#Jaipur: 'मदन दिलावर ���ी पत्नी भी चाहती है इस्तीफा दे दे'
पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा का रोचक बयान, डोटासरा बोले-'भाजपाई भी चाहते हैं कि दिलावर इस्तीफा...
#RajasthanWithFirstIndia @naresh_jsharma
1.काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का देश की राजधानी नई दिल्ली में संसद के नज़दीक जन्तर मन्तर में पिछले कई दिनों से, ख़ासकर मेडिकल की नीट जैसी विशेष परीक्षा आदि में पेपरलीक व अन्य गड़बडियों के दुष्परिणामों से छात्र-छात्राओं व उनके परिवार के काफी ब��री तरह से प्रभावित हो रहे जीवन को लेकर जारी अनिश्चितकालीन आन्दोलन के कारण सड़क से लेकर संसद तक में ज़बरदस्त हंगामा बरपा है और अब इसका राजनीतिकरण करने से यह मुद्दा सरकार के साथ सीधे टकराव का हो गया है, जिस विषम स्थिति से देश को निकालना ज़रूरी है, क्��ोंकि इससे दिल्ली में ही नहीं बल्कि विभिन्न राज्यों में भी आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है।
2.वैसे चाहे पूरे देश में अयोध्या श्रीराम मन्दिर में चढ़ावा चोरी/ग़बन आदि का गर्म मामला हो या फिर आल-इण्डिया व राज्यों की परीक्षाओं आदि में पेपरलीक का मुद्दा हो, यह सभी मूलतः भ्रष्टाचार के हर स्तर पर पनपने का ही परिणाम है।
3.इसके साथ ही यह संवैधानिक नैतिकता (constitutional morality) से भी जुडा़ मामला है, जिसके अभाव में यह ��ेश को दीमक की तरह खाता चला आ रहा है, जबकि संविधान निर्माता परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने गुड गवरनेन्स हेतु इस पर ख़ास ध्यान देने की ज़रूरत पर विशेष बल दिया है।
4.संक्षेप में मेरा यही कहना है कि देश व जनहित से जुड़े वर्तमान विकट हालात के सौहार्द��ूर्ण समाधान हेतु सरकार तथा माननीय कोर्ट जैसी संवैधानिक संस्थाओं को अपनी भूमिका निभाने की पहल करनी चाहिये तो यह बेहतर होगा।
5.साथ ही, सीजेपी के व्यापक हो रहे आन्दोलन का अब विभिन्न राजनीतिक पार्टियों द्वारा अपने-अपने संकीर्ण स्वार्थ में राजनीतिकरण करके सड़क से लेकर संसद तक में टकराव व हिंसा किया जाना घोर अनुचित। सरकार व आन्दोलनकारी दोनों मिलकर इसका शान्ति व सौहार्दपूर्ण समाधान जितना जल्��� निकालें उतना ही उचित।
खान सर का हॉस्पिटल जैसे ही open हुआ तो खान सर की सारी जिहादी हकीकत सामने आ गई।
बहुत से लोग खान सर की तारीफ कर रहे हैं की खान सर गरीबों के लिए हॉस्पिटालिटी खोल दिया
लेकिन जब सच्चाई सामने आई तो सब दंग रह गए
दर असल जब एक गरीब आदमी खान सर के हॉस्पिटल में गए तो उन्होंने जो खुलासा की ���िया किया वह सच में कबीले तारीफ थी
गरीब तो खुश होकर खान सर को दुआ दे रहे हैं, वहीं कुछ टीचर्स को ये बात हजम ��हीं हो रही। इनकी मां के कहने पर इन्होंने एक इतना बड़ा हॉस्पिटल बना दिया जो आज तक इंडियन गवर्नमेंट ने भी नहीं बनाया होगा।
जैसे ही पटना में खान सर का एक नया अस्पताल खुला और जो पटना में पुराने अस्पताल थे उनकी टेंशन्स बढ़ गईं, क्योंकि पेशेंट्स खान सर के हॉस्पिटल में जाने लग गए जो कि खचाखच भरे हुए हैं।
पुराने अस्पताल वाले गरीबों से मनमानी करके एक बड़ा बिल थमा देते थे, जो कि गरीब दे भी नहीं पाता था। ���र खान सर ने जो भी बोला था ना, वो बिल्कुल राइट है:
* एक्स-रे: 35 रुपये
* ECG: 25 रुपये
* ब्लड टेस्ट: 7 रुपये
* अल्ट्रासाउंड: मात्र 300 रुपये
सबसे खास बात ये है कि इस हॉस्पिटल की सभी बीमारियों के रेट इनकी मां ने डिसाइड किए हैं। और शर्म की बात ये है कि इंडिया का कोई भी न्यूज़ चैनल इस टॉपिक को कवर भी नहीं कर रहा। तो आप भी इस वीडियो को ज्याद��� से ज्यादा शेयर कीजिए ताकि सरकार को भी मुंहतोड़ जवाब मिल सके।"
18% टैरिफ बनाम 0% - आइए समझाता हूं, कैसे झूठ बोलने में माहिर प्रधानमंत्री और उनकी कैबिनेट इसपर भ्रम फैला रहे हैं। और, किस तरह से वो भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से देश के कपास किसानों और टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स को धोखा दे रहे हैं।
बांग्लादेश को अमेरिका में गारमेंट्स निर्य��त पर 0% टैरिफ का फायदा दिया जा रहा है - शर्त बस इतनी है कि वो अमेरिकी कपास आयात करें।
भारत के गारमेंट्स पर 18% टैरिफ की घोषणा के बाद जब मैंने संसद में बांग्लादेश को मिल रही खास रियायत पर सवाल उठाया, तब मोदी सरकार के मंत्री का जवाब आया - “अगर यही फायदा हमें भी चाहिए, तो अमेरिका से कपास मंगवानी होगी।”
आखिर, ये बात तब तक देश से छुपाई क्यों गई?
और, ये कैसी नीति है? क्या यह सचमुच में कोई विकल्प है - या फिर “आ���े कुआं, पीछे खाई” की हालत में फंसाने वाला जाल?
अगर हम अमेरिकी कपास मंगवाते हैं तो हमारे अपने किसान बर्बाद हो जाएंगे। अगर नहीं मंगवाते, तो हमारा टेक्सटाइल उद्योग पिछड़कर तबाह हो जाएगा।
और, अब बांग्लादेश यह संकेत दे रहा है कि वह भारत से कपास आयात भी कम या बंद कर सकता है।
भारत में टेक्सटाइल उद्योग और कपास की खेती आजीविका की रीढ़ हैं। करोड़ों लोगों की रोज़ी-रोटी इन्हीं पर टिकी है। इन क्षेत्रों पर चोट का मतलब है लाखों परिवारों को बेरोज़गारी और आर्थिक संकट की खाई में धकेल देना।
एक दूरदर्शी और राष्ट्रहित में सोचने वाली सरकार ऐसा सौदा करती जो कपास किसानों और टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स - दोनों के हितों की रक्षा और समृद्धि सुनिश्चित करती।
लेकिन इसके ठीक उलट, नरेंद्र “सरेंडर” मोदी और उनके मंत्रियों ने ऐसा समझौता किया है जो दोनों क्षेत्रों को गहरी चोट पहुंचा��े वाला साबित हो सकता है।
#FarmersFirst 🇮🇳
ब्राह्मणों की कूटनीति से देश नहीं चलेगा ,
भारत देश बाबा साहेब अम्बेडकर जी के संविधान से चलेगा!
जिनको आरक्षण, UGC विधेयक, से नफरत है वो पाकिस्तान, ईरान, यूरेशिया, अपने घर पुनः वापस चले जाएं !
#UGC_लागू_करो#UGC_ACT
@RSSEkikrat_एक शिक्षक संघ तो इतना झूठा निकला कि बोलता है कि तृतीय श्रेणी शिक्षकों की तबादला नीति🔁बनकर तैयार है शिक्षकों का भला होगा कि नहीं होगा यह तो भविष्य के गर्भ में छिपा है लेकिन तुम्हारा भविष्य 2028 में खत्म होने वाला है इसको दुनियां की कोई ताकत नहीं रोक सकती भविष्यवाणी है