गाय को ‘‘राष्ट्रीय पशु’’ घोषित करने से सरकार आखिर क्यों बच रही है? गाय के नाम पर मॉब लिंचिंग, बेगुनाह इंसानों की हत्या और नफ़रत की राजनीति अब बंद होनी चाहिए!
जमीयत उलमा-ए-हिंद की केवल इतनी मांग है कि गाय को ‘‘राष्ट्रीय पशु’’ का दर्जा देकर इस विवाद का स्थायी समाधान निकाला जाए। इसके लिए जो भी कानून बनाया जाए, उसे देश के सभी राज्यों में बिना किसी भेदभाव के समान रूप से लागू किया जाए, ताकि न्याय, समानता और इंसानियत की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
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“हमें ना दें लेकिन हिन्दुओं को 500₹ गैस सिलिंडर 50₹ पेट्रोल और डीज़ल दे दें हम बीजेपी को वोट दे देंगे” - बंगाल के एक मुस्लिम वोटर के उद्गार सुनिए
एक ऐसा इंटरव्यू जो आप करोड़ों खर्च कर कवरेज में उतरे बड़े बड़े चैनलों पर नहीं सुना होगा। जिन्होंने भी किया है पता चलने पर उनको due credit दिया जाएगा।
महाराष्ट्र:- नाशिक के 15 वर्षीय हाफ़िज़ ए क़ुरान सैयद जैद सादिक ने JEE Main 2026 में 99.927 पर्सेंटाइल हासिल करके कमाल कर दिया है।
कुरान हिफ़्ज़ करने के साथ-साथ JEE जैसे कठिन एग्ज़ाम की तैयारी करना वाकई अनुशासन और मेहनत का बेहतरीन मिसाल है।
@Millat_Times@ShamsTabrezQ
इतिहास ने हमसे हमारे हीरो भी छीन लिए !
आज पूरी दुनिया बच्चों को पढ़ाती है कि
रोशनी के मुड़ने का क़ानून “Snell’s Law” है !
किताबों में यूरोप का नाम चमकता है…
लेकिन उन किताबों के हाशिये में भी यह नहीं लिखा मिलता कि
इस discovery की असली बुनियाद — इब्न सहल ने रखी !
क़रीब एक हज़ार साल पहले, जब दुनिया के बड़े हिस्से जहालत के अंधेरों में भटक रहे थे, तब बग़दाद में बैठा यह ज़ेहन रोशनी के राज़ खोल रहा था !
वह समझ चुका था कि नूर जब एक ज़रिये से दूसरे ज़रिये में जाता है तो किस अनुपात से मुड़ता है…और उसी उसूल से वह ऐसे lenses और mirrors design कर रहा था, जो modern optical science की बुनियाद बन गए !
जिस formula को आज दुनिया बड़े फ़ख्र से European science की discovery बताती है, उसे इब्न सहल सदियों पहले लिख चुका था !
मगर उसका नाम मिट गया !
उसकी किताबें धूल में दब गईं !
उसकी discovery किसी और के नाम से मशहूर हो गई !
क्यों ?
क्योंकि इतिहास हमेशा इंसाफ़ से नहीं लिखा जाता…
इतिहास अक्सर ताक़तवर लोग लिखते हैं !
और जब ताक़तवर लिखते हैं, तो कमजोरों के कारनामे footnote बन जाते हैं…
या फिर पूरी तरह ग़ायब !
इब्न सहल सिर्फ एक scientist नहीं था वह इस बात का सबूत है कि मुसलमान कभी दुनिया के पीछे चलने वाले नहीं थे, बल्कि दुनिया को रास्ता दिखाने वाले थे !
हमने optics लिखी !
हमने algebra लिखी !
हमने astronomy लिखी !
हमने medicine लिखी !
लेकिन फिर एक दौर ऐसा आया कि
दूसरों ने हमारी discoveries ले लीं…
और हमने अपने अज़ीम लोगों के नाम तक भूल दिए !
आज हमारी नस्लें Snell को जानती हैं…
मगर Ibn Sahl को नहीं !
Newton को जानती हैं…
मगर Ibn al-Haytham को नहीं !
Copernicus को जानती हैं…
मगर Al-Biruni को नहीं !
यह सिर्फ नाम भूलना नहीं है यह अपनी तहज़ीबी याददाश्त खो देना है !
जिस क़ौम को अपने मुहसिन याद न रहें, वह दूसरों की तारीफ़ में ज़िंदगी गुज़ार देती है !
“तुम्हारा अतीत अंधेरा नहीं था…तुम्हें बस अंधेरे में रखा गया!”
शाइस्ता बानो (48) और मोहम्मद मुनैद उल्लाह एक जोड़े ने बताया कि उनके परिवार ने 2016 में बैंक से 50 लाख का कर्ज लिया था 50 लाख के लोन के बदले 90 लाख का लोन चुकाया था. परिवार अदरक उगाने के लिए लोन लिया था। बैंक ने तीन करोड़ का मोहम्मद/शाइस्ता का बिल्डिंग 1.41 करोड़ में नीलाम कर दिया