने मायोपिया को एक झटके में दुगना कर दिया।
बेहतर आँख के लिए रोज़ाना 15 मिनट खूब दूर तक का देखिए।
आसमान को ताकिये.... आपकी आँख मुस्कुराती रहेगी, वर्ना आपका दक्षिण कोरिया बनते देर नहीं लगेगी, जहाँ इंडोर शिक्षा ने 80% बच्चे मायोपिक बना दिए हैं।
#Myopia #eyecare #ScreenTime