माटी से मूरत गढ़े,सद्गुरु फूंके प्राण।
कर अपूर्ण को पूर्ण गुरु, भव से देता त्राण।।
ॐ नमो गुरूवे नमः
साकेतवासी रघुवंश संत शिरोमणि श्री श्री 1008श्री महंत कनकबिहारीदास जी महाराज श्री राम-जानकी मंदिर लोनीकला जिला छिंदवाड़ा मप्र
कुछ न हुआ, न हो
मुझे विश्व का सुख, श्री,
यदि केवल
पास तुम रहो!
मेरे नभ के बादल यदि न कटे-
चन्द्र रह गया ढका,
तिमिर रात को तिरकर यदि न अटे
लेश गगन-भास का,
रहेंगे अधर हँसते, पथ पर, तुम
हाथ यदि गहो।
बहु-रस साहित्य विपुल यदि न पढ़ा--
मन्द सबों ने कहा,
मेरा काव्यानुमान यदि न बढ़ा--
ज्��ान, जहाँ का रहा,
रहे , समझ है मुझमें पूरी, तुम
कथा यदि कहो।
॥ जय माँ चंडी ॥
माँ चंडी आदिशक्ति का उग्र, तेजस्वी और करुणामयी स्वरूप हैं। वे धर्म की रक्षा, अधर्म के विनाश तथा अपने भक्तों के भय, शत्रु, संकट और नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाली मानी जाती हैं🧵
बिना अंध-विश्वास किए परमार्थ मार्ग में कुछ भी उन्नति नहीं की जा सकती। गुरु वाक्य पर विश्वास, शास्त्रों पर विश्वास करके ही अभ्यास किया जा सकता है। जब कुछ अभ्यास करने लगे, तो उसे स्वयं ही अनुभव होने लगता है और तब स्वतः अनुभव आगे के मार्ग के लिए प्रमाण हो जाता है।
माता दुर्गा के चरणों में संकटमोचन हनुमान जी का यह सुंदर दोहा समर्पित है:
सिंहवाहिनी जगदम्बिका, तुम हो शक्ति अपार।अंजनी-सुत वंदन करे, कीजो भव से पार।।
अर्थ: सिंह की सवारी करने वाली संपूर्ण संसार की माता। आपकी शक्ति और महिमा अनंत है। माता अंजनी के पुत्र हनुमान जी आपके चरणों में प्रणाम करते हैं। आप कृपा करके इस संसार रूपी सागर से हम���रा उद्धार करें।
🔱!!जय माँ जगदम्बा!!जय पवनपुत्र हनुमान!!
जिसका बीज खाते आए हैं/खा सकते हैं उसी का तेल खाना चाहिए, सीधा सा नियम।
खाद्य पदार्थों के लिए देश-काल को ध्यान में रखना चाहिए। ये नहीं कि 40 डिग्री में बैठे चीज़ खा रहे हैं, Palm seeds का पता नहीं औ�� palm oil खाते जा रहे।
@Akshara75u इस कारण भारतीय सनातनी महिलाएं अपने पति कि दीर्घायु के लिए वोट सावित्री का व्रत पुजन करती है मैंने अपनी मां को देखा है वे इस व्रत के दौरान जल का भी त्याग कर देती है
@Akshara75u सबसे ���हले तो हमें पुराण क्या है यह समझने कि आवश्यकता है फिर उनमें वर्णित कथाओं को पढ़ने सुनने के पश्चात चिंतन और उचित गुरु के मार्गदर्शन के पश्चात विश्लेषण करना चाहिए परन्तु आज सभी तर्कों के आधार पर पुराणों में वर्णित कथाओं को सही और गलत बताने लगते हैं जो अनुचित है
@0din_______@Akshara75u रुप धारण कर परिक्षा लेती है और महादेव से झूठ कह देती है कि आपके अनुसार प्रणाम किया जिससे महादेव जान जाते हैं अब महादेव कोपित होकर घोर समाधि में चलें जाते हैं तो महादेवी महादेव कि पुनः प्राप्ती हेतु यज्ञ विध्वंस कि माया रचतीं है और सती का देह त्याग कर राजा हिमा��ल के घर उमा के रूप
@0din_______@Akshara75u नारायण को महादेव के आराध्य, महादेव को नारायण के आराध्य माने ��ाते हैं तुलसी कृत रामायण के अनुसार माता सती और महादेव कुम्भज ऋषि के आश्रम राम कथा सुनने गए कथा सुनने के पश्चात वह कैलाश जा रहे थे तभी श्रीराम माता जानकी खोज कर रहे थे, माता सती ने उनकी परिक्षा लेने के लिए माता सीता का +
अर्थात देवाधिदेव का यज्ञ में भाग निश्चित नहीं किया गया। इसी यज्ञ का विध्वंस करने के लिए महादेव के मुख से महाबली वीरभद्र का और भगवती उमा के क्रोध से महाभयंकर भद्रकाली का प्रादुर्भाव हुआ।
There are two ways to argue in a discussion;
1. Win at any cost even if you have to be dishonest. (Mostly people do it)
2. Not forgetting the Cause, don't let your ego be bigger than the Cause. (Very few have this clarity).