मैं अपनी सभी दोस्तों से बस इतना कहना चाहती हूं कि सोशल मीडिया पर किसी की उम्र सिर्फ देखकर अंदाजा लगाना हमेशा सही नहीं होता।
पहली और दूसरी तस्वीर में नजर आ रही महिला को देखकर शायद आपको उनकी उम्र कम लगे, लेकिन तीसरी तस्वीर में उनके साथ खड़ा युवक उनका 20 साल का बेटा है। और उनकी मां की उम्र 42 साल बताई जा रही है।
कहते हैं, उम्र सिर्फ एक नंबर है—खुद पर काम करना और स्वस्थ रहना ज्यादा मायने रखता है।
आपका इस पर क्या कहना है?
मीडिया पेपर लीक पर जंतर मंतर से लेकर NTA तमाम संगठनों और सरकार की ख़ामियों को गिनाती है । और दिनभर कभी CJP के दीपके का इन्टरव्यू तो पुलिस पेपर छपाई होने वाले प्रेस की कमियों को बताती है। ये लोग स्टिंग आपरेशन करेंगे,इनके पास सारे बुद्धिजीवी AI सारी तकनीक है।इनके पास एक पेपर कैसे सुरक्षित छपाई हो कहीं से लीक न होने पाये कोई आइडिया राय तकनीक नही बतायेंगे जिससे कभी पेपर लीक न हो । और सुरक्षित परीक्षा हो जाये कोई छात्र की मेहनत बेकार न होने पाये यह काम कभी नही करेंगे । इन मीडिया वालों को सिर्फ़ हल्ला मचाना रहता किसी भी मुद्दे पर उसका समाधान या निष्कर्ष निकालने की कोशिश नही करेंगे सनसनी जरूर फैलाएँगे बाल की खाल निकालकर।
इन नन्हे कदमों की ताल में मासूमियत है, और मुस्कान में पूरी दुनिया की खुशी ।
"ना बड़ा मंच, ना महंगे कपड़े ... सिर्फ़ हुनर, जो दिल जीत ले।
इन नन्हे कलाकारों के जोश को एक ❤️ तो बनता है...
भविष्य के सितारे ऐसे ही चमकते हैं।
"प्रतिभा अमीरी की मोहताज नहीं होती,
नैनीताल जिले के मुक्तेश्वर में महिलाओं ने शनिवार को दो मनचलों का हाथों हाथ ऐसा ईलाज किया कि …..
मनचलों के मुंह पर कालिख पोती और जमकर थप्पड़ और चप्पल बरसाई
तू भी खामखा ही बढ़ रही है ए धूप,,,
इस शहर में अब पिघलने वाले दिल नहीं है...
हमारे सुदूर पूरब में बसे राज्य asaam में विपदा की घड़ी है। असम आज बाढ़ की विभीषिका से त्रस्त है। जनजीवन अस्तव्यस्त है।
आंकड़ों की मानें तो अबतक 80 लोगों की असामयिक जान जा चुकी है। 1.92 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ विभीषिका से त्रस्त है। 379 गांव पानी मे पूरी तरह डूबे हैं।
एक छोटा सा किस्सा है द्वापर युग का।
एक त्रिकालदर्शी साधु सबका भविष्य बता देते थे।
उनका मजाक उड़ाने के लिए कुछ लौंडों ने पप्पू जैसा ही मखौल किया।
स्त्री का रूप धरा और पेट पर लोहे-कपड़े आदि बांध कर उसे ऊंचा किया।
साधु से पूछने गया कि इस ‘महिला’ को बेटा होगा या बेटी?
साधु समझ गए कि उनका उपहास किया जा रहा है।
गुस्सा आ गया उन्हें और शाप दिया कि न बेटा न बेटी।
इसके पेट से जो निकलेगा, उससे तुम्हारे सारे खानदान का सफाया हो जाएगा।
निर्वंश हो जाएगी तुम्हारी नस्ल ही।
आगे का वृत्तांत आपको पता ही है।
उसी कुल में श्रीकृष्ण पले-बढ़े, फिर भी साधु के शाप का प्रभाव खत्म नहीं कर पाये।
यदुवंश का सफाया हो गया।
पप्पू का यादव होना महज़ संयोग है।
वैसे भी अब जातिगत या वंशानुगत व्यवस्था वैसी नहीं है, जिसमें किसी एक घटना से सम्पूर्ण जाति को जोड़ दिया जाये।
सो, यह जातिगत बात बिल्कुल नहीं है।
किंतु ..
किंतु यह कहने में हमें कोई गुरेज नहीं है कि जिस तरह का कृत्य आज दोनों पप्पुओं ने किया है, उसका प्राकृतिक दंड तो मिलेगा ही। नैसर्गिक न्याय हो कर रहेगा।
शायद हम सब देखेंगे इन्हें सजा मिलते हुए। लाजिम है देखेंगे।
हे ईश्वर!
इन्हें बिल्कुल भी क्षमा मत करना।
इन्हें पता है कि ये क्या कर रहे थे।
समस्त सनातन समाज को अपमानित कर खून के आसूं रुलाने वाले इन दोनों पप्पुओं के विरुद्ध हुए ‘न्याय’ देखने की प्रतीक्षा रहेगी।