नोएडा में 158 करोड़ रुपए लगाकर बस टर्मिनल बना. साल 2022 में CM योगी ने इसका उद्घाटन किया.
अब ये टर्मिनल बंद पड़ा हुआ है. यहां से एक भी बस नहीं चलती.
सोचिए- जनता के 158 करोड़ रुपए लगाकर इतनी बड़ी इमारत बना दी, लेकिन उसका इस्तेमाल तक नहीं किया जाता.
��यूपी
चढ़ावा चोरी की घटना के बाद अयोध्या में भक्तगणों के साथ ही स्थानीय निवासी भी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं,
छोटे से मयंक निषाद लता मंगेशकर चौक पर गोलगप्पे का ठेला लगाते हैं,
मयंक कह रहे हैं कि,
चढ़ावा चोरी की खबरें जब ��े आने लगी हैं,
भक्तों की भीड़ और धंधा, दोनों आधा हो गया है,
अयोध्या से पूरी ग्राउंड रिपोर्ट
News On पर,
चढ़ावा चोरी की घटना के बाद अयोध्या में भक्तगणों के साथ ही स्थानीय निवासी भी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं,
छोटे से मयंक निषाद लता मंगेशकर चौक पर गोलगप्पे का ठेला लगाते हैं,
मयंक कह रहे हैं कि,
चढ़ावा चोरी की खबरें जब ��े आने लगी हैं,
भक्तों की भीड़ और धंधा, दोनों आधा हो गया है,
अयोध्या से पूरी ग्राउंड रिपोर्ट
News On पर,
@ytanu7028 भारत में लॉन्च की जाने वाली गाड़ियों के लिए Crash Test के साथ-साथ Large Animal Mitigation Test भी कंपल्सरी होना चाहिए!
ताकि गाड़ी खरीदने वाले उसकी रेटिंग देखकर गाड़ी चुनें।
दरभंगा में यामाहा एजेंसी के मैनेजर मोहम्मद फैज को इंसाफ दिलाने में मदद कीजिए, आपकी एक एक ट्वीट बहुत मान्य रखता है, जब तक आवाज नहीं उठाएंगे ये अंधा कानून चुड़िया पहने बैठा रहेगा!
#justiceforfaiz
@Baliyan_x *एमपी का ‘मिलावट किंग’ मोदी, लिट्टी-चोखा ने पहुंचा��ा जेल:* पाम ऑयल से बनाया 19 करोड़ का पनीर-मक्खन, विदेश में बेचा; अब ईडी के शिकंजे में
https://t.co/4X4BuPZrl8
जो लोग भारत मे बकर�� को बचाने के लिए मुसलमानो के मोहल्लो मे सूअर लेकर पहुंच रहे थे...
वो लोग आज तीन #भारतीय_हिन्दू_नविको की अमरीका द्वारा की गयी हत्या पर अमरीकन दुतावास नहीं पहुंच रहे है और ना ही ��मरीका के खिलाफ कोई बयानबाज़ी कर रहे है...
ऐसा क्यों?
@umashankarsingh अपनी त��फ वाले ऊपर ऊपर से पाकिस्तान को कितनी ही गाली बकें, लेकिन दिल ही दिल में यही चाह रहे हैं चाहे पाकिस्तान ही सही किसी ज़रिए से भी जंग रुके और महंगाई, अनिश्चितता और मुसीबत के बादल छंटें।
प्रिय विपक्ष, अगर तुम निकम्मे ना होते तो अब तक ऐसे घोटालों पर इस्तीफा हो जाता.
2015 में मोदीजी प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना लॉन्च करते हैँ.
इस ट्रेनिंग प्रोग्राम मे हर सीखने वाले को 500 रूपये उसके बैंक अकॉउंट मे दिए जाने थे.
CAG की रिपोर्ट अनुसार 90 लाख लाभार्थी के बैंक अकॉउंट ही फ़र्ज़ी थे.
95 लाख लोगों को स्किल मैनेजमेंट की ट्रेनिंग दी गयी. 10 हज़ार करोड़ के ��जट खर्च हुआ
52 हज़ार लोग ऐसे थे जिनके रिकॉर्ड मे एक ही बैंक अकॉउंट लगाया गया था.
1 लाख से अधिक लोग के ईमेल और मोबाइल नंबर भी SAME थे..
2015 से 2022 तक के बीच 95 लाख लोगों को ट्रेनिंग मिली. पर असल मे 2 लाख से अधिक लोगों तक ही इसका लाभ पहुंच पाया.
ट्रेनिंग किसी और जगह दी गयी, फोटो कहीं और जगह का लगाया गया.
बिना सिस्टम के, बिना सरकार के सपोर्ट द्वारा इतनी बडी धांधली मुमकिन नहीं है.
अफ़सोस इस बारें मे किसी मीडिया ने कोई रिपोर्ट नहीं छापी.
किसी विपक्ष वाले ने आंदोलन नहीं किया
Cockroach janta party की तरह एक दिन के लिए झूठ मूठ का नाम चमकाने के लिए उतर आते कम से कम.
अंग्रेजो के बाद देश को लूटने वाला यदि कोई है तो वो बीजेपी ही है, मुग़ल तो यूँ ही बदनाम हुए
25 साल के शहजाद अली को बिहार के सीवान में पीट पीट कर हत्या कर दी!
हत्यारे हिंदू हैं कुर्सियों पर सजे बैठे हैं!
ये लाश हिंदू की होती तो अब तक बुलडोजर गड़गड़ा रहा होता!
पुलिस एनकाउंटर कर चुकी होती!
एक जाहिलों की भीड़ कैमरे पर मदरसे मस्��िद तोड़ने नमाज बंद करवाने की हूल दे रही होती!
ऐसा ही मर्डर दिल्ली में अरबाज का हुआ हफ्ता भर हो गया कोई पूछने वाला नहीं!
मारने वाले हिंदू थे,, कोई कार्यवाही हुई या नहीं कुछ नहीं पता!
ओर ऐसा नहीं कि हिंदुओं को कोई खास ट्रीटमेंट मिल रहा है
"नहीं"
ये खास ट्रीटमेंट भी हिंदू की लाश को मिल रहा है वो तब जब उसे किसी मुस्��िम ने मारा हो!
जीते जी "हिंदू की रोजी रोटी पढ़ाई दवाई घंटा कोई नहीं पूछ रहा है!
लोगो को क्या मजा आ रहा है इस माहौल में?
क्या इन्हें कुछ दिखाई नहीं दे रहा है?😔
Deepak Sharma
10 साल में एक लाख हेक्टेयर जंगल साफ: 1000 के स्टांप पर बिक रही आदिवासियों की जमीन, विरोध करने पर मर्डर; देखें पूरी रिपोर्ट...
पूरा वीडियो देखने के लिए लिंक पर क्लिक करें- https://t.co/QngJlh9fwb
#MPNews#HindiNews#MPPolice
10 साल में एक लाख हेक्टेयर जंगल साफ: 1000 के स्टांप पर बिक रही आदिवासियों की जमीन, विरोध करने पर मर्डर; देखें पूरी रिपोर्ट...
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#MPNews#HindiNews#MPPolice
समस्या यह नहीं है कि अंजना ओम कश्यप ने यूट्यूबर शिक्षकों पर टिप्पणी कर दी, समस्या यह है कि टिप्पणी करने वाली अंजना ओम कश्यप हैं, और यह फर्क समझना बहुत जरूरी है क्योंकि इस देश में बात सिर्फ बात नहीं होती, बोलने वाले की पूरी हिस्ट्री भी उसके साथ खड़ी होती है
कई लोग फौरन लिबिर लिबिर मोड में आ गए हैं कि अंजना जी को बेइज्जत नहीं करना चाहिए, उनका अपमान गलत है, भाषा की मर्���ादा रहनी चाहिए,और वही पुराना बैलेंसवादी प्रवचन शुरू हो गया, जैसे देश की सारी नैतिकता इन्हीं लोगों के पास है
भाई बात यह है कि प्रवचन दे कौन रहा है, यह बहुत मैटर करता है, गीता श्रीकृष्ण ने सुनाई थी इसलिए उसका वजन है, वही गीता अगर कौरव सुनाने लगते तो लोग पहले उनका पिछला रिकॉर्ड खोलते, पूछते कि महाराज पहले द्रौपदी वाले मामले पर अपना ��क्ष रखिए फिर आत्मा परमात्मा पर आइएगा
यहां भी मामला वही है, यूट्यूब पर सचमुच बहुत अधपके शिक्षक उग आए हैं, बहुतों को विषय से ज्यादा थंबनेल आता है, बहुतों को पढ़ाने से ज्यादा नाटकीय विराम लेना आता है, बहुतों की पूरी विद्वत्ता कैमरे के सामने हाथ पटकने और बच्चे बच्चो चिल्लाने तक सीमित है, इस पर बात होनी चाहिए, खूब होनी चाहिए, शिक्षा के नाम पर चल रहे तमाशे पर सवाल उठना चाहिए, पर जब यह बात अंजना ओम कश्��प जैसी पत्रकार कहती हैं तो गले में फंस जाती है, क्योंकि फिर सवाल शिक्षा से हटकर यह हो जाता है कि यह प्रमाणपत्र बांट कौन रहा है
जिस पत्रकारिता ने सालों तक देश की समझ को चाट मसाला बनाकर प्राइम टाइम की प्लेट में परोसा हो, जिसने गंभीर मुद्दों को अखाड़ा बनाया हो, जिसने सवाल पूछने की जगह शोर को पत्रकारिता समझा हो, जिसने सत्ता से सवाल कम और जनता पर चढ़ाई ज्यादा की हो, वह अचानक गुणवत्ता, जिम्मेदारी और पेशेवर ईमानदारी की क्लास ले, तो आदमी हँसे या माथा पीटे
और मजेदार बात यह है कि इस पूरे दृश्य में सबसे ज्यादा बेचैन वे शुचितावादी लिबरल हो गए हैं जिन्हें हर बात में भाषा की चिंता लग जाती है, उन्हें कंटेंट से ज्यादा टोन की फिक्र रहती है, देश में लोग बरसों तक जहर फैलाते रहें तो ये लोग विश्लेषण करेंगे, पर कोई पलटकर दो कड़वी बात कह दे तो इनके भीतर का संस्कार विभाग जाग जाता है, फिर ये रूमाल निकालक�� कहते हैं कि यह ठीक नहीं हुआ, यह सभ्य समाज को शोभा नहीं देता
कौन सा सभ्य समाज भाई, वही समाज जिसे टीवी स्टूडियो ने रोज थोड़ा थोड़ा असभ्य बनाया, वही समाज जिसे सवाल से ज्यादा तमाशा सिखाया गया, वही समाज जिसे हर मुद्दे पर चीखना, बांटना, भड़कना और किसी को कटघरे में खड़ा कर देना सिखाया गया, पहले उस खेती का हिसाब करो, फिर फसल के कांटे गिनना
यह जो हर बार बैलेंस बनाने वाले ��ोग बीच में घुस आते हैं न, ये असल में बहुत खतरनाक प्राणी हैं, इन्हें अन्याय से उतनी दिक्कत नहीं होती जितनी अन्याय के खिलाफ आई खराब भाषा से होती है, इन्हें सालों की बदतमीजी से दिक्कत नहीं होती, पर बदतमीज को बदतमीज कह देने से इनकी आत्मा कांपने लगती है,
रवीश ने गोदी मीडिया शब्द कह दिया तो पत्रकारों का जीना मुश्किल हो गया, यह भी नया रोना है, जैसे पत्रकारों का भरोसा किसी शब्द ने नहीं, उनकी अपनी हरकतों ��े डुबोया ही नहीं, जैसे जनता ने टीवी खोलकर रोज कोई स्वतंत्र, निर्भीक, निष्पक्ष तपस्वी देखा और अचानक एक शब्द सुनकर सबको गोदी घोषित कर दिया, अरे भाई अपने गिरेबान में झांको पहले, शब्द बाद में आते हैं, अनुभव पहले आता है, जनता ने जो देखा, वही नाम दिया गया, शब्द ने पत्रकारिता को नहीं गिराया, गिरी हुई पत्रकारिता ने शब्द को जन्म दिया
और यह बात समझनी पड़ेगी कि सम्मान कोई सरकारी योजना नहीं है जो सबको बराबर बांट दिया जाए, सम्मान कमाया जाता है, ��पने काम से, अपने रवैये से, अपनी ईमानदारी से, अपनी रीढ़ से, अपनी भाषा से, अपने सवालों से, अपने जोखिम से, और आपने तो बरसों से अपनी विश्वसनीयता को खुद नीलाम किया है
जिन लोगों ने सार्वजनिक जीवन में बैठकर जनता की समझ, गुस्से, डर और नफरत को रोज पैकेज किया है, उन्हें जवाब भी सार्वजनिक ही मिलेगा, कभी सभ्य मिलेगा, कभी कड़वा मिलेगा,
इसलिए ये जो लिबिर लिबिर करने वाले नैतिक चौकीदार हैं, इनसे बस इतना कहना है कि ���ुचिता अच्छी चीज है, पर सेलेक्टिव शुचिता नहीं, भाषा की मर्यादा अच्छी चीज है, पर मर्यादा का ठेका सिर्फ पीड़ित, नाराज और पलटकर जवाब देने वालों पर मत डालिए, पहले उन लोगों से पूछिए जिन्होंने बरसों तक पेशे, समाज और सार्वजनिक संवाद की मर्यादा को न्यूज़ रूम के फर्श पर घसीटा है
पत्रकारिता पर बात करने से पहले पत्रकारिता की पिछली फाइल खुलेगी, इसमें किसी को दिक्कत है तो दिक्कत रखिए, दुनिया आपकी सुविधा से याददाश्त बंद नहीं करती!
असीम तिवारी
Via forward
कानपुर के अनुभव शुक्ला के परिवार को सुनिए, जो पुलिस से गुहार लगाता रह गया।
मगर उसकी किसी ने न सुनी और 24 घंटे बाद बच्चे की लाश मिली।
इस दर्द को सुनिए और अपनी आत्मा के सारे रक्त, मज्जा और ��तक इकट्ठा करके इस संवेदनहीन व्यवस्था के चेहरे पर थूक दीजिए।
ये आक्रोश इस मरी हुई व्यवस्था के बीच भी आपको ज��ंदा रखेगा!
"16 साल का बच्चा है
10 बजे से गायब था।
पुलिस घुमाती रही।
कैमरे तक चेक नहीं किए।
अप्लीकेशन भी नहीं लिए।
हम लोग पूरी रात ढूंढते रहे।
इतनी बेरहमी से मारा आंखों से खून आ रहा है।
गला दबाया है।
ये प्रशासन है? नाम की वर्दी है इनकी
जिसे पकड़ा था, उसे भी छोड़ दिया।
जेब गरम हो गई इनकी।"
@PMOIndia @CMOfficeUP @HMOIndia @RSSorg
सोचिए जिस एजेंसी से भ्रष्ट अफसर डरते हैं, उसी एजेंसी के अंदर घुसकर स्टिंग करना कितना बड़ा रिस्क होगा!
दैनिक भास्कर के रिपोर्टर सुधीर बिश्नोई ने डेढ़ महीने तक लगातार अंडरकवर रहकर लोकायुक्त के कथित भ्रष्ट नेटवर्क को एक्सपोज किया। डीएसपी से लेकर कर्मचारियों तक की डील कैमरे में रिकॉर्ड करना कोई सामान्य काम नहीं है।
पूरी रिपोर्ट भास्कर पर देखें व पढ़े: https://t.co/fQYsGTwgVh