अगर लोग ट्रैफिक चालान नहीं भर रहे हैं तो उसे उनके बिजली के बिल में जोड़ दो तब तो उन्हें भरना ही पड़ेगा।
~ भारत के मुख्य न्यायाधीश का बयान🤔🤔
इनके इस बयान से किसी को कोई आपत्ति नहीं है अगर👇
> न्यायपालिका पर भी यही नियम लागू हो तो 1 साल से ज्यादा पेंडिंग केस पर हर साल ₹50,000 का जुर्माना लगाया जाय।
> जज समय पर केस का निपटारा नहीं कर रहा है तब हर महीने जज की सैलरी का कुछ हिस्सा पीड़ित परिवार को जाना चाहिए।
ये 2 शर्ते न्यायपालिका पर लागू कर दी जाय तो किसी भारतीय को किसी भी तरह का जुर्माना भरने में कोई दिक्कत नहीं होगीं
मेरी सुप्रीम कोर्ट से एक और उम्मीद है जिस तरह जनता से हर गलती का हिसाब लिया जा रहा है, उसी तरह जनता के नुकसान का हिसाब भी तय हो।
सड़क में गड्ढा मिले, खराब सड़क की वजह से accident हो, घंटों traffic में फँसकर fuel जले, घटिया construction कुछ महीनों में टूट जाए तो इसका जिम्मेदार कौन? उसकी भी वसूली क्या ठेकेदार और Company के बिजली बिल या Payment से काटेंगे?
माननीय Court से एक और अनुरोध है इतने सारे लंबित Case है कई लोग न्याय के इंतजार में है उसका भी कोई सुझाव का इंतजार रहेगा सालों से न्याय के लिए दबी file और Case का क्या होगा ?
> “मैं मनमोहन सिंह जैसा नहीं बनना चाहती…”
— निर्मला सीतारमण
डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार के दौरान शेयर बाजार ने 17% रिटर्न दिया था जबकि निर्मला सीतारमण और मोदी सरकार के कार्यकाल में रिटर्न नकारात्मक रहा है।
सच्चाई यह है कि मैडम निर्मला चाहें भी तो डॉ. मनमोहन सिंह जैसी नहीं बन सकती
एंकर मुझे मेरी विचारधारा बता रहे थे, इसलिए उन्हें उनकी विचारधारा याद दिलाना ज़रूरी था!
गोदी मीडिया तो सिर्फ़ दो शब्द ही समझती है “पैसा-पैसा, मोदी-मोदी!”
प्रियंका भारती जी ने राधिका खेड़ा पर सर्जिकल स्ट्राइक कर दी।🔥
राधिका खेड़ा जब कांग्रेस में थी तब बुद्धि नही थी या बीजेपी में आने के बाद बुद्धि नहीं है।
राधिका खेड़ा बहुत अवसरवादी महिला है जहां से मतलब होगा वहां चली जाएगी. कल को चिराग पासवान की पार्टी में भी जा सकते है।
जिन लोगों ने चुनाव आयोग का पर्चा लेकर भागना शुरु किया था कि जवाब आ गया, जवाब आ गया, उन्हें यह रिपोर्ट पढ़नी चाहिए। आयोग ने अनेक ऐसे कांड किए हैं। अब उन्हें आगे बढ़ कर सच बोलना चाहिये कि चुनावों में क्या हुआ और इसका फ़ायदा किसे पहुँचा है।
@News18India वालों भांग खाकर बैठे हो क्या?
Nidhi Tiwari नाम की Social Media Influencer की suicide की खबर में मेरी फोटो चला दी
कम से कम खबर चलाने से पहले ये तो verify तो कर लिया करो कि जिस इंसान की फोटो लगा रहे हो वो वही है भी या नहीं
🚨ब्रेकिंग: मतदाता सूची से जुड़े आरोपों पर एक सवाल पूछा गया और ज्ञानेश कुमार बस वहां से चले गए।
न कोई जवाब। न कोई जवाबदेही। बस सवालों से बचकर निकल गए।
अगर चुनाव आयोग के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो उसके प्रमुख सवालों से क्यों बच रहे हैं?
प्रेस का सामना कीजिए।
तथ्यों का सामना कीजिए।
सच्चाई का सामना कीजिए।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत कह रहे हैं कि "उप चुनाव ही तो है". मताधिकार को सुप्रीम कोर्ट इतने हल्के में ले रहा है? इसी मताधिकार के लिये आज़ादी की लड़ाई लड़ी गई थी.
लो हो गया खेला, खेल गई Telecom Companies 😃
TRAI ने आदेश दिया कि 30 दिन का रिचार्ज लेकर आइये और इन्होंने खेला कर दिया।
28 दिन का रिचार्ज: 349 रुपए
30 दिन का रिचार्ज: 379 रूपये
जनता को उम्मीद थी कि उन्हें 28 दिनों वाले रिचार्ज में 30 दिनों का रिचार्ज मिलेगा मगर
Telecom Companies ने 28 दिन वाले Plan को रखते हुए एक नया 379 रूपये का रिचार्ज जोड़ दिया।
अब यदि आपको 30 दिन वाला रिचार्ज लेना है तो आपको 30 रुपए अतिरिक्त देने पड़ेंगे😃😂
मुमताज पटेल गुजरात में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शांतिपूर्वक प्रोटेस्ट कर रही थीं उसके बाद देखिए कैसे एक पुलिसवाला उन्हें पकड़कर ले जा रहा है क्या एक मेल पुलिसकर्मी एक महिला को इस तरह पकड़ सकता है❓
पाकिस्तान में चुनाव आयुक्त की बिटिया रानी ने एक निर्दोष को जेल भिजवा दिया.
बाद में बिटिया रानी का केस पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां बिटिया रानी को VIP ट्रीटमेंट मिला.
बिटिया रानी को उसकी पसंद का जज मिला, सुनवाई का ऑडियो म्यूट कर दिया गया. बिटिया रानी के पक्ष में आदेश भी आया.
मतलब फुल स्पेशल ट्रीटमेंट, वो भी पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में.
अच्छा है भारत में ऐसा नहीं होता, अपने यहां लोकतंत्र है, सिस्टम अभी भी सबके लिए बराबर है.
इसलिए कहता हूं - लोकतंत्र जरूरी है. वरना हमारा हाल भी पाकिस्तान जैसा हो जाएगा - जहां कोर्ट से लेकर चुनाव आयोग तक, सब बिक चुके हैं.
ये गाली गलोज़ भरा वीडियो देखा, USA की एक शॉप का बताया जा रहा है। मैं भद्दी गालियाँ सुनके स्क्रॉल करने वाला था, लेकिन इन गालियों के बीच में एक हिस्सा वो आया जो आपकी समझ को और बढ़ा देगा, भद्दी अश्लील गालियों के बीच में भारतीयों का काला और घाटिया सच भी आपको दिखेगा।
दो विदेश में बसे भारतीय जिसमे एक महिला और पुरुष, पहले इंग्लिश में गालियाँ दे रहे थे, उसके बाद पंजाबी और हिंदी में गालियाँ देनी शुरू कर दी। लेकिन आख़िरी में इनको तसल्ली तब मिली जब इन्होंने एक दूसरे को “चमारी और चुहड़ा” बोला। तब जाकर इनकी भड़ास पूरी हुई। ये मानसिकता आपके कपड़े, आपकी भाषा और आपका देश कुछ भी बदल जाने से नहीं बदलती। 👇👇🤮