रुको। एक फैक्ट बताता हूं...
X के नए monetization नियम से घबराने की जरूरत बिल्कुल भी नहीं है!
आजकल हर छोटा क्रिएटर परेशान है। बोल रहा है "टास्क बहुत बड़ा है, कैसे होगा?"
पिछले 6 महीने से फेमस लोगो की एक भी पोस्ट मिलियन में नहीं गई।
सोचा क्यों?
क्योंकि अब छोटे क्रिएटर उनसे भी ज्यादा दमदार कंटेंट बना रहे हैं। और उनकी कई पोस्ट मिलियन क्रॉस कर जाती हैं।
सीधी बात - X पर अब नाम नहीं, कंटेंट चलता है।
इसलिए घबराना बंद करो। रोज सीखो। रोज सुधारो। अपनी ऑडियंस खुद बनाओ।
अगर सोच रहे हो कि 1-2 पोस्ट वायरल करके रातों-र��त फेमस हो जाओगे... तो भाई ये प्लेटफॉर्म तुम्हारे लिए नहीं है।
X पर वही टिकता और कमाता है जो लगातार मेहनत करता है। शॉर्टकट वालों के लिए यहां कोई जगह नहीं।
धीरे चलो, पर रुकना मत।
Consistency + Quality = Monetization पक्का है 🇮🇳
@grok क्यो सही कहा है ना।
#XMonetization #ContentCreator #SmallCreators
'जहां पैदा हुआ, लोकसभा चुनाव लड़ा, वहीं वोटर लिस्ट से कटा नाम' Actor Prakash Raj का नाम Karnataka की वोटर लिस्ट से SIR के बाद कटा!
क्या बोले? सुनिए पूरी बात -
कुछ लोग दुखी हैं कि ओबीसी क्रांति क्यों नहीं करते? 50 परसेंट से ज्यादा आबादी है, पर क्रांति नहीं करते! लेफ्ट का भी इन पर सबसे कम असर रहता है. नक्सलवाद में भी ये नहीं गए.
आखिर क्यों?
भाई, ओबीसी का इतिहास रुलिंग क्लास का है. मुसलमान आक्रमण से पहले तक, हर सौ में से 80 से 90 तक राजा उन जातियों के थे, जिनको आज ओबीसी कहा जाता है.
नंद, पाल, मौर्य, कुशवाहा/कोइ��ी, अहीर/यादव, निषाद, गुर्जर, महिष्य, हैहय, कुनबी, जाट, लोधी, तेली, सैनी, मराठा, ग्वाला, वोक्कालिगा, कुरमी, कापू, माली, कलवार, तैलिक, कुम्हार, धानुक...
इनमें सबके कुल में राजा थे.
मंदिर इनके, जलवा इनका. किसकी औकात थी या है कि इनका मंदिर प्रवेश रोक दे? मंदिर आंदोलन का नेतृत्व किया है ओबीसी ने.
कौन सी ओबीसी जाति ऐसी है, जो खुद को क्षत्रिय या ब्राह्मण नहीं मानती? कुर्मवंशी और यदुवंशी क्षत्रिय हैं तो कुम्हार प्रजापति ब्राह्मण हैं. सबका ऐसा ही है.
कुर्मी या अहीर को शूद्र या नीचा कह कर तो देखिए. डंडा लेकर द��ड़ा लेगा दूर तक.
किस सत्ता के खिलाफ क्रांति करें ये? अपने खिलाफ?
ओबीसी राजा थे. इनका पतन हुआ इस्लाम के हमले के बाद. वो तो मुसलमानों के शासन में पिछड़ गए थे, इसलिए भरपाई हो रही है आरक्षण से.
ये तो ग़ज़ब की टाइमिंग है।
महज़ 24 घंटे पहले ही यूपी ���ी गवर्नर आ��ंदी बेन पटेल ने सीएम सिटी गोरखपुर के भीतर की दुर्दशा की कलई खोल दी,
और उसके 24 घंटे के भीतर ही योगी आदित्यनाथ ये कहते हुए पाए जा रहे हैं कि कुर्सी कल जानी हो तो आज ही चली जाए!!
वो भी नोएडा के इस अंधविश्वास का उदाहरण अंबेडकर नगर की सभा में दे रहे हैं!!
ये यूपी में चल क्या रहा है?
वक्त की आंख में पल क्या रहा है?
ये आपके तर्क से सही हो सकता है,
लेकिन जो आविष्कार करते है उनके तर्क से सही नहीं है
ज़्यादा नहीं लिखुंगा, पर ज़्यादा लिखने वाले को भी मात दे दूंगा
ज़्यादा नहीं पढ़ूँगा, पर ज़्यादा पढ़ने वाले को भी मात दे दूंगा
वहा चमत्कार ही तो होते है, आविष्कार होंगे केसे
ये आपके तर्क से सही हो सकता है,
लेकिन जो आविष्कार करते है उनके तर्क से सही नहीं है
ज़्यादा नहीं लिखुंगा, पर ज़्यादा लिखने वाले को भी मात दे दूंगा
ज़्यादा नहीं पढ़ूँगा, पर ज़्यादा पढ़ने वाले को भी मात दे दूंगा
वहा चमत्कार ही तो होते है, आविष्कार होंगे केसे