कुछ दिनों पहले बिहार के युवाओं से बहुत दिलचस्प बातचीत हुई - शिक्षा, स्वास्थ्य, रो���़गार हर मुद्दे पर। और, इन सबकी दुर्दशा के लिए सिर्फ एक गुनहगार है, BJP-JDU सरकार।
बिहार के युवा बखूबी जानते हैं कि पिछले 20 सालों में किस तरह इस मोदी-नीतीश सरकार ने उनकी आकांक्षाओं का गला घोंटा है, प्रदेश को लावा��िस छोड़ दिया है और हर पैमाने पर गर्त में धकेल दिया है।
*शिक्षा*
🔻 कक्षा 9–10 में ड्रॉपआउट दर: 27वां स्थान (29 राज्यों में)
🔻 कक्षा 11–12 में नामांकन दर: 28वां स्थान (29 राज्यों में)
🔻 महिला साक्षरता: 28वां स्थान (29 राज्यों में)
*रोज़गार*
🔻 सेवा क्षेत्र में रोजगार: 21वां स्थान (29 राज्यों में)
🔻 उद्योग/उत्पादन क्षेत्र में रोजगार: 23वां स्थान (29 राज्यों में)
*स्वास्थ्य*
🔻 शिशु मृत्यु दर: 27वां स्थान (29 राज्यों में)
🔻 बीमा योजना से स्वास्थ्य सुरक्षा: 29वां स्थान (29 राज्यों में)
🔻 घर में शौचालय की सुविधा: 29वां स्थान (29 राज्यों में)
*मानव विकास*
🔻 मानव विकास सूचकांक (HDI): 27वां स्थान (27 राज्यों में)
🔻 प्रति व्यक्ति आय (NSDP): 25वां स्थान (25 राज्यों में)
ये सिर्फ आंकड़े नहीं, आईना हैं - वो rear-view mirror जो दिखा रहा है कि ये 'डबल इंजन' बिहार को प्रगति से कितना पीछे खींच लाई है।
जितने भी बिहारी युवाओं से मिला हूं, सभी बेहद होनहार हैं, ���म��दार हैं। अपनी काबिलियत और मेहनत के बल पर हर जगह चमक सकते हैं - पर सरकार ने उन्हें अवसरों की जगह सिर्फ बेरोज़गारी और निराशा दी है।
अब वक्त है बदलाव का - बिहार का स्वाभिमान फिर जगाने का। वक्त है महागठबंधन का न्याय संकल्प दोहराने का।
त्योहारों का महीना है - दिवाली, भाईदूज, छठ।
बिहार में इन त्योहारों का मतलब सिर्फ़ आस्था नहीं, घर लौटने की लालसा है - मिट्टी की खुशबू, परिवार का स्नेह, गांव का अपनापन।
लेकिन यह लालसा अब एक संघर्ष बन चुकी है। बिहार जाने वाली ट्रेनें ठसाठस भरी हैं, टिकट मिलना असंभव है, और सफ़र अमानवीय हो गया है। कई ट्रेनों में क्षमता से 200% तक यात्री सवार हैं - लोग दरवाज़ों और छतों तक लटके हैं।
फेल डबल इंजन सरकार के दावे खोखले हैं।
कहां हैं 12,000 स्पेशल ट्रेनें?
क्यों हालात हर साल और बदतर ही होते जाते हैं।
क्यों बिहार के लोग हर साल ऐसे अपमानज���क हालात में घर लौटने को मजबूर हैं?
अगर राज्य में रोज़गार और सम्मानजनक जीवन मिलता, तो उन्हें हज़ारों किलोमीटर दूर भटकना नहीं पड़ता।
ये सिर्फ़ मजबूर यात्री नहीं, NDA की धोखेबाज़ नीतियों और नियत का जीता-जागता सबूत हैं।
यात्रा सुरक्षित और सम्मानजनक हो यह अधिकार है, कोई एहसान नहीं।
This is the truth of Indian railways.....approx 2 hrs late.....howrah- Amritsar (13005)at ECR Danapur every train is late in this route on other hand we move on bullet train......this is new India??
@EasternRailway@AshwiniVaishnaw@PMOIndia
This is the truth of Indian railways.....approx 2 hrs late.....howrah- Amritsar (13005)at ECR Danapur every train is late in this route on other hand we move on bullet train......this is new India??
@EasternRailway@AshwiniVaishnaw@PMOIndia
देश के लोकतंत्र को बचाने के लिए ज़रूरी है कि वोट चोरी पर रोक लगे और पारदर्शी, साफ-सुथरी वोटर लिस्ट तैयार होकर प्रकाशित हो।
चुनाव आयोग को नेता प्रतिपक्ष @RahulGandhi जी द्वारा दर्ज कराई गई आपत्तियों पर स्वयं संज्ञान लेकर कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए परंतु चुनाव आयोग ने इस पर कोई त���्परता ��हीं दिखाई।
चुनाव आयोग से मांग है - पारदर्शिता दिखाएं और डिजिटल डेटा उपलब्ध कराए।
There is a problem of traffic jam in Kankarbagh main road(Rajendra Nagar terminal) especially during office hours.The general public is facing a lot of trouble due to this. Please take this into consideration. I hope you will definitely fix it. @yadavtejashwi@NitishKumar
There is a problem of traffic jam in Kankarbagh main road(Rajendra Nagar terminal) especially during office hours.The general public is facing a lot of trouble due to this. Please take this into consideration. I hope you will definitely fix it. @yadavtejashwi@NitishKumar
गुलाम नबी आज़ाद जी के इस्तीफे की टाइ���िंग दुर्भाग्यपूर्ण है।
लगभग 50 साल तक युवा कांग्रेस, सांसद, मंत्री, मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष जैसे पदों पर रहने के बाद आज संघर्ष का समय था।
चिट्ठी में लिखी उनकी बातें सच से परे हैं और वो जिम्मेदारी से पीछे हटे हैं : श्री @SachinPilot
पिछले सात–आठ साल से देश की तमाम एजेंसियों को एक ही लक्ष्य दिया गया है कि कैसे विपक्ष की आवाज को दबाया जाए। महंगाई, बेरोजगारी, जीएसटी, सेना, सुरक्षा और कृषि जैसे देश के असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए तमाम एजेंसियों का खुलेआम राजनीतिकरण हो रहा है।
#SatyagrahaWithSoniaGandhi
सिलि���डर लेकर स्मृति ईरानी जी से मिलने पहुंचे कार्यकर्ताओं से तो उन्होंने मुलाकात नही की,
लेकिन दिल्ली पुलिस ने 'सिलिंडर' और हमारे कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया...!
स्मृति जी जब तक चुप्पी नही तोड़ती, सड़कों पर ये संघर्ष यूँ ही जारी रहेगा।
भाजपाई बोलते है “मैं भी चौकीदार” और समझते है खुदको ठेकेदार!! देश की सरकारी सम्पत्ति,नौकरियाँ और देश के युवाओं का भविष्य ये लोग लगातार ठेके पर दे ��हे हैं।एक एक करके समाज के हर तबके से उसका हक़-अधिकार छीन रहे हैं और ये सब ये लोग फ़र्ज़ी राष्ट्रवादी होने का ढोंग रचते हुए कर रहे हैं।