I have said it earlier, I am saying it again: Separate institutions for GCs is the only solution so that they don’t get a chance to interact or discriminate.
Reservation is probably the most poorly planned policy. It ensured caste lines were never blurred. Randomly putting a 60-70th percentile guy in the same class as a 99.9 percentile guy will always lead to unfortunate things like this. It’s like a sabotage to demoralise, make someone feel less, feel inferior.
विवेकानंद को ऐसे ही पोस्टर से नहीं हटाया गया था। इनका पूरा वैचारिक तंत्र सड़ा हुआ है। UGC पर इनके मुँह से, समाज द्वारा लगातार गालियाँ पड़ने के बाद, एक ज्ञान निकला था कि 'समाज को ऐसा लगता है कि यह अनुचित हो सकता है'।
IITs में अब मोदी एक्ट धनिया की तरह छींटा जा रहा है। और हमारी राष्ट्रवादी, समाज के एकीकरण की डींग हाँकने वाली संस्था को एक चोरी करने पर पकड़े गए विद्यार्थी की चिंता है, ना कि उस मस्तिष्क की जिसने अमेरिका में नौकरी करने की जगह देश को चुना।
जो भी आशा है आपको इन जोकरों से त्याग दीजिए। ये साले देश को बेच देंगे अवसर मिलने पर।
अरे हम इतने ही जातिवादी हैं तो हमारे साथ क्यों पढ़ना??
अपने कॉलेज बनाकर, अपनी ही कैटेगरी के स्टूडेंट, टीचर, स्टाफ - सब भर लो!
न हम रहेंगे, ना हम जातिवाद करेंगे?
ठीक?
अब एक नया रोहित वेमुला बनाया जाएगा। उसके टॉपर होने की मनोहर कहानियाँ बाहर आने लगी हैं। यह भी बताया जाएगा कि वो हॉस्टल में न्यूक्लियर पावर्ड जेट इंजन ब्रेकथ्रू के काफी निकट था जो एक बारह वोल्ट की लिथियम-प्लूटोनियम बैटरी से चल सकती थी।
परंतु, ब्राह्मणवादी प्रोफेसर ने टेक्नॉल्जी ले ली और उसे जातिसूचक गालियाँ देते हुए कहा कि क्या अब ‘अपशब्द अपशब्द अपशब्द’ भी पढ़ाई करेंगे? फिर भी साहिल ने हार नहीं मानी और परीक्षा में बैठा।
फिर, प्रोफेसर ने चुपके से उसके फोन में चैटजीपीटी एप्प खोल दिया और फोटो खींच कर अपलोड कर दिया। फिर जा कर उसे पकड़ लिया, बाहर ले गया और पुनः जातिसूचक गालियाँ दी।
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मैं मानता हूँ कि प्रोफेसर के कान में सीसा पिघला कर डाला जाना चाहिए। और मोदी एक्ट की महानतम धारा लगानी चाहिए।
साहिल वकोड़े IIT बॉम्बे के छात्र थे। परीक्षा चल रही थी। पूरा प्रश्नपत्र AI एप्प को अपलोड कर के उत्तर कॉपी में लिख रहे थे। प्रोफेसर ने पकड़ लिया। बाहर ले गए, डाँटा और कहा कि संस्थान के नियम स्पष्ट हैं आप चोरी करते पकड़े गए तो सस्पेंड किए जा सकते हो।
साहिल ने बाद में आत्महत्या कर ली। माँ-बाप ने पोस्टमार्टम के बाद भी शव नहीं लिया क्योंकि उन्हें न्याय चाहिए। न्याय पाने के लिए उन्होंने मोदी एक्ट की धाराएँ लगवा दीं प्रोफेसर पर।
एक लड़का आरक्षण से IIT पहुँचा। कम नंबर न आए, इसलिए चोरी कर रहा था। वह टॉपर बनना चाह रहा था। पर एक मनुवादी शिक्षक ने उसे कॉलेज के कानून बताए, सस्पेंड किया भी नहीं। उसने आत्महत्या कर ली।
क्या एक दलित को फोन ले जाने अनुमति नहीं होनी चाहिए? क्या ऐतिहासिक प्रताड़ना के कारण उसको ओपन मोबाइल परीक्षा देने की अनुमति नहीं होनी चाहिए?
आज एक ब्राइट स्टूडेंट, जो जेट इंजन बना सकता था AI से पूछ कर, हमारे बीच इसलिए नहीं रहा क्योंकि उससे पहले ही चरण में रोक लिया गया। मोदी एक्ट इसीलिए बना ही है।
प्रोफेसर को फाँसी होनी चाहिए।
father of the IIT Bombay student who died by suicide after being caught cheating in an exam says there’s a caste angle to his son’s death.
lmao, get into IIT by quota, caught cheating during exam, k!lls himself and now blames caste issue.