हरियाणा में होने वाले आगामी 'एसआईआर' (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के मद्देनजर सिरसा के विधानसभा कालावाली हल्के विद्यायक@shishpalkeharwala एक विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में सभी सरपंच B.L.A 2 मौजुद रहे।
हरियाणा में होने वाले आगामी 'एसआईआर' (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के मद्देनजर सिरसा के डबवाली विधानसभा पूर्व विद्यायक एक विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में हमारे समर्पित नेताओं,ओर B.L.A 2 उपस्थित रहे।
सिरसा के कांग्रेस भवन में 'एसआईआर' (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर आयोजित एक बेहद ही महत्वपूर्ण बैठक के उपरांत जिला कांग्रेस कमैटी द्वारा एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस दौरा��, वरिष्ठ नेताओं, व पदाधिकारी ऊर्जावान कार्यकर्ताओं हिस्सा लिया।
#Rupee#Currency#Depreciation
India’s own history offers an important lesson. Between 2003 and 2007, the rupee remained stable and even strengthened. The rupee strengthened from approximately ₹48 per $ in early 2003 to around ₹39 per $ by late 2007, an average of 3% annually, reversing a decade-long trend of steady depreciation.
India saw high GDP growth of 8–9%, witnessing a strong investment cycle. Exports were growing rapidly. A booming IT and services sector provided steady dollar revenue for the country. Infrastructure, telecom and industry were attracting large investments.
The RBI was not selling dollars to defend the currency. It was buying dollars to stop the rupee from appreciating too quickly.
Growth was not just fast. Growth was creating productive opportunities. Growth stories attract headlines. Productive opportunities attract capital.
https://t.co/NEJySaVVpL
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी के विरुद्ध इस्तेमाल की गई अभद्र और घटिया भाषा पूरी तरह निंदनीय, शर्मनाक और अस्वीकार्य है।
खरगे जी देश के एक वरिष्ठ और लोकप्रिय दलित और जननेता हैं - उनका अनुभव, कद और प्रतिष्ठा अतुलनीय है। उनका अपमान किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि इस देश के SC-ST समाज के करोड़ों लोगों का भी अपमान है।
लेकिन यह कोई नई बात नहीं है - यह BJP-RSS की पुरानी और सुनियोजित मानसिकता है।
बाबासाहेब अंबेडकर का अपमान हो, दलित नेताओं को नीचा दिखाना हो, या SC-ST समाज के प्रतिनिधियों पर व्यक्तिगत हमले हों - भाजपा और RSS का इतिहास गवाह है कि जब-जब कोई दलित नेता सच बोलता है, तब-तब ये उसे अपमानित करने पर उतर आते हैं।
यही इनकी विचारधारा है, यही इनका असली चरित्र और चेहरा है।
और, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से सीधा सवाल है - क्या आप हिमंता सरमा की इस भाषा का समर्थन करते हैं? आपकी चुप्पी मजबूरी नहीं, सहमति है।
प्रधानमंत्री अगर देश के करोड़ों दलितों के सम्मान पर हमला होते देख मुँह न खोलें - वो न सिर्फ अपनी ज़िम्मेदारी से भाग रहे हैं, बल्कि उस अपमान के हिस्सेदार भी हैं।
इसलिए तो इन्हें गोदी मीडिया कहते हैं!
IYC के बब्बर शेरों से रिपोर्टर पूछ रही है कि जो किया है उस पर शर्म है..।
ऐसे 2 रूपल्ली के चाटुकारों में “नंगे” राजा से सवाल करने की हिम्मत है नहीं, लेकिन शांतिपूर्ण प्रद��्शन करने वालों से सवाल करेंगे।
धिक्कार है!
US trade deal के नाम पर हम भारत के किसानों के साथ विश्वासघात होते हुए देख रहे हैं।
मैं प्रधानमंत��री से कुछ आसान सवाल पूछना चाहता हूं:
1. DDG import करने का वास्तव में क्या मतलब है? क्या इसका मतलब यह है कि भारतीय मवेशियों को GM अमेरिकी मक्का से बने distillers grain खिलाए जाएंगे? क्या इससे हमारे दूध उत्पाद प्रभावी रूप से अमेरिकी कृषि उद्योग पर निर्भर नहीं हो जाएंगे?
2. अगर हम GM सोया तेल के आयात की अनुमति देते हैं, तो मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और देशभर के हमारे सोया किसानों का क्या होगा? वे एक और कीमतों का झटका कैसे झेल पाएंगे?
3. जब आप “additional products” कह��े हैं, तो उसमें क्या-क्या शामिल है? क्या यह समय के साथ दाल और अन्य फसलों को अमेरिकी आयात के लिए खोलने के दबाव का संकेत है?
4. “Non-trade barriers” हटाने का क्या मतलब है? क्या भविष्य में भारत पर GM फसलों पर अपने रुख को ढीला करने, procurement को कमजोर करने या MSP और bonuses को कम करने का दबाव डाला जाएगा?
5. एक बार यह दरवाज़ा खुल गया, तो हर साल इसे और ज़्यादा खुलने से हम कैसे रोकेंगे? क्या इसकी रोकथाम होगी, या हर बार सौदे में धीरे-धीरे और भी फसलों को मेज़ पर रख दिया जाएगा?
किसानों को ये सफ़ाई तो मिलनी ही चाहिए।
यह सिर्फ आज की बात नहीं है। ये भविष्य की भी बात है - क्या हम किसी दूसरे देश को भारत की कृषि उद्योग पर लंबे समय की पकड़ बनाने दे रहे हैं।
#FarmersFirst 🇮🇳
पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं मेरे पूज्य पिता जी चौधरी दलबीर सिंह जी की पुण्यतिथि पर आज हिसार स्थित मेरे आवास पर हवन कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
पिता जी ने अपना संपूर्ण जीवन समाजसेवा, सत्यनिष्ठा और निष्पक्ष राजनीति के मूल्यों को समर्पित किया। वे सदैव वंचित, शोषित और पिछड़े वर्गों की आवाज़ बने रहे तथा उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने में अग्रणी भूमिका निभाई।
उनकी स्पष्टवादिता, ईमानदारी और जनसेवा के प्रति निष्ठा आज भी मेरे जीवन का मार्गदर्शन करती है। ईश्वर से प्रार्थना है कि उनके पुण्य स्मरण हमें सदैव लोकसेवा की भावना में दृढ़ बनाए रखें।
आजीवन समाजसेवा को समर्पित, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं मेरे पूज्य पिता श्री चौधरी दलबीर सिंह जी की पुण्यतिथि पर उन्हें सादर प्रणाम।
उनकी दी गई सीख, उनके आदर्श, संघर्ष और लोकसेवा की प्रेरणा सदैव मेरे जीवन का मार्गदर्शन करती रहेगी।
त्याग, समर्पण और अद्भुत नेतृत्व की प्रतीक, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की महासचिव, CWC सदस्य, पूर्व केंद्रीय मंत्री आदरणीय कुमारी सैलजा जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं।
#HBDkumariselja
श्री @RahulGandhi जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं! आपको हमेशा खुशी, स्वास्थ्य और सफलता मिले, इस विशेष दिन पर, मैं आपको आपके सभी प्रयासों में सफलता की कामना करता हूँ। आप मेरे लिए हमेशा एक मार्गदर्शक रहे हैं और रहेंगे, भगवान आपको लम्बी आयु प्रदान करे!
#HBDRahulGandhi
मनगढ़
(वर्ष 2010 में उत्तर प्रदेश में मेरे गृह जनपद में एक भगदड़ में 150 से अधिक मौतें हुई थीं। मैंने यह कविता उस समय लिखी थी। मालू�� पड़ता है हमारा मुल्क एक भगदड़ से दूसरी भगदड़ की ओर सतत प्रवहमान है - संदीप)
नामों का भी कुछ समाज – मनोविज्ञान
होता है, ऐसा ही कुछ कहना एक प्रोफेसर का
‘मनगढ़’ नाम ऐसे ही न���ीं पड़ा होगा
गँवई मजाक में ‘मनगढ़ू’ ही माने जाते थे वो
मेरे बचपन तक।
अब मनगढंत नहीं रह गया था
‘मनगढ़’, मनगूढ़ होकर
चेतना के क्षितिज पर भले फ़ैल गया हो।
*************************
तस्वीरें देखीं हमने दिल्ली में, सिर्फ तस्वीरें
रोते–बिलखते लोगों की, दब–पिच गई ठठरियों की।
अंग्रेज़ी के राष्ट्रीय अखबारों ने एक संवाददाता भी न भेजा ‘मनगढ़’
उन्हें पीटीआई से ही मिली तस्वीर! लखनऊ से ही बनी थी खबर!
उसकी भी सुध लेने की बुध न रही
**********************
न कोई त्योहार था, न पर्व का दिन था
न किसी को आना था
ख़ुद को भगवान घोषित कर चुका एक बाबा था
कुछ वर्ष पहले मृत उसकी पिचहत्तर साला स्त्री थी!
उसके मरने का सालाना जलसा था बस
और लोग थे, बहुत लोग थे...
चले आ रहे थे चारों पैरों, द��ों दिशाओं से...
अक्षत जैसे अनाज के दाने थे
सूखी छातियाँ थीं, खाली पेट थे और
एक अंध तरलता थी बस..
एक थाली, एक गिलास, दो लड्डू
और एक साड़ी के लत्ते का वादा था
और लोग थे सचमुच
औरतें थीं बहुत
कमजोर ही सही, पर हंसोड़ और कलंदर
बच्चे थे बहुत!!
सब भाप हो गए, भाप हो गए सब
********************
सुबह-सबेरे ही पक गया था कलेवा
पास पड़ोस के गाँवों–कुगाँवों में
स्वबोध से ही तय थी बात
जल्दी से जल्दी आश्रम पहुँचने की।
कतार में ��ंधकर चीटियों की तरह
निकली थीं औरतें
गेंहूँ के हाथ भर बढ़ आये खेतों की मेड़ों से
फुदकते हुए उड़ चला था बच्चों का रेला
‘आ – श्रम’ की तरफ
***********************
टन–टन–टन–टन
घंटी बज रही थी लगातार
चेतावनी का लौह रुदन था या
आहुति की सामूहिक बुलावट थी?
धर्म और आस्था थी या लालच था
या सबका जरा-जरा सा मिश्रण था?
भूख थी या एक जीभ थी बस?
खींचा था जिसने उनको
(मृत्यु) मंडप की तरफ
विचारें ‘विद्वतजन’।
अभी–अभी पेश हुआ है
डॉलर के बोझ से दबा हुआ,
भारी भरकम सालाना बज़ट
हीं हीं करते वित्त मंत्री के
बजटीय गणित के बाहर रह गए ये लोग थे।
बहुत लोग थे, बच्चे थे बहुत
बहुत पेट थे, चीखें थीं बहुत
बहुत थी घुटन.....
*******************
कुछ वर्ष पहले भी यही हुआ था
नवाबों के पुराने श���र
लुटेरों के नए शहर लखनऊ में
धोती जोहने आयीं ठठरियां
बेधोती धुंवा गईं गोमती किनारे
‘वह’ फूल छाप ‘साड़ी’ बाँट रहा
तुंदियल एक नेता था
******************
पुलिस-फौज की लाठी-गोली से
नहीं मरे वे
अभागे आदिवासियों या कश्मीरियों की तरह।
न डूबे चक्रवाती पानी में
य���ं ही उनको मारा गया,
ऐसे ही दब-पिच कर मर गए
खड़े–खड़े, मुंह बाए, आँखें फाड़े
एक खाली पेट बच्चा था
एक मुरछाई औरत थी......
दोनों के ऊपर दौड़ गए
सैकड़ों-हजारों खाली पेट लोग....
आँखें अपने कटोरों से उबल पडी होंगी
क्या–क्या निकला होगा मुंह से?
********************
किस भाषा में निकली होगी अंतिम चीख?
किस लिपि में दर्ज करोगे दम घुटने के अहसास को?
किस व्याकरण में बाँधोगे, समवेत रूदन को?
कौन सा कैमरा पकड़ेगा आँखों में
आ�� उस आख़िरी तस्वीर को?
कहाँ रिकार्ड हुई होगी वह पुकार
‘गौंखा में खोंस आई हूँ
36 रूपिया, रे गुड़िया!!” **
*******************
याद आता है पाब्लो पिकासो का
‘मैसाकर ऑफ कोरिया’
याद आती है कालजयी ‘शिंडलर्स लिस्ट’
कतार में खड़े सूखे मर्द,
सूखी औरतें, बच्चे!
‘कृपया, गैस चैंबर के लिए ��स तरफ’
कहता है तैनात नाजी
‘दब–घुटकर मरने के लिए, कृपया इस तरफ’
तो नहीं कहा होगा बाबा के स्वयंसेवकों ने!!
*******************
आठ एकड़ में फैला वह ‘आ-श्रम’ था
गैस चैंबर था कि खुली कब्र थी एक
जिसमें ज़िंदा ही मरना था सबको?
‘हाउस ऑफ पीपल’ के दोपायों
के सिर सहलाने वाला वह तुंदियल
क्रूर था या कृपालु?
**********************
क्यों मरते हैं बच्चे?
क्यों मरती हैं औरतें ही सबसे ज्यादा,
हर भगदड़ में?
कुम्भ से लेकर मक्का तक?
कब ह��� बना पायेंगें, इतनी जगह
इतनी व्यवस्था और रोटी, कि
एक भी औरत, एक भी बच्चा
दब–पिच के न मरे कम से कम..?
(**नोट: मनगढ़ की यात्रा के दौरान इन पंक्तियों के लेखक को तीन दिन बाद एक किशोर लड़की मिली जो भगदड़ में मृत अपनी माँ को याद करके विलख रही थी। उसका कहना था कि मरने से उसकी माँ के आख़िरी शब्द यही थे।)
Super excited to share this Street Play Abhyas! Please register if you want to want to go from becoming a Neta to an Abhineta! Scholarships available for those who cannot afford costs. Jai Jagat!
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी यूपी नहीं जा सकते। उन्हें रोकने के लिए आज पूरा प्रदेश अलर्ट पर है। यूपी दिल्ली के सभी बॉर्डर और टोल प्लाजा पर बेरिकेड्स लगाए गए हैं। भारी पुलिस बल तैनात है।
खुद नागरिकों पर अत्याचार करने वाली स��कार चाहती है कि विपक्ष का कोई नेता किसी पीड़ित से न मिले।