जब कुरुक्षेत्र के मैदान में पवित्र गीता जी का ज्ञान सुनाते समय अध्याय 11 श्लोक 32 में पवित्र गीता बोलने वाला प्रभु कह रहा है कि 'अर्जुन मैं बढ़ा हुआ काल हूँ। अब सर्व लोकों को खाने के लिए प्रकट हुआ हूँ।' जरा सोचें कि श्री कृष्ण जी तो पहले से ही #गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला
पवित्र गीता का ज्ञान काल (ब्रह्म-ज्योति निरंजन) द्वारा दिया गया है, न कि श्री कृष्ण द्वारा। उन्होंने कभी नहीं कहा कि "मैं ���ाल हूँ।" श्री कृष्ण काल नहीं हो सकते, क्योंकि उनके दर्शन से लोग और पशु-पक्षी भी प्रेम से तड़पते #गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला
पवित्र गीता का ज्ञान काल (ब्रह्म-ज्योति निरंजन) द्वारा दिया गया है, न कि श्री कृष्ण द्वारा। उन्होंने कभी नहीं कहा कि "मैं काल हूँ।" श्री कृष्ण काल नहीं हो सकते, क्योंकि उनके दर्शन से लोग और पशु-पक्षी भी प्रेम से तड़पते #गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला
जिस समय काल ब्रह्म ने श्री कृष्ण जी के शरीर से बाहर निकलकर अपना विराट र���प दिखाया, वह बहुत प्रकाशमान था। अर्जुन भयभीत हो गया तथा श्री कृष्ण उस विराट रूप के प्रकाश में ओझल हो गया था। इसलिए पूछ रहा था कि आप कौन हो?
#गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला
जिस समय काल ब्रह्म ने श्री कृष्ण जी के शरीर से बाहर निकलकर अपना विराट रूप दिखाया, वह बहुत प्रकाशमान था। अर्जुन भयभीत हो गया तथा श्री कृष्ण उस विराट रूप के प्रकाश में ओझल हो गया था। इसलिए पूछ रहा था कि आप कौन हो?
#गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला
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गीता ज्ञान श्री कृष्ण ने नहीं कहा’
अध्याय 11 श्लोक 21 व 46 में अर्जुन कह रहा है कि भगवन्! आप तो ऋषियों, देवताओं तथा सिद्धों को भी खा रहे हो, जो आप का ही गुणगान पवित्र वेदों के मंत्रों द्वारा उच्चारण कर रहे हैं !#गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला
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गीता ज्ञान श्री कृष्ण ने नहीं कहा’
अध्याय 11 श्लोक 21 व 46 में अर्जुन कह रहा है कि भगवन्! आप तो ऋषियों, देवताओं तथा सिद्धों को भी खा रहे हो, जो आप का ही गुणगान पवित्र वेदों के मंत्रों द्वारा उच्चारण कर रहे हैं !#गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला
जिस समय काल ब्रह्म ने श्री कृष्ण जी के शरीर से बाहर निकलकर अपना विराट रूप दिखाया, वह बहुत प्रकाशमान था। अर्जुन भयभीत हो गया तथा श्री कृष्ण उस विराट रूप के प्रकाश में ओझल हो गया था। इसलिए पूछ रहा था कि आप कौन हो?
#गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला
जिस समय काल ब्रह्म ने श्री कृष्ण जी के शरीर से बाहर निकलकर अपना विराट रूप दिखाया, वह बहुत प्रकाशमान था। अर्जुन भयभीत हो गया तथा श्री कृष्ण उस विराट रूप के प्रकाश में ओझल हो गया था। इसलिए पूछ रहा था कि आप कौन हो?
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श्रीमद्भगवद गीता, अध्याय 11, श्लोक 32
भगवान कहते हैं, "मैं लोकों का नाश करने वाला काल हूँ, जो इन योद्धाओं का नाश करने के लिए प्रकट हु�� हूँ। तेरे युद्ध न करने पर भी इनका नाश निश्चित है।" 🌱
Tattvadarshi Sant Rampal Ji
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श्रीमद्भगवद गीता, अध्याय 11, श्लोक 32
भगवान कहते हैं, "मैं लोकों का नाश करने वाला काल हूँ, जो इन योद्धाओं का नाश करने के लिए प्रकट हुआ हूँ। तेरे युद्ध न करने पर भी इनका नाश निश्चित है।" 🌱
Tattvadarshi Sant Rampal Ji
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पवित्र श्रीमद्भगवत गीता का ज्ञान काल भगवान ने श्री कृष्ण मैं प्रवेश होकर अर्जुन को दिया। य��� जीवन के गहनतम प्रश्नों का उत्तर देती है। जानने के लिए अवश्य पढ़ें 'ज्ञान गंगा' पुस्तक, जो इस दिव्य ज्ञान को सरलता से प्रस्तुत करती है। 🌱
#गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला
पवित्र श्रीमद्भगवत गीता का ज्ञान काल भगवान ने श्री कृष्ण मैं प्रवेश होकर अर्जुन को दिया। यह जीवन के गहनतम प्रश्नों का उत्तर देती है। जानने के लिए अवश्य पढ़ें 'ज्ञान गंगा' पुस्तक, जो इस दिव्य ज्ञान को सरलता से प्रस्तुत करती है। 🌱
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क्या काल का रूप इतना भयंकर है कि जिसे देखकर अर���जुन जैसा ��ोद्धा भी कांपने लगा।
क्या यही कारण है कि पवित्र गीता जी अध्याय 7 श्लोक 25 के अनुसार काल ने अव्यक्त रहने की प्रतिज्ञा की।
अवश्य पढ़ें पवित्र पुस्तक ज्ञान गंगा। और जानें गूढ़ रहस्य।
#गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला
क्या काल का रूप इतना भयंकर है कि जिसे देखकर अर्जुन जैसा योद्धा भी कांपने लगा।
क्या यही कारण है कि पवित्र गीता जी अध्याय 7 श्लोक 25 के अनुसार काल ने अव्यक्त रहने की प्रतिज्ञा की।
अवश्य पढ़ें पवित्र पुस्तक ज्ञान गंगा। और जाने�� गूढ़ रहस्य।
#गीताजी_का_ज्ञान_किसने_��ोला
जब कुरुक्षेत्र के मैदान में पवित्र गीता जी का ज्ञान सुनाते समय अध्याय 11 श्लोक 32 में पवित्र गीता बोलने वाला प्रभु कह रहा है कि 'अर्जुन मैं बढ़ा हुआ काल हूँ। अब सर्व लोकों को खाने के लिए प्रकट हुआ हूँ।' जरा सोचें कि श्री कृष्ण जी तो पहले से ही
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जब कुरुक्षेत्र के मैदान में पवित्र गीता जी का ज्ञान सुनाते समय अध्याय 11 श्लोक 32 में पवित्र गीता बोलने वाला प्रभु कह रहा है कि 'अर्जुन मैं बढ़ा हुआ काल हूँ। अब सर्व लोकों को खाने के लिए प्रकट हुआ हूँ।' जरा सोचें कि श्री कृष्ण जी तो पहले से ही
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जब कुरुक्षेत्र के मैदान में पवित्र गीता जी का ���्ञान सुनाते समय अध्याय 11 श्लोक 32 में पवित्र गीता बोलने वाला प्रभु कह रहा है कि 'अर्जुन मैं बढ़ा हुआ काल हूँ। अब सर्व लोकों को खाने के लिए प्रकट हुआ हूँ।' जरा सोचें कि श्री कृष्ण जी तो पहले से ही