आख़िरकार, हमको यह समझना ही होगा कि ज़िंदगी तो चलती ही रहती है, चाहे आप सकारात्मक हो या ना हो और जिंदगी ���ा आनंद ले रहे हो या नहीं�� हम सब को बस अपना नज़रिया बदलना है और ज़िंदगी की धारा में बहना शुरू करना है, ना कि उस पानी के तापमान की तरह शिकायत करनी है जिसे हमने अभी तक आज़माया भी नहीं है।
उन नकारात्मक सोच वाले लोगों के लिए, जो जीवन के कीचड़ भरे गड्ढों में ही पड़े रहना पसंद करते हैं और अपने अस्तित्व को सही ठहराने के लिए दूसरों की सहानुभूति पर निर्भर रहते हैं !
कमाल है न ! लोग वहाँ पहुँचने की कोशिश करते हैं, जहाँ वह खुद भी नहीं जानते कि पहुँच भी पायेंगे या नहीं । मतलब प्रैक्टिकल नाम की भी कोई चीज़ होती है कि सोच लें, कहाँ जायेंगे, कैसे जायेंगे ?
जीवन की यह आदत होती है कि वह हम पर "दुर्घटनाएं" थोपता है- या तो हमें धीमा करने के लिए, या फिर हमें सही रास्ते पर वापस लाने के लिए, यदि हम अपने निर्धारित मार्ग से भटक गए हो तो !