राजस्थान के कुशल नेतृत्वकर्ता, जननायक राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री एवं सरदारपुरा से विधायक श्री अशोक गहलोत जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं मंगलमय शुभकामनाएं।
जनसेवा के प्रति आपका अटूट समर्पण और प्रदेश के विकास में आपका अविस्मरणीय योगदान रहा है। मैं ईश्वर से आपके स्वस्थ, सुदीर्घ एवं यशस्वी जीवन की मंगलकामना करता हूँ।
@ashokgehlot51 Ji
आज मैं अपनी प्रोफाइल पिक्चर (DP) बदलकर #SaveAravalli अभियान का हिस्सा बन रहा हूँ। यह सिर्फ एक फोटो नहीं, एक विरोध है उस नई परिभाषा के खिलाफ जिसके तहत 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों को 'अरावली' मानने से इंकार क��या जा रहा है। मेरा आपसे अनुरोध है कि अपनी प्रोफाइल पिक्चर बदलकर इस अभियान से जुड़ें:
अरावली के संरक्षण को लेकर आए इन बदलावों ने ��त्तर भारत के भविष्य पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यह निर्णय हमारे अस्तित्व के लिए खतरनाक है क्योंकि:
1️⃣ मरुस्थल एवं लू के खिलाफ दीवार: अरावली कोई मामूली पहाड़ नहीं, बल्कि कुदरत की बनाई 'ग्रीन वॉल' (Green Wall) है। यह थार रेगिस्तान की रेत और गर्म हवाओं (लू) को दिल्ली, हरियाणा और यूपी के उपजाऊ मैदानों की ओर बढ़ने से रोकती है। अगर छोटी पहाड़ियाँ (Gaping Areas) खनन के लिए खुल गईं, तो रेगिस्तान हमारे दरवाज़े तक आ ��ाएगा और गर्म हवाएं तापमान को बढ़ा देंगी।
2️⃣ प्रदूषण से रक्षा: ये पहाड़ियाँ और यहाँ के जंगल NCR और आसपास के शहरों के 'फेफड़ों' (Lungs) की तरह काम करते हैं। ये धूल भरी आंधियों (Dust Storms) को रोकते हैं और जानलेवा प्रदूषण को कम करने में सबसे बड़ी भूमिका निभा��े हैं। दिल्ली और आसपास के इलाके में अरावली के बावजूद इतनी गंभीर स्थिति है तो अरावली के बिना कैसी स्थिति होगी, उसकी कल्पना करना भी वीभत्स है।
3️⃣ भूजल (Groundwater): अरावली हमारे लिए पानी का मुख्य रिचार्ज ज़ोन है। अरावली की चट्टानें बारिश के पानी को ज़मीन के भीतर भेजकर भूजल रिचार्ज करती हैं। अगर पहाड़ खत्म हुए, तो भविष्य में पीने के पानी की गंभीर कमी का सामना करना पड़ेगा,जिससे वन्यजीव लुप्त होने की क��ार पर आ जाएंगे तथा इकोलॉजी को खतरा होगा।
वैज्ञानिक सच यह है कि अरावली एक निरंतर शृंखला (Continuous Chain) है। इसकी छोटी पहाड़ियाँ भी उतनी ही अहम हैं जितनी बड़ी चोटियाँ। अगर दीवार में एक भी ईंट कम हुई, तो सुरक्षा टूट जाएगी।
📢 हमारी अपील:
हम केंद्र सरकार और माननीय सुप्रीम कोर्ट से विनम्र निवेदन करते हैं कि भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए इस परिभाषा पर पुनर्विचार (Reconsider) करें। अरावली को 'फीते' या 'ऊंचाई' से नहीं, बल्कि इसके 'पर्यावरणीय योगदान' (Ecological Impact) से आंका जाए।
#SaveAravalli
@arvindchotia हवाई परिवहन की स्थिति देखकर अब बोलने को कुछ बचा नहीं है । चार हज़ार के टिकट के लाख रुपए माँ��� रहे हैं और वो भी देश की राजधानी में ।सरकार वहाँ है, न्यायालय वहाँ है ।
व्यवस्थाएं पूरी तरह से चरमरा गई है । लाखों लोग पिछले तीन दिन से परेशान है।पर तलब करेगा कौन???? एक बड़ा मौन, सब मौन
@ashokgehlot51 महान समाज सुधारक, विचारक, लेखक, महिला शिक्षा व सशक्तिकरण के लिए सदैव समर्पित महात्मा ज्योतिबा फुले जी की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि🙏
#JyotibaPhule