इस देश के हर दफ्तर में मीटिंग-��ीटिंग खेला जाता है ... समझ नहीं आता है कि जब गरीबों की सुनवाई नहीं तो इन मीटिंग्स का हासिल क्या है ... तस्वीर इंदौर की है ... ज़रा सोचिये कितने दिनों की पीड़ा और व्यथा समेटे है ये शख्स ...
“100 मीटर नहीं, 100 पीढ़ियों का सवाल है अरावली।”
आज प्रकृति हारी तो कल इंसान हारेगा।
अरावली कोई आँकड़ा नहीं, यह पानी, हवा और जीवन की ढाल है।
#SaveAravali#SaveAravaliHills#अरावली_बचाओ 🙏
अरावली को बचाओ इससे पहले कि ये बस एक याद बनकर रह जाए।
अगर हम आज खड़े नहीं हुए तो ये शानदार view कल नहीं रहेगा इन पहाड़ियों ने रेगिस्तान, सूखे और प्रदूषण से हमें लाखों सालों से बचाया है।
इन पहाड़ों ने 15 अरब वर्षों तक हमारी रक्षा की है अब इसकी रक्षा करने की जिम्मेदारी हमारी है।
मालती मुर्मू ने साबित कर दिया कि बदलाव के लिए न पद चाहिए, न पैसा सिर्फ हौसला और जज़्बा चाहिए। पश्चिम बंगाल के आदिवासी गांव जिलींगसेरेंग में उन्होंने अपने घर को स्कूल बना दिया। आज 45 बच्चे रोज़ पढ़ने आते हैं। यह शिक्षा की असली क्रांति हैं।
आपको क्या लगता हैं फ़तेह सिंह जी की टीम ने नरेश मीणा क़ो जमानत के लिए केवल न्याय संगत लड़ाई लड़ी या फिर या फिर भरस्टाचार शासन व प्रशासन से
#NareshMeena#नरेश_मीणा_बाहर_आ_रहा_है#नरेश
यह महाराष्ट्र के नासिक जिले के आदिवासी गांव बोरिचीवाड़ी की तस्वीर है, जहां जल संकट इतना गंभीर हो चुका है कि ग्रामीण महिलाएं अपनी जान जोखिम में ��ालकर गहरे कुओं से पानी निकालने को मजबूर हैं। यह दृश्य जल जीवन मिशन योजना की विफलता को उजागर करता है। एक आदिवासी महिला के राष्ट्रपति बनने के बावजूद इन लोगों के जीवन में कोई बदलाव नहीं आया है। इनके जीवन में वास्तविक बदलाव तभी आएगा जब हम जैसे लोग सरकार की इस नाकामी की आलोचना करेंगे और उसे जवाबदेह ठहराएंगे।