डिलिमिटेशन सहित दो विवादास्पद विधेयकों पर सत्ता-विपक्ष में जबर्दस्त गोलबंदी के बीच शरद पवार की पार्टी के सभी आठ सांसदों की PM Modi से मुलाकात का मतलब क्या है?कुछ दिनों पहले श्री पवार और सु��्रिया सुले भी मोदी से अलग मिल चुके हैं! कल सारे सांसद भी मिले, पता नहीं 'दिल मिले' कि नहीं!
मूर्ख लोग कृपा इस पोस्ट से दूर रहें, उन्हें मेरी यह पोस्ट नही समझ आएगी.
सोशल मीडिया OBC SC ST तीनों ने अपनी अलग अलग दुकान सजा रखी है.
OBC भी संगठित नही हैं. कई जातियों को Neo Kshatriya बनने की बीमारी लगी हुई है.
दीनहीन गरीबों पर अत्याचार कर के कहते हैं हम नव-क्षत्रिय हैं.
SC की एक जाति पार्ट टाइम के लिए दलित हैं और बाकी टाइम के लिए अपनी प��चायत में अपनी जाति का तबला बजाते हैं.
ST वाले कहते हैं हमको बहुजन में मत जोड़ो, हम अलग हैं.
सोशल मीडिया और जमीन दोनों पर ब्राह्मण क्षत्रिय बनिया और कायस्थों के बीच जबरदस्त सामाजिक और राजनीतिक आपसी भाईचारा और आपसी सहमति है.
मित्रों, अगर इतनी सरल बात आप समझ गए तो हमें भी आपस में आपसी तालमेल, आपसी सामंजस्य और आपसी भाईचारा बनाने से कोई रोक नही सकता.
भारत की जनसंख्या 1772 में अखंड भारत की जनसंख्या 18-20 करोड़ थी. इसी साल ब्रिटिश हुकूमत ने बंगाल में जिले बनाए और हर जिले में भूमि राजस्व वसूलने के लिए डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर नियुक्त किया.
यही डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर भारत में ब्रिटिश साम्राज्य के शासन व्यवस्था की नींव बने.
1855 में भारत की प्रथम आदिवासी क्रांति के समय कुल 1,50,000 के करीब ब्रिटिश भारत में थे. इनमें 45,000 यूरोपीय सैनिक थे.
इतने बड़े भारत को अपने नियंत्रण में रखने के लिए ज्यादा से ज्यादा जिलों को बनाना शुरू किया, 230 के आसपास जिलों को बनाया. हर जिले में एक ब्रिटिश मूल का कलेक्टर बनाया जाता.
ब्रिटिश हुकूमत ने भारत में बनाई हर संस्था और संगठन का मुखिया किसी न किसी अंग्रेज को बनाते. 1931 में ब्रिटिश इंडियन आर्मी में 1,10,000 भारतीय सिपाही थे. लेकिन बड़े अधिकारी अंग्रेज होते थे.
1947 के बाद अंग्रेजों का स्थान सवर्ण जातियों ने ले लिया है. उनकी आब��दी अंग्रेजों की तरह है लेकिन बड़े पदों पर विराजमान होकर बहुसंख्य�� बहुजन समाज पर वर्चस्व बनाए हुए हैं.
मोहन भागवत का कहना है आरक्षण का लाभ ले चुके OBC SC ST को आरक्षण छोड़ देना चाहिए.
मोहन भागवत ऐसे बोल रहे थे जैसे आरक्षण गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम है. सभी आरक्षण विरोधियों से ���हना चाहता हूँ आरक्षण गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम नही है.
संविधान के अनुच्छेद 15(4) - सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों तथा SC-ST के लिए विशेष प्रावधान है.
संविधान के अनुच्छेद 16(4) - सरकारी नौकरियों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व न होने पर पिछड़े वर्ग और SC ST के लिए आरक्षण है.
आरक्षण का उद्देश्य गरीबी मिटाना नही था और ना ही संविधान में ऐसा कुछ कुछ लिखा है. संविधान में साफ साफ लिखा है सामाजिक और शैक्षणि��� पिछड़ेपन के कारण आरक्षण है. चिंतन मनन का विषय आरक्षण नही, सवर्ण समाज के बीच जातिवाद, विशेष सामाजिक अधिकार और ओवर रिप्रजेंटेशन पर बहस होनी चाहिए.
अभिजीत दीपके ने My Autobiography Dr BR Ambedkar किताब को लहरा कर बहुजन समाज के साथ धोखा किया है.
My Autobiography क्या अर्थ है, मेरी जीवनी. जब बाबा साहेब ने खुद कभी अपनी जीवनी लिखी ही नही तो उनके नाम पर ये गोरखधंधा कैसे हो रहा है ?
यह किताब Amazon पर 235 रुपए में मिल रही है, जिन्हें जानकारी नही है वो बाबा साहेब की लिखी किताब समझ कर आर्डर कर देते हैं.
अभिनीत दीपके चाहता तो Annihilation of Caste, Who were the Shudras ��ा The Buddha and his Dhamma किताब दिखा सकता था, लेकिन उसने ऐसी किताब दिखाई जिसका बाबा साहेब से कोई संबंध नही है.
डॉ बाबा साहेब अंबेडकर ने वेटिंग फॉर वीजा में अपने बचपन में झेला जातीय भेदभाव के एहसास को लिखा है, यह किताब भी उनकी आत्मकथा नही है.
DMK के सांसद दयानिधि मारन ने NEET का पोस्टमार्टम कर दिया.
दयानिधि मारन ने कहा, NEET दलित पिछड़ा और आदिवासियों के खिलाफ है. NEET ग्रामीण इलाकों ���े गरीब बच्चों के लिए अभिशाप है.
स्टेट बोर्ड की परीक्षा में 12th में 98% आया तो भी मेडिकल में सीट मिलेगी. इसके लिए NEET देना होगा, NEET की तैयारी के लिए 5-10 लाख रुपए की कोचिंग फीस देनी होगी.
मित्रों, DMK शुरू से NEET के खिलाफ है. NEET को इसीलिए लाया गया ताकि सेंट्रल बोर्ड में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को सीट मिल जाए. NEET का पूरा डिजाइन सेंट्रल लेवल का है इससे स्टेट बोर्ड के बच्चे पिछड़ जाते हैं.
आप लोगों को जानकर हैरानी ह���गी NEET को कांग्रेस ने लाया था. DMK ने NEET को खत्म करने की मांग की है.
NEET के खिलाफ केवल DMK के दयानिधि मारन ने बोला. बाकी विपक्ष के किसी भी नेता ने NEET पर प्रतिबंध लगाने की मांग नही की.
ब्यूरोक्रेट्स और अमीर तबके ने NEET इसलिए लाया ताकि स्टेट बोर्ड में पढ़ने वाले ��रीब बच्चे मेडिकल सीट ना ले पाएं.
CBSE ICSE बोर्ड के बच्चे लाखों रुपए की कोचिंग फीस चुकाकर NEET क्रैक कर लेते हैं. गरीब पीछे रह जाते हैं.
राज्य बोर्ड में 99% लाने वाले बच्चे भी बिना कोचिंग के NEET परीक्षा पास ही नही कर सकते.
NEET पर बैन लगाने की मांग कीजिए.
अभिनव मैथ्स जो असल में शर्मा है, इसने रिज़र्वेशन पर हमला किया है. कहता है आरक्षण के कारण सवर्ण छात्रों का नुकसान होता है.
OBC और SC-ST आरक्षण में रिफॉर्म की मांग कर रहा है.
इस अभिनय शर्मा से सवाल है जाति जनगणना की मांग करने पर कुछ लोगों को बुखार, उल्टी और पेचिश क्यों होने लगती है ?
जाति जनगणना का ये लोग विरोध करते हैं कारण सवर्णों की मूल आबादी पता चल जाएगी. अपनी आबादी बताना नही चाहते हैं.
हर क्षेत्र में सवर्णों का ओवर रिप्रजेंटेशन. जब ये लोग आरक्षण पर हमला करते हैं तो आप लोग डाइवर्सिटी रिपोर्ट की मांग क्यों नही करते. यानी हर सेक्टर जैसे एजुकेशन, मीडिया न्यायपाल���का, ब्यूरोक्रेसी, फ़िल्म इंडस्ट्री और कॉरपोरेट सेक्टर की जातीय आधार पर डाइवर्सिटी रिपोर्ट जारी होनी चाहिए. डाइवर्सिटी रिपोर्ट से ये लोग बेनकाब हो जाएंगे.
NEET पेपर लीक केस
फास्ट ट्रैक कोर्ट में पहले दिन ही सुनवाई टल गई, क्योंकि CBI के वकील नहीं आए थे. अब अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी.
ये है फास्ट ट्रैक कोर्ट का हाल, जिसे मोदी सरकार अपनी जीत बता रही ह���.
सौरव दास नाच रहा है, जश्न मना रहा है. CJP की पूरी लीडरशिप सोशल मीडिया पर केवल ट्वीट कर रही है.
Neha Bora आज बिहार आकर गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों की रिहाई क��� मांग कर रही है.
नेहा बोरा ने कल रात को ही वीडियो बनाकर अपील की थी, केवल इस्तीफा हुआ है अभी तक सरकार ने प्रदर्शनकारियों को रिहा नही किया है.
नेहा बोरा भी चाहती तो फाइव स्टार होटल में डांस कर सकती थी. लेकिन नेहा बोरा ने संघर्ष का रास्ता चुना.
20 जुलाई आंदोलन का ऑडिट होना चाहिए. अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रंका क्या कर रहे थे. लाठी डंडे युवाओं ने खाया, हीरो ये लोग बन रहे हैं ?
एससी/एसटी/ओबीसी के आरक्षण को बढ़ाकर 85% करने की मांग को लेकर हम जंतर-मंतर पर आंदोलन करना चाहते हैं। आपके साथ कितने लोग इस आंदोलन में शामिल होने के लिए तैयार हैं? जो लोग इस आंदोलन के समर्थन में हमारे साथ आना चाहते हैं, वे इस पोस्ट को रीपोस्ट करें।
@Vishal_aawaj वर्ण अव्यवस्था हटाओ अभियान, समय की मांग है. EWS का मजा भी चाहिए और आरक्षण को गाली भी देना है. आरक्षण किसी ने नही मांगा है, अलग निर्वाचन क्षेत्र और डबल वोट छीनकर जबर्दस्ती आरक्षण दिया गया.
क्या दलित अराजकता फैलाकर सरकार बदलने की बात करते हैं? क्या उनके आंदोलनों को कहीं और से फंडिंग मिलती है? क्या उनके आंदोलनों को कोई और संचालित करता है? और दलित आंदोलनों को मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर कितनी जगह और प्रचार मिलता है? इन सभी सवालों पर निष्��क्ष और गंभीर चर्चा होनी चाहिए।
आंदोलन पर किसी का पार्टी या संगठन का Copyright नही होना चाहिए. ना ही इस आंदोलन को एक जगह समेट कर इसे छोटा किया जाए.
कल मैदान में डिंपल यादव, समाजवादी पार्टी के 37 MP और ASP नेता चंद्रशेखर आजाद डटे रहे.
अभिजीत दीपके पुलिस की लाठी से बचने के लिए ट्रैक के ऊपर चढ़ गया. दो लोग मीटिंग मीटिंग खेल रहे थे. एक को दिल्ली के मेट्रो स्टेशन पर घूमते हुए पकड़ा गया.
आम आदमी पार्टी ने PM आवास के पास राहुल गांधी के आंदोलन का विरोध किया. इसी के बाद अभिजीत दीपके बयान जारी कर रहे हैं आंदोलन केवल जंतर मंतर पर होना चाहिए. सवाल है क्या CJP आम आदमी पार्टी की B टीम है.