People believe in caste by birth,means one person is not equal to another.some are inferior and some are superior.
Inferior one is superior to another and superior one is inferior to someone else. It means everyone is either inferior or superior to someone.
Chaudhary Charan Singh
ठाकुर का कुआं तो ठीक, लेकिन क्या किसी को डांगावास या कुम्हेर की याद याद है? क्या किसी को वह घटना याद है, जिसमें एक शिक्षक ने अपने घड़े से पानी पी लेने वाले विद्यार्थी को इतना पीटा था कि वह कुछ दिन बाद चिरनिद्रा में सो गया और सबने मिल मिलाकर उस केस को झूठा साबित कर दिया?
क्या किसी को यह याद है कि डांगावास में किनके हाथ तोड़े गए, कितने डंडे चढ़ाए गए और किन लोगों को ट्रेक्टर के पहियों से कुचला गया?
कुम्हेर में क्या हुआ था? और उसकी क्या परिणति है?
चूल्हा मिट्टी का है और मिट्टी तालाब की है। लेकिन क्या कुआं सिर्फ़ तालाब ठाकुर का ही है?
वह कौनसा चूल्हा है, जो सियासतदानों को दोनों, तीनों या चारों दलों को रोटियां सेक-सेक कर भेजता है और जिन पर ट्रेक्टर चढ़ाए गए, जिनकी हत्या की गई, उन्हें कोई दल टिकट भी नहीं देता।
ये मानसिकता क्या सिर्फ़ ठाकुर की है?
वह कौनसी जाति है, जो सिर्फ़ राजपूतों, वैश्यों और कथित पिछड़े परिवारों तक के घरों में खाना तक नहीं खाती।
क्या वे सिर्फ़ ठाकुर ही हैं, जिनके घरों में दलितों का प्रवेश नहीं है?
भूख क्या सिर्फ़ रोटी की है? रोटी क्या सिर्फ़ बाजरे की है? क्या बाजरा सिर्फ़ एक खेत का है? क्या खेत सिर्फ़ ठाकुर ही का है? और वह कौन है, जो खेत में काम भी करवाता है और पूरा पैसा भी नहीं देता? क्या ऐसा सिर्फ़ ठाकुर करते हैं?
क्या बैल सिर्फ़ ठाकुर का है? और क्या बैल ही सिर्फ़ बैल है? क्या बैल की तरह आदमी नहीं जुतता? वह आदमी कौन है? वह ठाकुर तो नहीं है। वह जाट तो नहीं है। वह ब्राह्मण या वैश्य तो नहीं है। तो वह कौन है?
वह कौन है, जो उच्च पदों पर पहुंचकर भी अपने लोगों की नृशंस हत्याओं तक के समय बोल नहीं पाता और बैल ही बना जुता रहता है?
क्या हल सिर्फ़ ठाकुर का है?
हल की मूठ पर हथेली क्या ठाकुर की है?
क्या फ़सल सिर्फ़ ठाकुर की है?
कुआं, पानी, मुहल्ले, खेत-खलिहान,
गांव-शहर क्या सिर्फ़ और सिर्फ़ ठाकुरों के हैं?
ठाकुर कुछ नहीं। एक मानसिकता है। वह जो कभी डांगावास में दिखती है और कभी भरतपुर के कुम्हेर में। किसी शिक्षक के यहाँ, जो अपने घड़े से पानी पीते बच्चे को इतना पीटता है कि उसकी मौत हो जाती है।
कितने आईएएस, आईपीएस, मंत्री, विधायक, सांसद आदि दलित वर्ग से आ चुके, लेकिन क्या किसी ने कुम्हेर कांड की रिपोर्ट को सार्वजनिक करवाने का साहस जुटाया?
ठाकुर एक मानसिकता है, जो डांगावास में सिर्फ़ दलितों को नहीं कुचलती या कुम्हेर में उन्हें जीवित ही नहीं जलाती। वह दलितों की हत्या भी करती है और उनके साथ न्याय भी नहीं होने देती। इसीलिए एक अहिंसा के धर्म संबंधी जाति से आने वाले गृहमंत्री ने कहा था, हत्या के आरोपी गिरफ़्तार नहीं हुए तो क्या आफ़त आ गई!
जरा विवेक से सोचिए, एक जाति दलितों की हत्या करती है या हत्यारे एक जाति विशेष से हैं। जांच अधिकारी उसी जाति का है, जो हत्यारों की है, हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग पर उपदेश देने वाले गृह मंत्री जी किसी और जाति के हैं, मुख्यमंत्री जी की वह जाति है, जो हत्यारों वाली जाति के प्रतिकूल रहती है, लेकिन सब जातियों को अपना बनाने की कोशिश करती हैं। एक अन्य दल के प्रमुख नेता हत्यारों की जाति के प्रहार झेलते रहते हैं। लेकिन इनमें से सभी इस पर सहमत हो जाते हैं कि अगर हत्याकांड में मारे गए लोगों की जाति के किसी भी नेता या कार्यकर्ता को टिकट दिया गया तो प्रदेश की बाकी सीटों पर हार जाएंगे।
यही होता है या कुछ और होता है?
यानी एक जाति के छह लोगों की हत्या होती है। वे दलित हैं। उनकी भी एक जाति है। लेकिन हत्यारों की जाति के नेता बाकी सब जातियों के नेताओं को एक कर लेते हैं और उस जाति को टिकट भी नहीं लेने देते, जिस जाति के नेता उस इलाके से हमेशा चुनाव लड़ते आए थे?
इसे आप क्या कहेंगे? ठाकुरों को कोसने वाले, कोसे जाने वाले ठाकुर और इस सब पर सब कुछ कहने वाले हम सब अंतत: शर्मनाक़ रूप से यह साबित करते हैं कि हमारे प्रदेश के गांव, शहर, अदालतें, सरकार, मतदाता सबके सब एक हैं और वे उस वंचित या दलित को न्याय नहीं ही देते, जिसे ट्रेक्टरों से कुचला गया।
यह आनंद चौधरी या गोवर्धन चौधरी जैसे रिपोर्टर हैं, जो अपनी जातियों की परवाह किए बिना ऐसे मुद्दों पर साहसिक रिपोर्टिंग करते रहे हैं। उन्हीं दिनों की याद है, जो ये सब मौके के दस्तावेज शेयर करके बताया करते थे।
लेकिन आज राजनेताओं में ऐसा साहस नहीं है या ऐसे साहसी राजनेता न के बराबर हैं, जो अपनी जु़ल्म करने वाले संयोग से उनकी जाति के हों तो वे जाति प्रेम से ऊपर उठकर बोलें।
पुराने समय में ऐसे नेता थे, जो बलात्कार के आरोपी हों या सती समर्थक, उनका उन्होंने किसी कीमत पर समर्थन नहीं किया। ऐसे विरेले नेता सभी जातियों में कमोबेश रहे थे।
लेकिन आज हम देखते हैं कि एक जाति विशेष के नेता अपने सामने वाली जाति के नेताओं को टार्गेट करते हैं और अपने अच्छे नेता बन सकने की सारी संभावनाओं पर ख़ुद कीचड़ पोत देते हैं।
राजस्थान के शौर्यशाली होने की गाथाएं गाने वाले नेता कितनी बार जरा सा साहस दिखा पाते हैं, जब वे उनकी जाति के सीनाज़ोर नेता ज़ुल्म करते हैं?
क्या किसी नेता को डांगावास हत्याकांड में मारे गए गणेश की चार महीने की वह बेटी इतने साल बाद याद है, जो उस दिन अपनी रोती मां की गोद में यह भूलकर खिलौने के लिए मचल रही थी, जिसके सामने उसके पिता का शव पड़ा था?
कुआं तो एक शब्द भर है, वह कुआं कभी गली हो जाता है, जिसमें से किसी दूल्हे को घोड़े से उतार दिया जाता है और कभी वह संसद या विधानसभा का वह नेता होता है, जो मंत्री होकर भी अपनी जाति पर हुए ज़ुल्म को लेकर जयपुर, भोपाल, दिल्ली में उन नेताओं के सामने अपनी सिट्टीपिट्टी गुम पाता है, जिनके सहारे वह वहाँ पहुंचा होता है।
कुआं दरअसल ठाकुर का नहीं, एक पूरे सीनाज़ोर समाज का है और उसका पानी हर दलित पी ले, यह संविधान में ताक़त संविधान के बनाने वालों ने सही से देने नहीं दी है।
बराबरी का जो भ्रम बना हुआ है, वह भागते सवर्ण शक्तिशाली वर्ग की फटी-पुरानी लंगोटी है, जिसे पाकर दलित वंचित और आदिवासी आह्लादित होते ही रहते हैं।
“The mischievous and indefensible allegations against his integrity have been exposed as hollow, and his record as Prime Minister is increasingly being recognised for what it was: a period of decisive economic, political, and social advancement in Indian history.
History will indeed remember Dr. Manmohan Singh kindly as a quiet, gentle but a most consequential Prime Minister.”
Congress Parliamentary Party Chairperson Smt Sonia Gandhi ji.
झारखंड में विरोध-प्रदर्शन कर रहे छात्रों के ख़िलाफ़ बल का इस्तेमाल ग़लत है।
छात्रों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है और बातचीत से ही समाधान निकल सकता है।
झारखंड सरकार को इन छात्रों की बात सुननी चाहिए और हर समस्या का तुरंत समाधान करना चाहिए।
The use of force against students protesting in Jharkhand is wrong.
Students have a right to peaceful protest, and only dialogue can yield solutions.
The Jharkhand government must continue to hear these students out and resolve their issues immediately.
1 लाख करोड़ रुपए से बने दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेस वे पर सिर्फ 80 KM में 40 जगह क्रैक हो गए हैं।
अगर पूरे 1386 KM लंबे एक्सप्रेस वे का रियलिटी चेक हुआ तो शायद हजारों छेद मिलेंगे।
मेरे परिवार का घर प्रयागराज में था। मुझे यहां आकर बहुत खुशी होती है। ये शहर Knowledge का सेंटर हुआ करता था।
Allahabad University was once one of the best universities in the country.
: नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi
📍 प्रयागराज, यूपी
#ChhatronKiGoonj
यूपी : लखनऊ–कानपुर एक्सप्रेसवे पर जहां-जहां पेचवर्क चल रहा है, वह भी कुछ घंटे में फट जा रहा है !!
भास्कर रिपोर्टर @askrajeshsahu ग्राउंड से फटी हुई सड़क दिखा रहे हैं
> 4700 करोड़ रुपए से एक्सप्रेस वे बना
> 47 दिन भी नहीं चला
> 40 जगह से क्रेक हो गया
यह उत्तर प्रदेश का लखनऊ–कानपुर एक्सप्रेस वे है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 13 जुलाई को उदघाटन किया था। CM योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी मौजूद थे।
राजस्थान के सभी नेता जातिवाद में आकंठ डूबे हुए हैं!
सभी की पहली प्राथमिकता जाति है, और सभी को जाति से डर लगता है!
सर, इस मुद्दे पर सबके मुंह में दही जम गया, अगर आरोपी ब्राह्मण होते तो अब तक विपक्ष के नेता छाती पीट रहे होते, राजपूत होते तो सामंतवाद की जीत बता देते... लेकिन आरोपी जाट थे, इसलिए सबके मुंह में दही जम गया!
क्या ऐसे खत्म होगा जातिवाद? अब जाति देखकर नेता 6 मौतों पर भी चुप्पी साध लेंगे? ये नेता दलितों के वोट लेते समय घड़ियाली आंसू कैसे बहा लेते हैं? आज संविधान खतरे में नहीं आया?
#Rajasthan
Some veggies dropped in water + burnt chappatis - This is the mid day meal serve to students at a government primary School in Sitapur district of Uttar Pradesh.
यूपी : मेरठ में कांवड़ियों ने दो पुलिसकर्मियों को पुलिस जीप से बाहर निकालकर पीटा, कपड़े फाड़ दिए। दरअसल, बाइक सवार व्यक्ति ने कांवड़ियों को टक्कर मार दी थी। इस सूचना पर थाने के 2 पुलिसकर्मी सादा कपड़ों में जीप लेकर पहुंच गए। आरोपी व्यक्ति तो भाग गया, लेकिन कांवड़ियों ने पुलिसकर्मियों को पकड़ लिया और उनकी खूब पिटाई की।
यूपी के सरकारी स्कूल का हाल👇
गोरखपुर के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे की एक आंख की रोशनी चली गई.
दरअसल, प्रिंसिपल ने बच्चे को मिड-डे मील का गेहूं पिसवाने भेजा.
गेहूं पिसवाने के बाद बच्चा साइकिल पर आटे की बोरी बांध रहा था, तभी रबर छिटककर उसकी आंख में जा लगा.
चोट इतनी गंभीर है कि बच्चे को एक आंख से दिखना बंद हो गया.
'चढ़ावा चोर - गद्दी छोड़'
राम मंदिर में BJP-RSS ने 'चढ़ावा चोरी' कर देश के करोड़ों रामभक्तों की श्रद्धा से खिलवाड़ किया है- ये महापाप है।
आज संसद परिसर में विपक्ष के सांसदों ने बेहद अनोखे तरीके से 'चढ़ावा चोरी' के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
📍 दिल्ली
The Lucknow-Kanpur Expressway which was inaugurated by two cabinet ministers and a chief minister on July 13. Just been a fortnight and this is the condition of the expressway built at a cost of ₹4700 crores. This expressway has sustained damage at multiple stretches since its inauguration.
The Lucknow-Kanpur Expressway which was inaugurated by two cabinet ministers and a chief minister on July 13. Just been a fortnight and this is the condition of the expressway built at a cost of ₹4700 crores. This expressway has sustained damage at multiple stretches since its inauguration.
जब एक आईआईटी प्रोफेसर, जिसका मेडिसिन से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है, लोगों को मूत पीने का ज्ञान दे सकता है;
चौथी फेल कोई व्यक्ति वर्ल्ड-नोन इकोनॉमिस्ट को ज्ञान दे सकता है;
आरएसएस के रांडे दूसरों को चार-पाँच बच्चे पैदा करने की नसीहत दे सकते हैं;
कंगना रनौत दूसरों के बॉडीकाउंट पर कमेंट कर सकती है;
और अपनी बहन को बीवी बनाने वाला दूसरों को अय्याश बोल सकता है,
तो सिर्फ इस बात से दिक्कत क्यों है?
Bro, @HardeepSPuri - you & your Boss @narendramodi will rot in hell.
Just because I don’t have financial capacity to buy a new E20 compliant car - I’m robbed by making me pay ₹169/- for 1 litre of petrol.
You guyz are worse than highway robbers.
20 जुलाई की सुबह कॉकरोच जनता पार्टी ने एक Video जारी करके सवाल उठाये कि पत्थर से भरा ट्रक जंतर मंतर के पास क्या कर रहा है? आशंका जताई कि पुलिस खुद पथराव करके छात्रों को फंसा सकती है।
ट्रक कहां से आया? न्यूज़लॉन्ड्री रिपोर्टर अवधेश कुमार (@ImAvdheshkumar) ने इसकी पड़ताल की। पता चला कि 16 जुलाई को ट्रक और मारुति ईको वैन में टक्कर हुई थी। जिसके बाद दोनों वाहन संसद मार्ग थाने के पास खड़े कर दिए गए थे।
(यह घटना पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज है)
शुरुआत में पुलिस ने न्यूज़लॉन्ड्री रिपोर्टर को बताया कि यह वैन प्रदर्शनकारियों ने तोड़ी है। जब रिपोर्टर ने प्रूफ सहित एक्सीडेंट वाली बात बताई तो पुलिस चुप हो गई।
इसके बाद पुलिस ने ट्रक की लोकेशन बदल दी। एक दिन यही ट्रक यूथ कांग्रेस दफ्तर के बाहर खड़ा मिला। सवाल यह है कि पुलिस बार बार पत्थर भरे ट्रक की लोकेशन क्यों बदल रही थी? और क्यों ट्रक के बारे में क्लियर नहीं बता रही थी? हालांकि न्यूज़लॉन्ड्री की रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद दिल्ली पुलिस ने इसका खंडन कर दिया है।