इस देश में युवा शिक्षा और रोज़गार के सवाल पर जिस संख��या और संकल्प के साथ सड़कों पर उतरे हैं, वही इस आंदोलन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। राजनीति को अब युवाओं के पक्ष में बदलना होगा।
#Democracy #ChaloSansad
कभी चार दिन भूखे रहकर देखिए, सोनम वांगचुक का क़द समझ में आ जाएगा.
लाखों युवाओं के हक़ के लिए लड़ने वाला आदमी बुरा हो गया…लेकिन पूरी पीढ़ी का भविष्य बर्बाद करने वाली सरकार महान हो गई? वाह भाई!
आपको क्या लगता है कि ये इतनी हाई सोसायटी वाली महिलाएं बिल्कुल भोली भाली और अनपढ़ रही हैं कि कोई इनको कोई भी यूं ही बहका लेगा? दोष तो इनका भी है। तो सजा तो मिलनी चाहिए।
अमेरिका की फ्लोरेंस ने कहा था:उस संत के अनुयाई सत्ताधारियों की मनमानी पर अंकुश लगा देंगे..लेकिन आज विपरीत क्यों हो रहा है ? उस संत के अनुयाई.. आश्रमों में सत्ताधारियों का स्वागत क्यों कर रहे है 🤔 ?
जो पत्रकार अपनी ज़मीनी समझ के लिए समझे जाते हैं और जो सतह के नीचे की अंदरूनी बातों को ऊपर लाने का काम करते हैं उनकी पत्रकारिता सराहनीय है। उन पत्रकारों से ये भी उम्मीद है कि वे केवल सतह के नीचे की ही बात सामने न लाएं बल्कि जो सबके सामने सरेआम, दिनदहाड़े घटित हो रही हैं, उन बातों पर भी बिना डरे बोलें, रील्स बनाएं, स्टोरी व प्रोग्राम करें, जिससे उनकी दायित्व से भरी, सच्ची और ईमानदार पत्रकारिता, शोषित, वंचित, प्रताड़ित जनता के पक्ष में, सच में जनहित के साथ खड़ी दिखाई दे और उन भ्रष्ट पत्रकारों से अलग लगे जो धनहित में ‘जिसका दाना, उसका गाना’ वाले फार्मूले पर काम कर रहे हैं।
सरेआम दिख रहे, ऐसे कुछ विषय हैं:
⁃फ़र्ज़ी मुठभेड़ या फ़ेक एनकाउंटर
⁃बुलडोज़र की नाइंसाफ़ी
⁃ज़मीनों पर हो रहे क़ब्ज़े
⁃अवैध खनन व वन कटाई
⁃हर काम में बढ़ रहा भ्रष्टाचार
⁃हिरासत में हो रही मौतें
⁃निवेश में माँगा जा रहा कमीशन
⁃लाखों प्रतिदिन कमा रहे थाने
⁃झूठे दावों का बेशर्म प्रचार
⁃संविधान को मिटाने का षड्यंत्र
⁃आरक्षण को ख़त्म करने की चालबाज़ी
⁃भर्ती-नौकरी को ख़त्म करने की साज़िश
⁃खुलेआम साम्प्रदायिक भाषणबाज़ी
⁃चुनावी प्रक्रिया की धांधली
⁃पैसे बाँटकर लड़ा जा रहा चुनाव
⁃पीडीए पर लगातार बढ़ रहे अत्याचार