नुपुर शर्मा से माफ़ी माँगने की जगह देश की नपुंसक व्यवस्था ने जिहादियों के सामने न सिर्फ़ आत्मसमर्पण किया,बल्कि भारत राष्ट्र की आने वाली पीढ़ियों को भी आततायियों के सामने हमेशा झुके रहने को बाध्य कर रहे हैं
हैरानी होती है उनपर जो अरब देशों में हिंदुस्तान के सामानों पर बैन को अपनी जीत मान रहे हैं.. नुक़सान दोनों का है किसी एक का नहीं। हुज़ूर की शान में ग़ुस्ताख़ी न-बर्दाश्त-ए-काबिल है लेकिन यही भावना हिंदुओं के भगवानों पर लागू क्यों नही���..इज़्ज़त देंगे तब पाएँगे भी।बात कड़वी लगेगी
कुछ स्टेट में आयुष मंत्रालय सही काम कर रहा है किंतु केंद्र में आयुष मंत्रालय की सच में बहुत बुरी हालत है इनका अपने कर्मचारियों के भविष्य से कोई लेना देना नहीं है
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