मेरे भाई!
प्रवेश पर��क्षा के मार्क्स कोई अच्छे डॉक्टर बनने की योग्यता नहीं होती। दुनिया में सबसे बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाये देने वाले देश जर्मनी, स्वीडन, डेनमार्क, नॉर्वे…जैसे देशों में तो कोई एंट्रेंस ए��्जाम ही नहीं होता। जिसको रुचि होती है वो सीधे प्रवेश ले लेता है। और वहाँ के हॉस्पिटल और उनकी व्यवस्था एक बार देख कर आना।
और दूसरी बात कोई मुझे बता सकता है ..क्या प्रवेश परीक्षा में AIR 1 लाने वाला ही देश का सबसे बेहतरीन डॉक्टर बनता है ? जिसको लगता हो तो उन डॉक्टर्स के बारे में पता करो जिनको उत्कृष्ट सेवाओ के लिए पद्म श्री पुरस्कार मिला है। क्या उनमे से किसी की रैंक १ थी ? यहाँ तक टॉप १०० भी नहीं है। क���छ बेहतरीन डॉक्टर्स की रैंक तो हज़ारो में थी।
भारत और चीन जैसे जनसंख्या वाले देश ही एक कठिन इस तरह की परीक्षा करवाते है क्योंकि उनके पास पर्याप्त सीट नहीं होती, और ना सबके लिए दूसरे रोजगार के अवसर अधिक होते।
क्या -40 नंबर से कोई डॉक्टर बन सकता है ?
क्या बिना ��ारे सेमेस्टर एग्जाम पास किए , सारे प्रैक्टिकल वाइवा पास किए, किसी को डिग्री मिल सकती है ? क्या इसके बिना किसी डॉक्टर को लाइसेंस मिल सकता है ? सेमेस्टर एग्जाम में कोई आरक्षण नहीं होता है सबके साथ एक ही तरह से सबको पास करना होता है। डिग्री सबको एक प्रोसेस से ही मिलती है।
प्रवेश परीक्षा सिर्फ प्रवेश यानी एडमिशन के लिए है, एससी/एसटी केटेगरी के मार्क्स को बोल रहे हो, लेकिन EWS के मार्क्स से कोई समस्या ���हीं ? और मैनेजमेंट कोटे से जो लाखो करोड़ो की सीट खरीद लेते है उनके मार्क्स नहीं पूछते और ना ही आपको पता होंगे।
क्यूँकि हमारे देश में पर्याप्त सीट नहीं है, और दूसरी तरह की नौकरियों में इस तरह के पैसे और अवसर ��हीं है इसलिए इस प्रवेश परीक्षा में इतनी मारामारी होती है। बहुत से देशों में तो इसकी प्रवेश परीक्षा भी नहीं होती जिसको रुचि होती है वो सीधा प्रवेश लेता है। इसलिए बहुत से छात्र दूसरे बहुत से देशों में पढ़ने जाते है।
ये इतनी सी बात अगर किसी को समझ नहीं आ रही है तो या तो आप किसी गधे के अवैध शुक्राणु से पैदा मूर्ख है या बहुत घटिया दर्जे के धूर्त। 🙂
जब आप पढ़े-लिखे नहीं होते,आपका अधिकतम ज्ञान गूगल आधारित होता है तो इसी तरह अधकचरापन फैलाते हैं।इस दिव्य मासूमियत की जरूरत इसलिए भी पड़ती है कि राम म���दिर के सारे डकैत स्वजातीय हैं।इसमें एक भी अब्दुल होता फिर देखते तमाशा।अकेले टुन्नू यादव कितने लुटेरों का पाप छुपाएगा।बहुत दर्द है।
न्याय की आस में भटक रहे पीड़ित परिवार का सब्र अब टूट चुका है। पुलिसिया कार्रवाई न होने से परेशान होकर पीड़ित परिवार आंदोलन करने को मजबूर है। स्थिति इतनी गंभीर है कि आंदोलन के दौरान न्याय न मिलने पर एक महिला ने अपने प्राणों की आहुति देने का ऐलान किया है।
अगर कोई अनहोनी हुई, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।
@JharkhandCMO@HemantSorenJMM@KodermaPolice@JharkhandPolice@DigHazaribagh
कोर्ट से की गिरफ्तारी पर रोक संबंधी आदेश (831/2026) के बावजूद शुक्रवार को श्याम शर्मा को जबरन सोनारी थाना बुलाकर थाना प्रभारी व आईओ ने(केस संख्या-45/2026) हाजत में बंद करने की धमकी देते हुए जबरन दो हजार ले लिए.आरोप का संज्ञान लें.
@Jsr_police@JharkhandPolice@HemantSorenJMM
@JtrahulSaini मेरे गृह जिला के pokhraha चौक का मामला है.aaye दिन waha accident hote रहता है.kuch din पहले भी एसिडेंट मे एक की मौत हो गयी थी. Ye jo हैं वो aisha सिंह हैं.nagar निगम मे mayor ka election लड़ चुकी हैं
..@sunny_sharad जी,कृप्या माननीय मुख्यमंत्री श्री @HemantSorenJMM जी तक मेरी बात को पहुंचा दीजिए।
मेरा Rims में Operation Unsuccessful रहा,और मैं इसे पुनः कोडरमा के Private Hospital में भर्ती किया हूं।
#Help 🙏
झारखंड आंदोलन के प्रणेता, शोषितों-वंचितों के मसीहा, श्रद्धेय 'दिशोम गुरु' आदरणीय शिबू सोरेन जी के महाप्रयाण के बाद खाली हुई राज्यसभा सीट पर आज झामुमो के वरिष्ठ नेता श्री @Baidyanathram01 जी ने उच्च सदन के सदस्य के र��प में शपथ ली है।
यह क्षण हम सभी के लिए अत्यंत भावुक भी है और ऐतिहासिक भी।
जिस आसंदी से बाबा गुरुजी ने दशकों तक आदिवासियों, मूलवासियों और वंचितों के हक-अधिकार की आवाज बुलंद की, आज उसी जगह पर समाज के सबसे अंतिम पायदान से आने वाले एक कद्दावर और संघर्षशील नेता को राज्यसभा भेजना झारखंड मुक्ति मोर्चा की स���माजिक समरसता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
माननीय सभापति श्री सी.पी. राधाकृष्णन जी की उपस्थिति में बैद्यनाथ राम जी ने भारत के संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ ली।
पूरा विश्वास है कि वे गुरुजी की विरासत को आगे बढ़ाते हुए दिल्ली के दरबार में झारखंड की गरीब जनता और पिछड़ों की बुलंद आवाज बनेंगे।
शपथ ग्रहण के इस पावन और ऐतिहासिक अवसर पर आदरणीय सांसद श्री बैद्यनाथ राम जी को ढेरों बधाई एवं उज���जवल कार्यकाल की मंगलकामनाएं! 💐
जोहार!
@HemantSorenJMM
दिव्यांग, वृद्ध और विधवा पेंशनधारियों को पिछले चार महीनों से पेंशन नहीं मिल रही है। जिन लोगों के लिए यह राशि जीवनयापन का मुख्य सहारा है, वे आज बैंक और सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
सरकार एक तरफ़ कल्याणकारी योजनाओं के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि सबसे ��मजोर वर्ग को समय पर उसकी हक़ की राशि तक नहीं मिल रही। ₹1000 की मामूली पेंशन भी महीनों से अटकी हुई है।
महंगाई लगातार बढ़ रही है, दवाइयों और रोजमर्रा की जरूरतों का खर्च बढ़ता जा रहा है, ऐसे में पेंशन में देरी गरीब और असहाय लोगों के लिए गंभीर संकट बन चुकी है।
सवाल यह है कि जब सरकार अन्य योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च कर सकती है, तो दिव्यांग, वृद्ध और विधवा पेंशनधारियों को समय पर भुगतान क्यों नहीं किया जा रहा?
समाज के सबसे कमजोर वर्ग को सम्मान और सुरक्षा देने के दावों की सच्चाई तभी साबित होगी, जब उनकी पेंशन समय पर उनके खाते में पहुंचे। अभी तो हालात यही बताते हैं कि वादे बहुत हैं, लेकिन ज़मीन पर संवेदनशीलता और जवाबदेही की कमी साफ दिखाई दे रही है।
@dc_dhanbad @HemantSorenJMM
@chamralindaJMM @ceojharkhand
सदर अंचल लोहरदगा मौजा बमनाडीह खाता संख्या162 प्लॉट स०1386 रकबा 3 डि० का ऑनलाइन रसीद कटवाने के लिए अहमद जी विगत तीन वर्षों से अंचल का चक्कर लगा रहे हैं अभी तक इनका काम नहीं हो पाया है
आदरणीय उपायुक्त @DC_LOHARDAGA महोदय आपसे आग्रह है ��ी मामले में तत्काल संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करने की कृपा करें।
@deepakbiruajmm
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में पत्रकार श्याम लाल यादव ने खुलासा किया है
UPSC में EWS श्रेणी से चयनित 104 अभ्यर्थियों में से 67 ऐसे हैं जिन्होंने उन कोचिंग संस्थानों में पढ़ाई की, जिनकी वार्षिक फीस ढाई लाख रुपये से अधिक है। 14 IIT से ग्रेजुएट हैं , 28 के माता पिता का बिजनेस है 10 मल्टीनेशन कंपनीज में जॉब करते हैं अब यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या ये वास्तव में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग में आता है?
पिछले दिनों सोशल मीडिया पर एक नन्हीं बच्ची का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उसने अपनी मजबूरियों को बयां करते हुए @DC_Palamu से मदद की गुहार लगाई थी।
आज पलामू डीसी साहब का इस बेसहारा परिवार ��े खुद जाकर मिलना, उनकी सुध लेना और इस नन्हीं बेटी को एक उज्ज्वल भविष्य का पूरा आश्वासन देना बेहद दिल छू लेने वाला है।
यह तस्वीर बताती है कि जब प्रशासन संवेदनशील हो, तो आम जनता की उम्मीदें कभी नहीं टूटतीं।
पूरा विश्वास है कि यह बेटी पूरी लगन से पढ़-लिखकर अपने माता-पिता, पलामू और पूरे झारखंड का नाम रोशन करेगी।
इस सराहनीय और त्वरित पहल के लिए पलामू डीसी साहब का सहृदय आभार! 🙏
@HemantSorenJMM @JharkhandCMO
झारखंड की माटी के एक बड़े नेता, जिन्होंने अलग राज्य आंदोलन में अपनी जवानी खपा दी, आज उनकी स्थिति देखकर दुःख होता है। जब चंपई सोरेन जी झारखंड मुक्ति मोर्चा में थे, तो उन्हें 'टाइगर' का दर्जा मिला, मुख्यमंत्री की कुर्सी मिली और पूरा सम्मान मिला।
लेकिन आज बीजेपी की इस बैठक की तस्वीर सब बयां कर रही है। मंच पर बाकी लोग कुर्सियों पर ठाठ से बैठे हैं और हमारे पूर्व मुख्यमंत्री को पीछे खड़ा रखा गया है।
यह अपमान झारखंड के हर उस व्यक्ति का है जो चंपई जी को अपना नेता मानता हैं।
बीजेपी के लिए क्षेत्रीय नेता सिर्फ चुनाव जीतने का 'मोहरा' होते हैं, यह बात ��क बार फिर साबित हो गई है।
बाकी जोहार रहेगा.. 🙏