हम सभी को सजग होकर रहना है,
हर स्थिति और हर परिस्थिति में.
बदलते सामाजिक परिदृश्य में,
कुशल रोल निभाना होगा.
समस्याओं का समाधान,
तटस्थ रहने या भागने से
तो नहीं मिलने वाला है.
लगातार बनी रहीं समस्याओं
के हल के लिए और पूर्ण समाधान
हेतु सभी को मिलजुलकर रहना ही चाहिए ॥
शान्तितुल्यं तपो नास्ति
न सन्तोषात् परं सुखम्
न तृष्णायाःपरो व्याधिः
न च धर्मो दयापरः
शान्ति सम कोई तप नहीं,संतोष से बड़ा कोई सुख नहीं,बढ़ी इच्छाओं से बड़ा कोई रोग नहीं, दया से बड़ा कोई धर्म नहीं.जहाँ मन में शान्ति संतोष है वहीं सुख है;जहाँ हृदय में दया है,वहीं सच्चा धर्म है।
हम सभी को सजग होकर रहना है,
हर स्थिति और हर परिस्थिति में.
बदलते सामाजिक परिदृश्य में,
कुशल रोल निभाना होगा.
स���स्याओं का समाधान,
तटस्थ रहने या भागने से
तो नहीं मिलने वाला है.
लगातार बनी रहीं समस्याओं
के हल के लिए और पूर्ण समाधान
हेतु सभी को मिलजुलकर रहना ही चाहिए ॥