जहाँ सहूलियतें दम तोड़ देती हैं, वहाँ हौसले और लगन रास्ता बना लेते हैं, मोमबत्ती की मद्धम रोशनी में खुदा के कलाम और इल्म को हासिल करने की यह लगन दिल छू लेने वाली है, अल्लाह इन बच्चों को कामयाबी अता फरमाए! अमीन ❤️🤲🤲
“मैंने इस्लाम किसी के दबाव में नहीं बल्कि अपनी मर्ज़ी से कुबूल किया,
ये कोई निकाह नहीं है जो मौलवी पढ़ाएंगे और दाढ़ी भी मैंने अपनी मर्ज़ी से रखी है”
आयुष मलिक ने सच्चे दिल से इस्लाम क़ुबूल कर लिया है