@TruthNDSarcasm@FirstDoctor During my school days, I had also read in some Ayurveda book that in ancient times, sages and saints did not ejaculate their semen, they used to absorb that semen in their bodies.
@Sanubyadwal शेखावाटी में खासतौर से SC, ST, OBC की महिलाओं की एक ही तरह की पोशाक होती है घाघरा ओढ़नी , तो ये पोशाक किसने किसकी कॉपी की है कोई नहीं देखता,
बस पोशाक का महत्व एक क्षेत्र विशेष से हो सकता है
जो जहां का निवासी है वहां सब एक जैसी पोशाक को अपना लेते हैं ।
If I were 20 today, तो बड़े कामों से ज़्यादा ध्यान छोटे-छोटे कामों पर देता।
क्यों?
क्योंकि अपनी journey को पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो एक बात बार-बार साफ़ होती है: छोटे काम ही बड़े दरवाज़े खोलते हैं।
मैंने बहुत कम से शुरुआत की थी। Bombay की सड़कें ही मेरा college थीं। अख़बारों में metal prices देखना, दूसरो��� को deals करते हुए observe करना, और जहाँ लगता था जवाब मिल सकता है, वहाँ सवाल पूछ लेना।
उन शुरुआती दिनों में न कोई बड़ी strategy थी, न कोई bold moves, बस वो काम थे, जिन्हें ज़्यादातर लोग ज़रूरी नहीं मानते।
समय पर पहुँचना, meetings में calculator साथ रखना, एक ��ी appointment miss न करना, ऐसे छोटे-छोटे काम।
ये छोटे काम रोज़मर्रा में दिखते नहीं थे। कई रातें ऐसी भी आईं, जब लगा: क्या इसका कोई फल मिलेगा भी?
इसलिए जब कोई मुझसे पूछता है कि कुछ बड़ा करने का secret क्या है, तो मेरा जवाब हमेशा एक ही होता है:
छोटे कामों पर ध्यान दीजिए, और देखिए कैसे बड़े दरवाज़े अपने आप खुलते हैं।
यही simple habit आगे चलकर Vedanta की नींव बनी।