एंटी इंकम्बेंसी इस लिए नहीं दिखती है क्यों की सब को दिखता है की वो देश के लिए काम कर रहा है, अपने परिवार के लिए नहीं! ज्ञानेश्वर को ज्ञान देके कुछ नहीं होगा! 😆
ये रितिका चोपड़ा हैं।इंडियन एक्सप्रेस की शानदार पत्रकार। जिन्होंने ज्ञानेश कुमार की पोल खोल दी।
रितिका चोपड़ा ने मीडिया नाम की मरती हुई संस्था को ज़िंदा कर दिया है।
इनके सम्मान में दो शब्द तो लिख दीजिए प्लीज़।
ये रितिका चोपड़ा हैं।इंडियन एक्सप्रेस की शानदार पत्रकार। जिन्होंने ज्ञानेश कुमार की पोल खोल दी।
रितिका चोपड़ा ने मीडिया नाम की मरती हुई संस्था को ज़िंदा कर दिया है।
इनके सम्मान में दो शब्द तो लिख दीजिए प्लीज़।
It will always be seemed..
Just Read 📚 books on Muslin hierarchical order.
Particularly on Boudine muslims.
Or Read Isabella Alende.
Or Read Elizabeth kostova
मुझे लगता है अमीर मुसलमान कौम के लोग मुस्लिमों में सबसे बेहतरीन होते हैं।
न मैने कभी देखा और न आपने भी क��ी देखा होगा कि एक अमीर मुस्लिम "बुर्का या नकाब" जैसी अजीब इस्लामिक विचारधारा या ऐसी किसी अन्य चीज में शामिल रहा हो।
ऐसी चीजों में आपको हमेशा देहाती और गरीब मुस्लिम ही शामिल रहते दिखाई देते हैं।
सच है, विपत्ति जब आती है,
कायर को ही दहलाती है,
सूरमा नहीं विचलित होते,
क्षण एक नहीं धीरज खोते,
विघ्नों को गले लगाते हैं,
काँटों में राह बनाते हैं।
हिंदी साहित्याकाश के देदीप्यमान नक्षत्र राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दि��कर’ जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन। 🙏
सच है, विपत्ति जब आती है,
कायर को ही दहलाती है,
सूरमा नही�� विचलित होते,
क्षण एक नहीं धीरज खोते,
विघ्नों को गले लगाते हैं,
काँटों में राह बनाते हैं।
हिंदी साहित्याकाश के देदीप्यमान नक्षत्र राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन। 🙏
Myself @RitikaChandola
I was the Professor Emirates in Wharton, Pennsylvania of Journalism..
My namesake is novice and third grader of NJSharma's opIndia..
She couldn't checked a simple fact that ERROR can be cross checked by giving a simple Phone call.
Worst exposure of #ECI
इंडियन एक्सप्रेस बिना तथ्यों के एक ख़बर लेकर आया है मार्केट में ELECTION COMMISSION को लेकर, मार्केटिंग ऐसी की Rahul Gandhi PPT लेकर आते ही होंगे, लेकिन इंडियन एक्सप्रेस के पत्रकार न्यूज़ बाहर लाने के चक्कर में इतने उतावले हो गए की एक मामूली सा fact check नहीं हुआ इनसे?
जब फ्री एडमिशन, फ्री फीस, फ्री किताबें और फ्री परीक्षा शुल्क सब कुछ मिल रहा है, फिर भी पढ़ाई की जगह नकल से 33% लाकर नौकरी तक पहुँचने का रास्ता खुला हो...
तो फिर परीक्षा में बैठने की यह औपचारिकता क्यों?
सीधे नियुक्ति-पत्र ही दे दीजिए!
कम-से-कम कागज, परीक्षा केंद्र और निरीक्षक का खर्च तो बचेगा! 😏
सवाल सुविधाएँ देने का नहीं है,
सवाल यह है कि सुविधा के नाम पर योग्यता की कसौटी ही क्यों कमजोर की जाए?
आरक्षण का उद्देश्य अवसर देना था,
क्या अब व्यवस्था का उद्देश्य मानक घटाना भी हो गया है?
What an observation,
She is a solicitor,
She must be in the House of Lords as the 25dukes of delhstead..
There You will a jewel in the crown.
You ought to be dealt with utmost caution regarding the problems cited...
In future we will accept you as a saviour of INDIA..
आज मैं आपको एक कड़वा सच कहने आई हूँ। सच जो कई लोग बोलने से कतराते हैं, क्योंकि सच कड़वा होता है। लेकिन मैंने हमेशा कहा है सच बोलने से कभी समझौता नहीं करूंगी । कोई नाराज हो जाए तो होने दीजिए, लेकिन आइना सबको दिखाना पड़ेगा।
मुझे प्रधानमंत्री मोदी जी का एक पुराना भाषण याद ह���। उन्होंने कहा था “मेरे दलित भाइयों को कोई कुछ न कहे, गो ली मारनी है तो मुझे मारे।” यह बयान अपने आप में इतना अशोभनीय है कि पूरी दुनिया को लगेगा कि भारत में दलित समुदाय हर वक्त खतरे में है। एक प्रधानमंत्री का ऐसा बयान देना शोभनीय नहीं है। इससे क्या संदेश जाता है? यही कि दलित समाज हमेशा पीड़ित है, हमेशा असुरक्षित है, और बाकी समाज उन पर ��मला करने को तैयार बैठा है।
अब इसी बयान को आईआईटी बॉम्बे के हालिया मामले पर लागू करके देखिए। छात्र साहिल वाकोडे परीक्षा में मोबाइल लेकर बैठा था, चैटजीपीटी से नकल कर रहा था। प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला ने पकड़ लिया। उसके बाद छात्र ने आत्महत्या कर ली। पिता का आरोप है कि तीन महीने से जाति के आधार पर परेशान किया जा रहा था।
मेरा सीधा सवाल है पूरे कॉलेज में क्या सिर्फ एक ही दलित छात्र था? बाकी छात्रों के साथ क्या हो रहा है, उसकी चर्चा क्यों नहीं होती? शिक्षा का स्तर गिर रहा है, संस्थानों का अनुशासन टूट रहा है, और हर घटना को तुरंत जाति का चश्मा लगाकर देखा जा रहा है।
आरक्षण की नीति ने भारत की शिक्षा व्यवस्था को चौपट कर दिया है। योग्यता पीछे छूट गई है, जाति आगे आ गई है। आज हिंदू समाज पूरी तरह जातिवाद में बँट चुका है। ��ुनाव में हर दल इन्हीं जातियों के वोट बैंक पर चुनाव लड़ता है और लड़ता रहेगा। कोई सरकार इस विभीषिका से निपटना नहीं चाहेगी, क्योंकि वोट का गणित बिगड़ जाएगा।
यह स्थिति अब नियंत्रण से बाहर होती जा रही है। भारत के सर्वनाश की पटकथा लिखी जा चुकी है। सनातन समाज अगर अब भी नहीं जागा, सही इतिहास नहीं पढ़ा, सत्य नहीं बोला, तो परिणाम भयावह होंगे।
सत्य कड़वा है, लेकिन राष्ट्र निर्माण की पहली शर्त यही है कि कड़वा सत्य स्वीकार किया जाए। आप बोलिए, आप लिखिए, आप चिल्लाइए। अगर आप खुद नहीं बोल सकते तो जो सच बोल रहे हैं, उनके साथ खड़े हो जाइए।