बाद मरने के जो पूछेगा खुदा हम से
कह देंगे हर शख्स जालिम था कसम से
कहने को सब कहते थे हक सच की बातें
अंदर से बड़ा झूठा था हर शक्श कसम से
हर मोड़ पर दुकान सजी थी मकरो फरेब की
दौलत को औरत को नोचता रहा हर शख्स कसम से
इतनी संगीन सज़ा सह न सकूंगा शाय��,
तेरे अपनो में रहूॅं और तेरा अपना न रहूॅं ।
मेरे अन्दर की कई चीज़ें तेरे हाथ की हैं,
तुझ से दो दिन भी बिछड़ जाऊं तो ज़िंदा न रहूॅं ।
सर से पा तक वो गुलाबों का शजर लगता है
बा-वज़ू हो के भी छूते हुए डर लगता है
ज़िंदगी तू ने मुझे क़ब्र से कम दी है ज़मीं
पाँव फैलाऊँ तो दीवार में सर लगता है
इतना भी करम उनका कोई कम तो नहीं है
ग़म देके वो पूछें हैं कोई ग़म तो नहीं है
चल मान लिया तेरा कोई दोष नहीं था
हालांकि दलीलों में तेरी दम तो नहीं है
हालात मेरे ��न दिनों पेचीदा बहुत हैं
ज़ुल्फ़ों में कहीं तेरी कोई ख़म तो नही है