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करेला एक कड़वी सब्जी है...
लेकिन इसका स्वाद कड़वा होने के बावजूद यह सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है...
आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों में इसे मधुमेह (डायबिटीज), पाचन, इम्यूनिटी और वजन नियंत्रण के लिए उपयोगी माना जाता है...
करेला की सब्जी नियमित रूप से खाने से कई स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं...
कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर नियंत्रण...
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बेशक, ख्वाजा गरीब नवाज़ की बारगाह में अर्ज़ी लगाना दिल की हाजिरी है. तरीका बहुत सादा है, बस अदब और सच्ची नियत चाहिए.
1. अगर आप घर पर हैं - अर्ज़ी कैसे लगाएं
घर से भी अर्ज़ी कबूल होती है, क्योंकि सुनने वाला तो वही है.
तरीका:
वुजू करें और पाक साफ कपड़े पहनें.
किबला रूख बैठें, पहले 3 बार दरूद-ए-पाक पढ़ें.
फिर 1 बार सूरह फातिहा और 3 बार सूरह इखलास पढ़ कर हुज़ूर ﷺ को और फिर ख्वाजा गरीब नवाज़ को इसका सवाब नज़र करें.
अब अपनी अर्ज़ी को एक सादे कागज़ पर लिखें. नीचे अपना नाम और मकसद लिख दें.
उस कागज़ को मोड़ कर किसी पाक जगह रख दें और अल्लाह से दुआ करें कि या अल्लाह, अपने महबूब गरीब नवाज़ के वसीले से म��री ये दुआ कबूल फरमा.
जब कभी अजमेर शरीफ कोई जाने वाला मिले तो वो अर्ज़ी उसके हाथ दरगाह में पेश करा दें.
2. अगर आप अजमेर शरीफ दरगाह पर हैं - अदब क्या है
दरगाह इबादत की नहीं, ज़ियारत और वसीले की जगह है, दुआ सिर्फ अल्लाह से ही मांगी जाती है.
दरगाह में दाखिल होते ही अदब से सलाम पेश करें - अस्सलामो अलैक या सैय्यदी या ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती.
भीड़ में धक्का न दें, आराम से मज़ार शरीफ के करीब जाएं.
चादर, फूल, इत्र पेश करना आपकी मोहब्बत है, फर्ज़ नहीं. असल चीज़ नियत है.
मज़ार को बोसा न दें, सजदा हरगिज़ न करें. सजदा सिर्फ अल्लाह के लिए है.
मज़ार के सामने खड़े होकर अपनी अर्ज़ी दिल में पढ़ें और फिर अल्लाह से इस तरह दुआ मांगें:
दुआ: या अल्लाह, मैं गुनाहगार बंदा तेरी बारगाह में तेरे वली हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ का वसीला पेश करता हूँ. उनके सदके में मेरी ये हाजत पूरी फरमा. आमीन.
दुआ के बाद कुछ देर गुम्बद के साए में बैठें, दरूद शरीफ का विर्द करें और गरीबों में कुछ मीठा या नियाज़ तकसीम कर दें.
सबसे अहम बात: अर्ज़ी कागज़ की नहीं, दिल की सुनी जाती है. यकीन पक्का रखें कि देने वाली ज़ात सिर्फ अल्लाह की है, बुजुर्ग उसक��� वसीला बनते हैं.
बच्चे को नज़र लगना हक़ है, इसके लिए नबी ﷺ से दुआएं साबित हैं.
नज़र के लिए सबसे बेहतर यही है:
1. ये वाली दुआ जो आप ﷺ हसन और हुसैन रज़ि. को पढ़कर दम करते थे:
أُ��ِيذُكَ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّةِ مِنْ كُلِّ شَيْطَانٍ وَهَامَّةٍ وَمِنْ كُلِّ عَيْنٍ لَامَّةٍ
तर्जुमा:
U'eizuka bi kalimaatillahit taammati min kulli shaitaanin wa haammatin wa min kulli aynin laammah
एक बच्चे के लिए U'eizuka और बच्ची के लिए U'eizuki कहेंगे, दो बच्चों के लिए
🌷U'eizukuma🌷
2. दूसरी मसनून दुआ:
بِسْمِ اللَّهِ أَرْقِيكَ مِنْ كُلِّ شَيْءٍ يُؤْذِيكَ مِنْ شَرِّ كُلِّ نَفْسٍ أَوْ عَيْنِ حَاسِدٍ اللَّهُ يَشْفِيكَ
Bismillahi arqeeka min kulli shai'in yu'zeeka min sharri kulli nafsin aw ayni haasidin Allahu yashfeek
तरीका क्या है:
वुज़ू करके बच्चे के सिर पर हाथ रख कर 3 बार ये दुआ, साथ में सूरह फातिहा, आयतुल कुर्सी, और आखिरी तीन कुल यानी इखलास, फलक, नास पढ़कर हल्क�� सी फूंक मार दें। सुबह शाम कर सकते हैं.
और हाँ, माशाअल्लाह, बारकल्लाह कहना भी नज़र से बचाता है, तो जब खुद ही बच्चा प्यारा लगे तो माशाअल्लाह ला कुव्वता इल्ला बिल्लाह ज़रूर कह लिया करें.