रेलवे की भर्ती प्रक्रिया युवाओं के लिए मज़ाक बन चुकी है। ALP भर्ती 2 साल से अटकी है, रिज़ल्ट अभी तक जारी नहीं हुआ है। यह लाखों छात्रों की मेहनत और भविष्य के साथ सबसे बड़ा अन्याय है। #Release_ALP_2024_Final_Result
एक सेलिब्रिटी की जान जितनी कीमती है, उतनी ही एक आम नागरिक की भी है। आज़ादी के 75 साल बाद भी भीड़ में लोग मर जाते हैं, और नेता-सेलेब्रिटी एसी गाड़ियों में सुरक्षित निकल जाते हैं। सपने बेचने वाले आते हैं, लोग उन्हें भगवान बना लेते हैं। लेकिन हा���से के बाद कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेता।
एक सेलिब्रिटी की जान जितनी कीम���ी है, उतनी ही एक आम नागरिक की भी है। आज़ादी के 75 साल बाद भी भीड़ में लोग मर जाते हैं, और नेता-सेलेब्रिटी एसी गाड़ियों में सुरक्षित निकल जाते हैं। सपने बेचने वाले आते हैं, लोग उन्हें भगवान बना लेते हैं। लेकिन हादसे के बाद कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेता।
बड़ी कंपनियां पहाड़ों को तोड़कर मुनाफा कमा लेती हैं, लेकिन बाढ़ और लैंडस्लाइड की मार आम लोगों को झेलनी पड़ती है। सोनम वांगचुक जैसे साहसी लोग इस सच्चाई को सामने लाते हैं, इसीलिए सरकार ने उन्हें जेल में डाला है।
अगर आज शांतिपूर्ण आंदोलन को भी 'राष्ट्रीय सुरक्षा' का बहाना बनाकर कुचल दिया जा रहा है, तो यह लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला है। यह सवाल उठाना लाज़मी है कि क्या अब सरकार के लिए सच बोलना ही सबसे बड़ा अपराध बन चुका है? लद्दाख की धरती और वहां की जनता की आवाज़ को बंदूक, जेल या डर से दबाया नहीं जा सकता। आदिवासी और पहाड़ी समुदायों की आवाज़, जो सदियों से अपनी ज़मीन, जंगल और संस्कृति की रक्षा के लिए संघर्षरत रहे हैं, उन्हें चुप कराना असंभव है। सोनम वांगचुक जैसे लोग, जो शिक्षा, पर्यावरण और सामाजिक न्याय की बात करते हैं, उन्हें देशभक्त की बजाय गुनहगार ठहराना न केवल शर्मनाक है बल्कि सत्ता के डर और असुरक्षा को भी उजागर करता है। असली खतरा यह नहीं कि लोग आवाज़ उठा रहे हैं, बल्कि यह है कि सरकार सुनने से इंकार कर चुकी है।
मैं गांव में फसलों की कटाई के काम में व्यस्त हूं, और मौसम भी खराब चल रहा है। फिर भी, मैं चाहता हूं कि आप सभी जयपुर में इस प्रदर्शन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।
मैं गांव में फसलों की कटाई के काम में व्यस्त हूं, और मौसम भी खराब चल रहा है। फिर भी, मैं चाहता हूं कि आप सभी जयपुर में इस प्रदर्शन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।
मैं काफी समय से करौली, हिंडौन और गंगापुर सिटी में बढ़ते नशाखोरी, अवैध बजरी खनन और अपराध की जानकारी लगातार पुलिस अधिकारियों तक पहुंचाता रहा हूं, लेकिन इस पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। पहली बार ऐसा हुआ है कि नवनियुक्त आईजी साहब कैलाश चन्द्र विश्नोई जी ने स्वयं संज्ञान लेकर इन गंभीर मामलों पर ध्यान दिया है। यह कदम आम जनता के लिए राहत और विश्वास पैदा करने वाला है। इसके लिए मैं हृदय से उनका आभार और धन्यवाद व्यक्त करता हूं।
@kcbishnoiips
मैं काफी समय से करौली, हिंडौन और गंगापुर सिटी में बढ़ते नशाखोरी, अवैध बजरी खनन और अपराध की जानकारी लगातार पुलिस अधिकारियों तक पहुंचाता रहा हूं, लेकिन इस पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। पहली बार ऐसा हुआ है कि नवनियुक्त आईजी साहब कैलाश चन्द्र विश्नोई जी ने स्वयं संज्ञान लेकर इन गंभीर मामलों पर ध्यान दिया ह���। यह कदम आम जनता के लिए राहत और विश्वास पैदा करने वाला है। इसके लिए मैं हृदय से उनका आभार और धन्यवाद व्यक्त करता हूं।
@kcbishnoiips
इस देश में सबसे आसान काम है एक आदिवासी को नक्सली या देशविरोधी ठहरा देना। पर सच यही है कि आदिवासी हमेशा अपनी मि���्टी, जंगल, संस्कृति और पर्यावरण की रक्षा में खड़े रहे हैं। उनका संघर्ष कभी दबाया नहीं जा सकता।
इस देश में सबसे आसान काम है एक आदिवासी को नक्सली या देशविरोधी ठहरा देना। पर सच यही है कि आदिवासी हमेशा अपनी मिट्टी, जंगल, संस्कृति और पर्यावरण की रक्षा में खड़े रहे हैं। उनका संघर्ष कभी दबाया नहीं जा सकता।