@sanjaygupta1304 मध्यप्रदेश बिजली विभाग में नियमित पद 49263 स्वीकृत किए थे ,उस पदों पर नियमित भर्ती कब तक आएगी ?? जानकारी निकाल कर प्रदेश की सभी युवाओं को अवगत कराएं।
आदिवासियों की विधानसभा में बुलंद आवाज,
@JAYS_org संस्थापक सदस्य और राष्ट्रीय स्तर पर jays को पहचान दिलाने वाले,
AIMS रिटर्न और माननीय विधायक मनावर आप @HIRA_ALAWA भैया को जन्मदिवस की अनंत बधाई एवं शुभकामनाएं…
💐🎂💐
माननीय @CMMadhyaPradesh@DrMohanYadav51 जी कृपया मध्यप्रदेश में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी पदो पर बिना परीक्षा का नियुक्त करने विशेष पिछड़ी जनजाति सहारिया बैगा भारिया का निश्चित कोटा फिक्स जिससे अनूसूचित जनजाति की कुछ सीटें बचें व अन्य ST के साथ न्याय हो। और उनको भी अवसर मिलें
माननीय @CMMadhyaPradesh@DrMohanYadav51 जी कृपया मध्यप्रदेश में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी पदो पर ��िना परीक्षा का नियुक्त करने विशेष पिछड़ी जनजाति सहारिया बैगा भारिया का निश्चित कोटा फिक्स जिससे अनूसूचित जनजाति की कुछ सीटें बचें व अन्य ST के साथ न्याय हो। और उनको भी अवसर मिलें
माननीय @CMMadhyaPradesh@DrMohanYadav51 जी कृपया मध्यप्रदेश में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी पदो पर बिना परीक्षा का नियुक्त करने विशेष पिछड़ी जनजाति सहारिया बैगा भारिया का निश्चित कोटा फिक्स जिससे अनूसूचित जनजाति की कुछ सीटें बचें व अन्य ST के साथ न्याय हो। और उनको भी अवसर मिलें
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा बैगा, भारिया और सहरिया जनजातियों—जो कि केंद्र ���्वारा अधिसूचित विशेष पिछड़ी जनजातियाँ (PVTGs) हैं—को सरकारी सेवाओं में सीधी भर्ती का प्रावधान दिया गया है। इस नीति का उद्देश्य ऐतिहासिक उपेक्षा, अत्यधिक गरीबी, कुपोषण, अशिक्षा और सामाजिक पिछड़ेपन के कारण इन जनजातियों को त्वरित रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। यह कदम PM-जनमन योजना की भावना से भी जुड़ा है।
नीति के अनुसार, तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के गैर-राजपत्रित पदों पर PVTG अभ्यर्थियों को बिना परीक्षा या साक्षात्कार के सीधे नियुक्ति दी जाती है। वे केवल न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता पूरी करके आवेदन जमा करते हैं और ST कोटे की उपलब्ध रिक्तियों में 100% प्राथमिकता पाते हैं।
लेकिन समस्या कहाँ है?
मध्य प्रदेश की कुल जनजातीय आबादी में: (2011 जनगणना अनुसार)
PVTGs (बैगा–भारिया–सहरिया) की आबादी लगभग 3% है
जबकि भील, भिलाला, गोंड, कोरकू, कौल, पावरा आदि जनजातियाँ करीब 18% हिस्सेदारी रखती हैं
ऐसे में जब ST कोटे ��े सभी रिक्त प��ों पर PVTGs को 100% प्राथमिकता दी जाती है, तो संपूर्ण 21% आरक्षण के भीतर सामान्य आदिवासी समाज के लिए अवसर अत्यंत सीमित हो जाते हैं। इससे दो स्पष्ट समस्याएँ उत्पन्न होती हैं:
अन्य ST समुदायों के लिए अवसरों का संकुचन
आंतरिक असमानता, जो ST श्रेणी के भीतर असंतोष को जन्म देती है
नीति-सुधार क्यों जरूरी है?
न्याय के संतुलित सिद्धांत के अनुसार, ST श्रेणी के भीतर अवसरों का वितरण आबादी के अनुपात में होना चाहिए। चूँकि PVTGs की जनसंख्या कुल आदिवासी समाज का केवल 3% है, इसलिए ST कोटे के कुल पदों में से 4–5% पद विशेष रूप से PVTGs को दिए जाना अधिक तर्कसंगत है। इससे:
PVTGs को संरक्षण भी मिलेगा,
और अन्य आदिवासी समाज—भील, गोंड, भिलाला आदि—के साथ अन्याय भी नहीं होगा।
PVTGs के सामाजिक उत्थान के लिए विशेष प्रावधान आवश्यक है, लेकिन इसके साथ ही ST श्रेणी के भीतर समान अवसर, आंतरिक न्याय, और आबादी आधारित वितरण भी सुनिश्चित होना चाहि��। इसलिए मध्य प्रदेश सरकार को इस नीति की पुनर्समीक्षा कर इसे अधिक संतुलित और पारदर्शी बनाना चाहिए, ताकि संपूर्ण आदिवासी समाज का समग्र विकास हो सके।
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा बैगा, भारिया और सहरिया जनजातियों—जो कि केंद्र द्वारा अधिसूचित विशेष पिछड़ी जनजातियाँ (PVTGs) हैं—को सरकारी सेवाओं में सीधी भर्ती का प्रावधान दिया गया है। इस नीति का उद्देश्य ऐतिहासिक उपेक्षा, अत्यधिक गरीबी, कुपोषण, अशिक्षा और सामाजिक पिछड़ेपन के कारण इन जनजातियों को त्वरित रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। यह कदम PM-जनमन योजना की भावना से भी जुड़ा है।
नीति के अनुसार, तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के गैर-राजपत्रित पदों ���र PVTG अभ्यर्थियों को बिना परीक्षा या साक्षात्कार के सीधे नियुक्ति दी जाती है। वे केवल न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता पूरी करके आवेदन जमा करते हैं और ST कोटे की उपलब्ध रिक्तियों में 100% प्राथमिकता पाते हैं।
लेकिन समस्या कहाँ है?
मध्य प्रदेश की कुल जनजातीय आबादी में: (2011 जनगणना अनुसार)
PVTGs (बैगा–भारिया–सहरिया) की आबादी लगभग 3% है
जबकि भील, भिलाला, गोंड, कोरकू, कौल, पावरा आदि जनजातियाँ करीब 18% हिस्सेदारी रखती हैं
ऐसे में जब ST कोटे के सभी रिक्त पदों पर PVTGs को 100% प्राथमिकता दी जाती है, तो संपूर्ण 21% आरक्षण के भीतर सामान्य आदिवासी समाज के लिए अवसर अत्यंत सीमित हो जाते हैं। इससे दो स्पष्ट समस्याएँ उत्पन्न होती हैं:
अन्य ST समुदायों के लिए अवसरों का संकुचन
आंतरिक असमानता, जो ST श्रेणी के भीतर असंतोष को जन्म देती है
नीति-सुधार क्यों जरूरी है?
न्याय के संतुलित सिद्धांत के अनुसार, ST श्रेणी के भीतर अवसरों का वितरण आबादी के अनुपात में होना चाहिए। चूँकि PVTGs की जनसंख्या कुल आदिवासी समाज का केवल 3% है, इसलिए ST कोटे के कुल पदों में से 4–5% पद विशेष रूप से PVTGs को दिए जाना अधिक तर्कसंगत है। इससे:
PVTGs को संरक्षण भी मिलेगा,
और अन्य आदिवासी समाज—भील, गोंड, भिलाला आदि—के साथ अन्याय भी नहीं होगा।
PVTGs के सामाजिक उत्थान के लिए विशेष प्रावधान आवश्यक है, लेकिन इसके साथ ही ST श्रेणी के भीतर समान अवसर, आंतरिक न्याय, और आबादी आधारित वितरण भी सुनिश्चित होना चाहिए। इसलिए मध्य प्रदेश सरकार को इस नीति की पुनर्समीक्षा कर इसे अधिक संतुलित और पारदर्शी बनाना चाहिए, ताकि संपूर्ण आदिवासी समाज का समग्र विकास हो सके।
क्या एक वरिष्ठ अधिकारी को यह अधिकार है कि वह अधीनस्थ को जानवरों की तरह पीटे!
सिर्फ आरआई का निलंबन किसी समाधान का रास्ता नहीं है। यह घटना सीधे तौर पर SC/ST अत्याचार अधिनियम के तहत दर्ज की जानी चाहिए। @DrMohanYadav51 और डीजीपी से मांग है,
माननीय मंत्री जी जब एक ही वितरण कंपनी में खाली पदों की ये स्थिति है तो सभी मध्यप्रदेश की वितरण कंपनी और पारेषण कंपनी में खाली पदों की क्या स्थिति होगी।
माननीय मंत्री जी अविलंब तुरंत खाली पदों पर नियमित भर्ती की जाए या अभी जो भर्ती आई है उसमें खाली पदों की संख्या जोड़कर पूर्ण करें
@PradhumanGwl माननीय मंत्री जी जब एक ही वितरण कंपनी में खाली पदों की ये स्थिति है तो सभी मध्यप्रदेश की वितरण कंपनी और पारेषण कंपनी में खाली पदों की क्या स्थिति होगी।
माननीय मंत्री जी अविलंब तुरंत ख��ली पदों पर नियमित भर्ती की जाए या अभी जो भर्ती आई है उसमें खाली पदों की संख्या जोड़कर पूर्ण करें
@PradhumanGwl@PradhumanGwl अच्छा ये बड़ी भर्ती हैं?? गज़ब का ज्ञान है।
एक बार में 1017 पदों पर भर्ती ना कर 3 चरणों में सिर्फ 712 पदों भरेंगे।
और बचें 305 पदों को शायद चुनाव के लिए बचाकर रखोगे?
या बचें पदों पर बैकडोर एंट्री होगी ये विचारणीय है?
लगें रहो चुनाव तक ।
@Energy_MPME की कंपनी @MPEBIndore में परीक्षण सहायक, व लाइन परिचारक की रिक्त पद होने के बावजूद उन पर भर्ती नहीं कर, आउटसोर्सिंग से काम चलाकर युवाओं का शोषण कर मौत के मुंह में धकेलना समझ से परे है।
@ChouhanShivraj@PradhumanGwl आप पूरी तरह से सरकार चलाने में विफल हुए हो।
@INCMP
शिवराज सरकार का रिपोर्ट कार्ड
एक लाख भर्ती की घोषणा सितम्बर 2021 से शुरु हो गयी थी लेकिन आज तक पूरी नहीं कर पाए। 60000 भर्ती आयी उसमे से 43000 पूरी हुई बाकी पदो पर नियुक्ति रुकी है।
लेकिन हर भाषणों मे बराबर एक लाख भर्ती की घोषणा होती रही।
#एक_लाख_भर्ती_का_जुमला@yuvahallabol
गृहमंत्री @AmitShah जी, आज आप मध्यप्रदेश मे शिवराज सरकार का रिपोर्ट कार्ड पेश करने आ रहे है। जो कागजो पर हवाहवाई रिपोर्ट कार्ड होगा।
वास्तविक रिपोर्ट कार्ड तो जनता जारी करती है।
आज प्रदेश के युवाओं ने शिवराज सरकार का रिपोर्ट कार्ड जारी किया, जरुर देखे 👇
#एक_लाख_भर्ती_का_जुमला