वरिष्ठ पत्रकार सुशील मानव और रवींद्र श्योराण के विश्लेषण ने साफ कर दिया है कि दीपेंद्र हुड्डा जी ने उस कथित अंग्रेज़ी शब्द का प्रयोग किया ही नहीं था। गहन पड़ताल के बाद भी उनके बयान में ऐसा कोई शब्द नहीं मिला।
इसके बावजूद दीपेंद्र जी ने उस शब्द के लिए भी खेद व्यक्त किया, जो उन्होंने कभी कहा ही नहीं था।
यह कदम दर्शाता है कि उनके लिए सिख समाज का मान-सम्मान और आपसी भाईचारा किसी भी राजनीतिक विवा��� से कहीं ऊपर है।
@DeependerSHooda
माननीय मुख्यमंत्री हरियाणा प्रदेश को किसने अधिकार दिया ??
जिस जाति में “संत शिरोमणि गुरू रविदास जी महाराज” और भारत रत्न “डॉ भीमराव अंबेडकर जी” जैसे संतों और महापुरुषों ने जन्म लिया, मुझे उस अपनी जाति पर गर्व है।
#ChiefMinister#haryana#BJPGovernment#Against#protest
1907 में अंग्रेजों के किसान विरोधी कानूनों के खिलाफ सरदार अजीत सिंह जी और शहीद-ए-आजम भगत सिंह जी के पिता सरदार किशन सिंह जी ने ‘पगड़ी संभाल जट्टा’ आंदोलन की अगुवाई की थी। उस दौर में चौधरी मातू राम हुड्डा जी भी इस संघर्ष में उनके साथ खड़े थे। इतना ही नहीं, अंग्रेजी हुकूमत से बचने के ���िए सरदार अजीत सिंह जी ने कुछ समय चौधरी मातू राम जी के घर में रहकर भूमिगत जीवन बिताया था।
आज कुछ लोग राजनीतिक स्वार्थ के लिए @DeependerSHooda जी पर सिख समाज के अपमान का आरोप लगा रहे हैं। उन्हें इतिहास के पन्ने भी पलट लेने चाहिए और पहले यह देखना चाहिए कि इस परिवार ने सिख समाज और किसान संघर्ष के साथ रिश्ता कब से निभाया है।
सिखों के सम्मान की बात जुबान से नहीं, इतिहास और कर्म से साबित होती है। और हुड्डा परि��ार का इतिहास इस बात का गवाह है।
Schools don't have teachers, hospitals don't have doctors, water has uranium, air is polluted, deforestation is at an all time high the rupee is at an all time low petrol prices are at an all time high, manipur is burning and after being the world's second-largest sugar exporter
हिंदुओं को खतरे से बाहर लाने के लिए चीनी महंगी करना जरूरी था वरना रक्षा बंधन में मिठाई खाकर हिंदू डायबिटीज का शिकार हो सकता था. मिलावटी पेट्रोल डालकर गाड़ियाँ भी इसीलिए ख़राब की गई हैं ताकि हिंदू पैदल चले और उसकी सेहत ठीक रहे…चीनी वही-सोच नई💪
@narendramodi
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री श्री @bhupeshbaghel जी को जन्मदिन की ढेरों बधाई एवं शुभकामनाएं।
मैं ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु जीवन की कामना करता हूँ।
एक भारतीय महिला होने का क्या मतलब है?
मैं जानना चाहता हूँ कि आप क्या महसूस करती हैं।
समाज की नहीं, परिवार की नहीं - आपकी अपनी आवाज़ क्या कहती है?
आपके संघर्ष, आपकी रुकावटें, आपका नज़रिया और आपके सपने।
आपकी कहानी क्या है? सबसे जवाब की उम्मीद कर रहा हूं।
22 अगस्त | महिला विशेष महारैली
📍AISSMS कॉलेज ग्राउंड, पुणे
#ChhatronKiGoonj
सिख समाज के साथ हमारा रिश्ता सिर्फ आज का नहीं, सदियों पुराना भाईचारा और पारिवारिक नाता है।
1984 के दंगों का दर्द हम समझते हैं। दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए और सिख समाज को न्याय मिलना चाहिए।
@DeependerSHooda जी ने स्प��्ट कहा है कि उन्होंने ‘��ोल मॉडल’ शब्द का प्रयोग नहीं किया और न ऐसी उनकी कोई भावना थी।
हमारे सिख भाइयों के सम्मान, अधिकार और न्याय की लड़ाई में हम हमेशा उनके साथ खड़े रहे हैं और आगे भी खड़े रहेंगे।
साहिल की FIR दर्ज हुई। यह न्याय की तरफ़ पहला क़दम है।
पर सोचिए - एक FIR लिखने की इजाज़त तक गृह मंत्रालय से आनी पड़ी। अब समझ आया कि न्याय पर लगाम किसने लगा रखी है।
लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध के तहत काले झंडे दिखाना कोई अपराध नहीं है, इसलिए भाजपा सरकार व गुड़गांव प्रशासन तानाशाही बंद कर हमारे दोनों जिला अध्यक्षों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को तुरंत बिना शर्त रिहा करे, दर्ज फर्जी मुकदमे वापस ले एवं सीमाएं लांघने पर सार्वजनिक माफी मांगे।
सरकार हमें इस कगार पर न लाए कि यदि हमारी सुनवाई और न्याय नहीं हुआ तो हमें हर उस जिले में विरोध-प्रदर्शन करने पर विचार करना पड़े जहाँ इनके मंत्री और मुख्यमंत्री जाएँ।
आज📍गुड़गांव में प्रेसवार्ता...
@SanjaySDutt@BhupinderShooda@raonarenderinc@VardhanYaadav@pk4gurugram@AvinashYadav___@isukhbirkataria@RaghubiraMLA@indurajnarwal
पूरे प्रदेश में सफाई कर्मचारी हड़ताल पर है और उनको न्याय न मिलना बेहद शर्मनाक है। हरियाणा की BJP सरकार तुरंत सफाई कर्मचारिय��ं से बात करे, उनकी माँगें माने और उन्हें पक्का करे।
प्रदेश में पहली बार हुड्डा सरकार में बिना किसी ठेकेदारी के 25,000 सफाई कर्मचारियों (ग्रामीण में 11,000 और शहरों में 14,000) को सीधा सरकारी रोल पर रखा गया और 10 साल में पक्का करने की पॉलिसी बनी थी। लेकिन दुःख की बात है कि मौजूदा बीजेपी सरकार ने 12 साल से उस पॉलिसी को लागू नहीं होने दिया।
BJP सरकार ने 12 साल के कार्यकाल में कोई एक नया सफाई कर्मचारी न तो भर्ती किय��, न ही उन्हें पक्का किया।
यह न्याय की दिशा में उठाया गया पहला कदम है और केस दर्ज हुआ है। साहिल के शरीर और आंख में छर्रे हैं। इनके दिल के पास भी छर्रे लगे हैं, एक आंख से दिखाई नहीं दे रहा है। जिसको एक महीना हो गया।
हम आज सुबह 11:30 बजे FIR करवाने आए थे। हमने हिंदुस्तान के एक नागरिक और उसके परिवार के लिए न्याय मांगा और उसमें भी करीब साढ़े सात घंटे लग गए। सोचने वाली बात है कि जब द���ल्ली के बीच मौजूद पुलिस स्टेशन पर न्याय मिलने में इतना समय लग रहा है, तो गांव और छोटे शहरों के पुलिस स्टेशन में क्या होता होगा।
जब होम सेक्रेटरी और अमित शाह ने फाइनल परमिशन दी, तब जाकर पुलिस ने FIR दर्ज की। ऐसे में आप समझ सकते हैं कि FIR रोक कौन रहा था। पुलिस FIR करना चाहती थी, लेकिन 'ऊपर' से न्याय पर ब्रेक लगा दी गई थी।
: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष @RahulGandhi जी
20 जुलाई को छात्रों पर हुए पैलेट गन के हमले में युवा साहिल लोचब की आँख की रोशनी जाने का खतरा पैदा हो गया है। उनकी शिकायत पर FIR दर्ज करने की बजाय पीड़ित को एक थाने से दूसरे थाने का चक्कर कटवाया जा रहा है। तानाशाही की हदें पार कर चुकी बीजेपी सरकार के गृह मंत्री आखिर छात्रों को इंसाफ क्यों नहीं देना चाहते।
जब तक छात्रों को न्याय नहीं मिलेगा हम पीछे नहीं हटेंगे, डटे रहेंगे।
@kharge@RahulGandhi@priyankagandhi@kcvenugopalmp@SanjaySDutt
साहिल की FIR दर्ज न होने देने का एक ही मतलब है -
नरेंद्र मोदी और अमित शाह के राज में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर खुल���आम पैलेट गन चलाई जा सकती है, मगर उन्हें इंसाफ नहीं मिल सकता।
जब तक FIR दर्ज नहीं होती, जब तक दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का भरोसा नहीं मिलता - हम डटे रहेंगे।
लक्ष्य न्याय है और वो हर हाल में लेकर ही रहेंगे।
आज साहिल लोचब के साथ, उनके साथ हुई पुलिस बर्बरता के खिलाफ FIR दर्ज कराने संसद मार्ग के DCP कार्यालय पहुँचा।
20 जुलाई को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे साहिल पर पुलिस ने पैलेट गन से हमला किया। छर्रों से बुरी तरह घायल साहिल की एक आँख की रौशनी खतरे में है।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन के खिलाफ ऐसी बर्बरता कोई कानूनी कार्रवाई नहीं, एक गंभीर अ���राध है। इस क्रूरता के लिए न गृह मंत्री अमित शाह ने छात्रों को कोई सफाई दी, न प्रधानमंत्री ने उनसे माफ़ी मांगी।
अब जब साहिल न्याय के लिए FIR दर्ज कराना चाहता है तो वो भी नहीं करने दिया जा रहा। इस तरह संविधान और संवैधानिक अधिकारों को कुचला जा रहा है।
@AmitShah जी, न्याय से इतना क्यों घबरा रहे हैं? ये डर दिखा रहा है कि आप अपना अपराध ��बूल कर रहे हैं।
FIR होगी। न्यायिक जाँच होगी। और ऊपर से नीचे तक जो भी इस बर्बरता के दोषी हैं, उन सभी पर कार्रवाई होगी।
साहिल और उसके जैसे पीड़ित हर छात्र को न्याय दिलाकर रहेंगे।