पेट खाली है, बच्ची रो रही है, घर में रोटी नहीं फिर भी सरकारी नजर में “अरबपति”, क्योंकि जाति ब्राह्मण है।
दूसरी तरफ़ करोड़ों की संपत्ति वाले भी “गरीब” कहलाने लगते हैं, अगर उसकी जाति वोट बैंक में फिट बैठती हो।
जब गरीबी पेट से नहीं, जाति से तय होने लगे तो समझिए इंसाफ़ मर चुका है।
भारतीय संबिधान में लिखा इक्वलिटी, जस्टिस केवल और केवल एक पाखंड है ल
पेट खाली है, बच्ची रो रही है, घर में रोटी नहीं फिर भी सरकारी नजर में “अरबपति”, क्योंकि जाति ब्राह्मण है।
दूसरी तरफ़ करोड़ों की संपत्ति वाले भी “गरीब” कहलाने लगते हैं, अगर उसकी जाति वोट बैंक में फिट बैठती हो।
जब गरीबी पेट से नहीं, जाति से तय होने लगे तो समझिए इंसाफ़ मर चुका है।
भारतीय संबिधान में लिखा इक्वलिटी, जस्टिस केवल और केवल एक पाखंड है ल
करणी सेना अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना के शाहस की जितनी भी तारीफ की जाए कम है💪🙏
UGC रोल बैक, आरक्षण में सुधार आंदोलन को उन्होंने जन जन तक पहुचाने के लिए पैदल यात्रा कर रहे है🙏,हम अपने घरों में AC पंखा कूलर की हवा खा रहे है, मस्त खाना खा के सो रहे है ,वही मकराना जी हम सवर्णो के बच्चों के हक की लड़ाई लड़ रहे है सड़को की खाक छान रहे है पैदल,गर्मी बारिश,धूप में😭😭,तो क्या हनारा नही फर्ज है कि हम उनके हर पोस्ट को वायरल करे,रिपोस्ट कमेंट लाइक के जरिये✍️,UGC आरक्षण खत्म करके ही रुकना है मित्रो क्यों कि अब नही तो कभी नही💪💪✍️🙏
#UGC_काला_कानून_वापस_लो
-40 वाले डॉक्टर अभी नियुक्त भी नहीं हुए, लेकिन उससे पहले 0 नंबर वाले अपना जलवा बिखेर रहे हैं।
Community Health Officer (CHO) कलेक्टर के सामने BP भी चेक नहीं कर पाई, तोइन्होंने MBBS में क्या गुल खिलाए होंगे, यह आप आसानी से समझ सकते हैं।
इनसे इलाज के लिए अधिकांश बहुजन ही आते होंगे। ये आरक्षणवादी सामाजिक न्याय के नाम पर अपने ही लोगों को मार रहे हैं।
ये बात आरक्षण वाले नहीं समझेंगे।
पंडित यूँ ही नहीं बनते छोटी-सी उम्र में माँ-बाप से दूर गुरुकुल जाना पड़ता है।
रोते हुए बच्चों को गुरुकुल में छोड़ना आसान नहीं होता। माँ-बाप का त्याग, बच्चे का संघर्ष ,वर्षों का त्याग, अनुशासन और वेदों का अध्ययन तब जाकर कोई पंडित कहलाता है।
ये हैं शोषक दशोदरी पांडे, जो अपने आलीशान महल के बाहर खड़ी होकर रो रही है क्योंकि उसमें पानी भर गया है और दीवारें ढह गई हैं!
ऐसे लोगों को अत्याचारी बताकर iphone चलाने वाले और mercedes में बैठने वाले "शोषित वंचित" लोग आरक्षण लेते हैं!
बाप कलेक्टर, आठ ट्रैक्टर, सौ बीघा जमीन और सालाना आय 10 करोड़… फिर भी OBC आरक्षण और क्रीमी लेयर से बाहर!
क्योंकि जाति सही हो तो बाकी सब ‘गरीबी’ में गिना ही नहीं जाता।
ये तो GC को सोचना है किसका साथ देना है और किसका नहीं...
क्या है कि भविष्य में अपने बच्चों के सवालों के भी तो जवाब देने होंगे जनरल वालो को.. कि जब वक्त था तो आपने क्या किया..?