तुम राम मंदिर का जश्न मनाते रहना उधर देखो कितना बड़ा खेला हो रहा है।
ICSSR भर्ती का फॉर्म भरने के लिए
ओबीसी वर्ग को ₹1500 देने हैं
एससी एसटी वर्ग को ₹750 देने हैं
EWS सवर्ण के लिए बिल्कुल फ्री है
हमारे एससी एसटी ओबीसी वर्ग के नेताओं को इस पर बोलना चाहिए आखिर क्यों नहीं बोलते?
राजस्थान RJS सिविल जज भर्ती परीक्षा 2024 में ब्राह्मणों का बड़ा कारनामा
सामान्य वर्ग की 92 सीट पर 33 ने कब्जा किया।
लेकिन 33 में से यह 32 लोग अंग्र��जी के पेपर में 40% नंबर नहीं लाने पर भी जज बन गए।
EWS की 21 सीट पर भी 7 ब्राह्मण जज बने है। जिनमें भी इन्होंने अंग्रेजी पेपर में 40% अंक प्राप्त नहीं किए है।
कुल ब्राह्मण जज:- 40+ बने है।
अब यह देश की न्यायपालिका को चलाएंगे?
या ऐसा कहे कि परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी ने कॉपी चेक करने में भूल की?
बड़ा सवाल यह है कि सामान्य वर्ग की सीटों पर इनका एकतरफा कब्जा करना अन्य वर्गों के लोगो के साथ भी बड़ा धोखा नही��� है?
एक तरफ यही लोग आरक्षण को लेकर योग्यता पर सवाल उठाते रहे है। लेकिन दूसरी तरफ इनकी योग्यता अब बाहर आ रही है।
इनमें से काफी लोग NLU सहित बड़े बड़े विश्विद्यालय में पढ़े है। लेकिन RJS की परीक्षा में अंग्रेजी के पेपर में यह सब लोग फुस्स हो गए?
मैं इनसे एक सवाल करता हू क्या अब भी यह लोग जातिगत ��रक्षण पर सवाल उठाएंगे?
@talk2anuradha
@ShubhamShuklaMP @Shubham_fd
@ajeetbharti
@ChandanSharmaG @SonOfBharat7
@RajatSharmaLive
@RoliTiwariMish1
Roster violation in IIM Calcutta!
UR Total sanctioned positions are 53
But total recruited UR Positions are 73
What is interesting is still 20 UR positions are vacant!
There are only 4 OBC, 2 SC and 0 ST faculty members in IIM Calcutta.
Is this social justice?
We demand @dpradhanbjp Ji to immediately conduct enquiry and fill reserved positions.
EWS reservation is not based rationality and not based on principle of justice.
Telangana is having nearly 60% OBC population but injustice is happening due to 25% reservations for BC-A, B, C, D castes. Is this social justice?
The Telangana Directorate of School Education has announced a total of 11,062 vacancies for Special Education Teachers at the Upper Primary and Secondary levels, as well as for SAs, SGTs, LPs, PETs, and Special Education Teachers at the Primary level. Recently, DSC results were announced. In every district EWS cutoffs are lesser than OBC cutoffs and in some districts lesser than SC and ST cutoffs.
Only legislative who is raising the issue is @TeenmarMallanna
NABARD की इस भर्ती में SC/ST/OBC रिज़र्वेशन लागू करने में गड़बड़ी की गयी है।विज्ञापन देखकर लगता है कि राज्यवार आरक्षण इसलिए लागू किया है ताकि आरक्षित सीटों की संख्या कम हो जाए। भारत की संस्था राज्यवार आरक्षण कैसे लागू कर सकती है॥
@narendramodi@DFS_India
https://t.co/xExxgTDrjV
1. “हरियाणा में दलित होना पाप है! हुड्डा सरकार ने उनकी सुरक्षा के लिए कोई कदम नहीं उठाया।” - कुमारी शैलजा , 18 अक्टूबर, 2013
2. “हरियाणा सरकार लापरवाह और छोटी मानसकिता वाली, दलित समाज को वोट के लिए इस्तेमाल क���या जाता है” - कुमारी शैलजा, 15 दिसंबर, 2013
2013 में केंद्रीय मंत्री शैलजा जी हरियाणा के उस समय के मुख्यमंत्री भूपिंदर हुड्डा से कितनी परेशान हो चुकी थीं और राज्य मे दलित उत्पीड़न बढ़ने से कितनी दुखी थी, उसे इन बयानों से समझा जा सकता है:
पूरी खबर
1. “हरियाणा में दलित होना पाप है”
हरियाणा में दलितों की स्थिति पर केंद्रीय मंत्री और दलित नेता कुमारी शैलजा ने हरियाणा सरकार को आड़े हाथों लिया।
शैलजा ने ब���हस्पतिवार को दलित युवक के घर से लौटने के बाद कहा कि हरियाणा में दलित होना क्या पाप है? अगर दलित सुरक्षित नहीं है और सरकार कुछ नहीं कर रही है तो यह कहा जा सकता है यहां दलित होना पाप है।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में हरियाणा में दलितों पर अत्याचार की कई घटनाएं सामने आई हैं। हुड्डा सरकार ने उनकी सुरक्षा के लिए कोई कदम नहीं उठाया।
कुमारी शैलजा इस समय केंद्र में आवासीय और शहरी गरीबी उन्मूल��� और सांस्कृतिक मंत्री हैं। वह राज्य से चार बार सांसद रह चुकीं हैं।
खबर 2. “हरियाणा सरकार लापरवाह और छोटी मानसकिता वाली”
हरियाणा सरकार लापरवाह है और हरियाणा में चल रही राजनीति छोटी मानसिकता की मिसाल है। यह शब्द रविवार को अंबाला में केन्द्रीय मंत्री कुमारी शैलजा ने कहे।
चंडीगढ़ में शैलजा व फुल चंद मुलाना समर्थकों में हुई खींचतान पर जवाब देते हुए शैलजा ने कहा कि दलित समाज को वोट के लिए इस��तेमाल किया जाता है। दलित समाज के लिए समारोह होता है और उन्हीं के नेताओं को न्यौता नहीं दिया जाता।
शैलजा ने यहां तक कह दिया कि उनकी छोटी सोच साबित करती है कि यह राजनीति में कहां तक गिर सकते हैं। केन्द्रीय मंत्री शैलजा ने कहा कि भारत में दलितों पर अत्याचार बढ़ें हैं और इसके लिए मजबूत सुरक्षा बिल लाया जायेगा।
शैलजा ने उन नेताओ पर भी निशाना कस दिया जो अक्सर शैलजा गुट को निशाना बनाते हैं। केन्द्रीय मंत्री कुमारी शैलजा ने माना कि भारत में दलितों पर अत्याचार बढ़ा है जिसको लेकर मजबूत कानून बनाये जाने की जरूरत है।
शैलजा ने कहा कि आखिरी ऐक्ट 1989 में राजीव गांधी के समय में बनाया गया था जो आज के समय में बहुत ज्यादा इफेक्टिव नहीं है। इसलिए मजबूत कानून बनाया जायेगा।
Injustice happening to OBCs, SCs and STs in PM’s own state.
No single OBC, SC, ST Professor in IIT Gandhinagar. Rosters are grossly violated.
Allocated Faculty strength - 190
Present Faculty Members - 135
General - 116 (61.05%)
OBC - 8 (4.21%)
SC - 7 (3.68%)
ST - 4 (2.10%)
EWS - 0
PWD - 0
#SocialJustice
भारत में दलित और आदिवासी होना बहुत मुश्किल भरा काम है.
दलित और आदिवासी होना यानी आप हर वक़्त खतरों से घिरे हुए हैं.
सवर्ण होना बढ़ा आसान है. सवर्ण जाति से होने के बहुत सारे फायदे ���र सामाजिक विशेषाधिकार है जो उन्हें जन्म के आधार पर मुफ्त में मिला है.
दलित और आदिवासियों पर साल के 365 दिन जातीय हिंसा - जातीय भेदभाव का खतरा मंडराते रहता है.
सवर्ण जातियों को जातीय हिंसा और भेदभाव नही झेलना पड़ता. सवर्ण जातियों के नाम पर जातिसूचक गालियां नही बनी हैं.
जातिसूचक गालियां केवल उन्ही जातियों पर बनी है जो किसी पेशे से जुड़ी हैं.
सवर्ण जातियों को केवल एक दिन अपनी पहचान छिपाकर दलित और आदिवासी बनना चाहि�� तब जाकर इन्हें पता चलेगा दलित और आदिवासी होना क्या होता है.
Photo : Tribal Women (Imaginary Purpose)
माननीय उच्च न्यायालय, पंजाब और हरियाणा द्वारा चपरासी के 300 पदों की भर्ती में एससी,एसटी और ओबीसी के लिए मात्र 30 पद आरक्षित करना।शोषित, हक-वंचित समाज के लोगों की हकमारी हैं और संविधान प्रदत्त आरक्षण की लूट हैं।
मेरा माननीय @indSupremeCourt से निवेदन है कि आरक्षित और गैर-आरक्षित वर्गों के इस असंवैध���निक (30/300) वर्गीकरण को संज्ञान में ले।
#Reservation_Fraud
More than 2700 Scientists at India's top farm research body- accounting for an overwhelming majority of senior-level hires at th Indian Council of Agricultural Research (ICAR) have been recruited through lateral entry since 2007.
The collegium system and democracy are not compatible.
Let’s demolish the collegium system to save democracy from the tyranny of the courts.
Brother Chandrashekhar Azad has demanded the dismantling of the collegium system, during his special mention in the Lok Sabha. Bravo! 👏🏽