अपराधी को साधु/संत के वेश में दिखाना और फिर भगवाधारी का उपहास उड़ाना राजनीतिक दलों को महँगा पड़ सकता है। भगवा किसी राजनीति का नहीं बल्कि श्रद्धा का प्रतीक है। जनता की श्रद्धा भावना से मत खेलो ।
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इन झूठों ठगों मक्कारों को तानाशाह का अर्थ नहीं मालूम....
ये चार लोग यूट्यूब पर अपने अपने चैनलों पर कुल मिलाकर 51 हजार से अधिक वीडियो बनाकर डाल चुके हैं। लेकिन ताज्जुब यह है कि आजतक उन 51 हजार से अधिक इनके वीडियोज में एक भी वीडियो प्रधानमंत्री मोदी के कार्यों की प्रशंसा का नहीं है। बल्कि शत प्रतिशत वीडियो मोदी के प्रति ���त्यंत जहरीले विश्लेषणों से भरे हुए हैं। लेकिन मेरी शिकायत यह भी नहीं है, बिल्कुल नहीं है।
मेरी शिकायत इनकी प्रचंड बेशर्मी और प्रचंड बेईमानी से है क्योंकि यह चौकड़ी जबसे यूट्यूब पर सक्रिय हुई है तब से रोजाना लगातार यही हुड़दंग हल्ला और मोदी विरोधी नंगनाच कर रही है कि, मोदी सरकार ने अभिव्यक्ति की आजादी की हत्या कर दी है। मोदी और उनकी सरकार की आलोचना, उसके खिलाफ बोलने पर प्रतिबंध है।
प्रधानमंत्री मोदी सबसे बड़ा तानाशाह है। देश में अघोषित आपातकाल च��� रहा है।
अतः यह कितने निर्लज्ज और झूठे हैं यह सच तो इन चारों के 51 हजार वीडियो स्वयं बता रहे हैं साथ ही साथ इनके लगभग 2 दर्जन अन्य पिछलग्गू चमचो के यूट्यूब चैनलों पर लगभग एक लाख और वीडियो भी इस गिरोह के झूठ फरेब मक्कारी की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
पत्रकार के भेष में सक्रिय इन झूठों मक्कारों ठगों की इन करतूतों को नंगा करते हुए इनको बस इतना बताना ह��ं कि, तानाशाह शासक ने जब आपातकाल लगाया था तब देश के 50 से अधिक संपादक और देश के 300 बड़े और चर्चित पत्रकार 19 महीनों के लिए जेल में डाल दिए गए थे।
3,801 अखबारों/पत्रिकाओं के डिक्लेरेशन (पंजीकरण) रद्द कर दिया गया था।
सरकार का रुख न मानने वाले 3,801 समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के प्रकाशन संबंधी डिक्लेरेशन रद्द या जब्त कर लिए गए थे।
सरकार का विरोध करने वाले लगभग 300 अखबारों और पत्रिकाओं के सरकारी विज्ञापन प���री तरह रोक दिए गए थे, ताकि उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर किया जा सके।
65 विदेशी संवाददाताओं को देश छोड़ने का हुक्म सुनाया गया और 29 विदेशी संवाददाताओं के भारत में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
दिल्ली और अन्य जगहों पर काम करने वाले 50 से अधिक पत्रकारों, पत्रकारों/कार्टूनिस्टों और फोटोग्राफरों की आधिकारिक सरकारी मान्यता (Accreditation) रद्द कर दी गई थी।
आज से ठीक 7 साल पहले देश नहीं दुनिया के दिग्गज वकील हरीश साल्वे ने ब���ाया था कि, वो मई 2014 में ही बता चुके हैं कि, 44 सीटों पर सिमट चुकी कांग्रेस कोर्ट के जरिए शासन करने की कोशिश करेगी, भले ही मोदी सरकार के पास बहुमत हो। वो सरकार को अस्थिर करने, उसे गिराने की कोशिश करेगी।
देश के सबसे काबिल वकील ने 7 साल पहले जो कहा था वही सिलसिला लगातार चल रहा है, अब वो सिलसिला अपनी सारी नंगई नीचता और धूर्तता के साथ चरम पर पहुंच चुका है। हालत बहुत बदतर हो चुके हैं। देश को दां�� पर लगाने तक पहुंच चुका है। कठोर इलाज की आवश्यकता आज अनिवार्य हो चुकी है।
कश्मीर को छोड़कर शेष भारत में...
कांग्रेस के दस साल में 1200 से अधिक नागरिक पुलिस फायरिंग में मौत के घाट उतारे गए। यानि औसतन 120 नागरिक प्रत्येक वर्ष पुलिस के द्वारा मौत के घाट उतारे गए।
जबकि मोदी के 12 वर्षों भाजपा शासनकाल मे मात्र 230 नागरिकों की मृत्यु हुई। यानि औसतन 19 नागरिक प्रत्येक वर्ष पुलिस फायरिंग मे मारे गए।
मोदी शासनकाल से 6 गुना अधिक नागरिकों को पुलिस की बंदूकों और गोलियों से मौत के घाट उतारने वाली कांग्रेस और उसके पिछलग्गू आज एक सिपाही के हाथ में पेलेट गन और AK 47 देखकर आगबबूला होने का ढोंग पाखंड निर्लज्जता के साथ कर रहे हैं।
इन काक्रोची गुंडों का कहना है कि, देश की संसद को काक्रोची गुंडों लफंगों आतंकियो के हमले से बचाने में गम्भीर रूप से घायल हुए 120 पुलिसकर्मियों और 12 आईपीएस अधिकारियों को बर्खास्त कर के जेल भेजो और उनको घायल करने वाले गुंडों लफंगों आतंकियो के खिलाफ़ दर्ज सभी केस/FIR वापस करो।
वरना हम दोबारा संसद पर हमला करने फिर आयेंगें।
The Punjab government brutally lathi-charged elderly SC sanitation workers simply for demanding their unpaid salaries.
This is how the AAP government treats SC workers who have spent years keeping Punjab clean.
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राजधानी दिल्ली समेत पूरे देश के सामने कितनी बेशर्मी से बेखौफ होकर कितना घिनौना झूठ बोल रहा था अधेड़, यह भी जानिए।
NEET परीक्षा देने वाले 22 लाख से अधिक बच्चों से फीस के रूप में लगभग 342 करोड़ प्लस जीएसटी यानि कुल लगभग 410 करोड़ रुपए फीस ली गयी।
लेकिन अधेड़ आज बेशर्मी से यह बता रहा कि, बच्चों से सरकार NEET की फीस के नाम पर 1.32 लाख करोड़ रुपये वसूलती है।
उसके इस बेईमान झूठ को भक्तिभाव से सुनती रही दिल्ली की तथाकथित नेशनल मीडिया। किसी ने अधेड़ के इ�� सरासर बेशर्म राजनीतिक ��ूठ फ़रेब मक्कारी पर कोई सवाल नहीं पूछा।
लेकिन "गोदी मीडिया" किसे कहा जाता है सब जानते हैं।
जंतर मंतर पर जिहादी लौंडों के साथ हंसते इठलाते मटकते हुए देश के 76 बरस के प्रधानमंत्री को धुआंधार मां बहन की अश्लीलतम गालियां बक रहीं दर्जनों रंडियों में केवल देश के बेशर्म न्यूजचैनलों के एंकरों एडिटरों और रिपोर्��रों तथा राजनीतिक भड़वो दल्लों को ही बच्चे नज़र आ रहे हैं। हो भी सकता है कि उनके बच्चे यही काम करते हों, वो खुद भी अपनी बहन बेटियां से यही काम करवाते हों। इसीलिए उनको उन गालीबाज रंडियों में बच्चे नज़र आ रहे हैं।
वैसे इतना और जान लीजिए कि 20 जुलाई से दिल्ली की सड़कों पर रात में घूमकर ग्राहक ढूंढ़ने वाली रंडियों की संख्या में भारी कमी देखी जा रही है क्योंकि उनमें से ज्यादातर को भारी रकमें देकर जंत��� मंतर के लिए बुक किया गया है। यह भी एक खबर है चटपटी और सनसनीखेज खबर है। लेकिन इस खबर को कोई न्यूजचैनल ना बता रहा है ना दिखा रहा था। क्योंकि यह उनका निजी मामला है, उनके एंकरों एडिटरों और रिपोर्टरों के बच्चें का मामला है।
लेकिन हम आप इस खबर को शेयर कॉपी पेस्ट कर के वॉट्सएप ट्विटर फेसबुक इंस्टाग्राम आदि पर इतना अधिक फैला दें कि इस खबर पर पर्दा डालने की न्यूजचैनलों की साज़��श ध्वस्त हो जाये।
पूरी तरह बेईमानी और पीत पत्रकारिता पर उतारू न्यूजचैनल दिल्ली के दंगाइयों को "बच्चे" कह कर संबोधित कर रहे हैं। लेकिन सैकड़ों वो वीडियो इन न्यूजचैनलों की निर्लज्जता और नंगई की धज्जियां उड़ा रहे हैं, जिनमें 18 से 48 साल की वेश्याएं, जंतर मंतर स्थित काकरोचों के अस्थायी अड्डे पर देश के प्रधानमंत्री को मां बहन की गालियाँ जमकर बकते हुए दिख रही हैं। कई काकरोच अपने पैंट की जिप सरेआम खोलकर कौन सा इशारा क्यों कर रहे हैं, संभवतः यह न्यूजचैनलों को भ��ीभांति समझ भी आ रहा है और अच्छा भी लग रहा है। इसीलिए ऐसा कुकर्म करने वालों को न्यूजचैनलों के अंधे बहरे रिपोर्टर "बच्चा" कह कर बुला रहे हैं।
अतीक अहमद की मौत का बदला लेंगे समाजवादी...
ये लोग देश के गद्दारों की मौत का बदला लेंगे।
सोचिए कि, देश के असली दुश्मन कौन हैं.?
हमको आपको, जनता को यह जानना जरूरी हे
है।
"हम लोग वक्त का इंतज़ार कर रहे है, ज��सने अतीक अहमद को मारा है वो बचेंगे नहीं"
यह कहना है अखिलेश यादव के चाचा और राज्यसभा सदस्य राम गोपाल यादव का
काव्या मारन के नेतृत्व वाले सन टीवी नेटवर्क की सनराइजर्स लीड्स द्वारा द हंड्रेड नीलामी में पाकिस्तानी स्पिनर अबरार अहमद को साइन करने से भारत में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस पर दिग्गज क्रिकेटर और पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पूर्व कप्तान ने क��ा कि भारतीय स्वामित्व वाली फ्रेंचाइजी को पाकिस्तानी खिलाड़ियों को साइन करने से बचना चाहिए, क्योंकि इस तरह के भुगतान अप्रत्यक्ष रूप से भारत के खिलाफ नुकसान पहुंचाने में योगदान दे सकते हैं।
मिड-डे में अपने कॉलम में लिखते हुए गावस्कर ने कहा कि 2008 के मुंबई हमलों के बाद से भारतीय क्रिकेट द्वारा अपनाए गए लंबे समय से चले आ रहे रुख को देखते हुए यह आक्रोश समझ में आता है, जिसके बाद पाकिस्तानी खिलाड़��यों को इंडियन प्रीमियर लीग से प्रभावी रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया था। गावस्कर ने लिखा, "द हंड्रेड में एक फ्रेंचाइजी के भारतीय मालिक द्वारा एक पाकिस्तानी खिलाड़ी को खरीदने पर मचा हंगामा कोई आश्चर्य की बात नहीं है।"
उन्होंने तर्क दिया कि पाकिस्तानी खिलाड़ियों को किया गया भुगतान अंततः करों के माध्यम से उनकी सरकार के पास वापस चला जाता है। उन्होंने कहा, "यह एहसास कि पाकिस्तानी खिलाड़ी को दी जाने वाली फीस, जिसके बदले में वह अपनी सरकार को आयकर देता है और उस प��से से हथियार खरीदे जाते हैं, अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय सैनिकों और नागरिकों की मौत में योगदान देती है, भारतीय संस्थाओं को पाकिस्तानी कलाकारों और खिलाड़ियों को अपने यहाँ शामिल करने पर विचार करने से भी रोक रहा है।"
गावस्कर ने आगे कहा कि चाहे भुगतान किसी भारतीय कंपनी से आए या किसी विदेशी सहायक कंपनी से, जिम्मेदारी फिर भी मालिक की ही होती है। उन्होंने लिखा, "अगर मालिक भारतीय है तो वह भारतीय खिला��़ियों के नुकसान में योगदान दे रहा है। बात इतनी ही सरल है।" उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या किसी फ्रेंचाइजी टूर्नामेंट में सफलता राष्ट्रीय भावना से अधिक महत्वपूर्ण है।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि प्रशंसक सार्वजनिक रूप से अपना गुस्सा जाहिर कर सकते हैं।
गावस्कर ने कहा, "यह कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी कि इस टीम द्वारा खेले जाने वाले हर मैच के लिए भारतीय प्रशंसकों द्वारा इस अविश्वसनीय खरीद के विरोध में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन होंगे," उन्होंने आगे कहा कि स्टार खिलाड़ियों की मौजूदगी के बावजूद दर्शक मैचों क�� बहिष्कार भी कर सकते हैं।
इस बीच, सनराइजर्स लीड्स के मुख्य कोच डेनियल वेटोरी ने इस फैसले का बचाव करते हुए इसे पूरी तरह से क्रिकेट से जुड़ा फैसला बताया। उन्होंने समझाया कि नीलामी में इंग्लैंड के लेग स्पिनर आदिल राशिद को हासिल करने में असफल रहने के बाद फ्रेंचाइजी ने अबरार को टीम में शामिल करने का कदम उठाया। वेटोरी के अनुसार, अबरार की गेंदबाजी में विविधता और पावरप्ले में तेजी से रन बनाने की क्���मता ने उन्हें एक आकर्षक विकल्प बना दिया, खासकर हेडिंगली में।
भारतीय क्रिकेट बोर्ड के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने यह भी कहा कि हम इसमें कुछ नहीं कर सकते।
ऐतिहासिक 300 अरब डॉलर का सौदा रिलायंस के साथ।
ट्रंप ने 50 वर्षों में पहली नई अमेरिकी तेल रिफाइनरी के निर्माण के लिए रिलायंस के निवेश की घोषणा की। टेक्सास के ब्राउनस्विले बंदरगाह पर प्रस्तावित इस परियोजना से ऊर्जा उत्पादन में वृद्ध�� होने और हजारों रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।
31 जुलाई 2025 को ट्रंप ने Truth Social पर पोस्ट लिखकर भारत और रूस की आलोचना करते हुए उन्हें डेड इकोनॉमी कहा।था। "I don’t care what India does with Russia. They can take their dead economies down together.”
आज वही ट्रंप बहुत गर्व और खुशी से एक भारतीय उद्योगपति के कसीदे इस तरह पढ़ रहा है...
"अमेरिका ऊर्जा क्षेत्र में वास्तविक प्रभु��्व की ओर लौट रहा है! आज मुझे यह घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है कि अमेरिका फर्स्ट रिफाइनिंग, टेक्सास के ब्राउनस्विले में 50 वर्षों में पहली नई अमेरिकी तेल रिफाइनरी खोल रही है। यह एक ऐतिहासिक 300 अरब डॉलर का सौदा है - अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़ा सौदा, अमेरिकी श्रमिकों, ऊर्जा क्षेत्र और दक्षिण टेक्सास के महान लोगों के लिए एक बड़ी जीत! इस विशाल निवेश के लिए भारत में हमारे साझेदारों और उनकी सबसे बड़ी निजी ऊर्जा कंपनी, रिलायंस को धन्यवाद। हमारी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति, परमिट प्रक्रिया को सरल बनाने और करों को कम करने के कारण ही अरबों डॉलर के सौदे हमारे देश में वापस आ रहे हैं। ब्राउनस्विले बंदरगाह पर नई रिफाइनरी अमेरिकी बाजारों को बढ़ावा देगी, हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करेगी, अमेरिकी ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाएगी, अरबों डॉलर का आर्थिक प्रभाव डालेगी और दुनिया की सबसे स्वच्छ रिफाइनरी होगी। इससे वैश्विक निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और इस क्षेत्र में हजारों रोजगार और विकास के अवसर पैदा होंगे, जो इसके लिए पूरी तरह से योग्य है। अमेरिकी ऊर्जा प्रभुत्व का यही स्वरूप है। अमेरिका सर्वोपरि!"
देश को अपमानित करने की अपनी असफल साजिश पर बेशर्मी से इतरा रहा है अधेड़...
"एआई समिट का नाम सुना है? यूथ कांग्रेस वालों ने काम कर दिया है।" यह वीडियो देखना न भूलें। इस वीडियो में राहुल गांधी खुलेआम दिखा रहा है कि कैसे उनके कार्यकर्ताओं ने एआई समिट में विदेशी प्रतिनिधियों के सामने भारत की छवि खराब करने की कोशिश की। यह इस बात की याद दिलाता है कि किसी भी कांग्रेसी द्वारा किया गया भारत विरोधी हर कृत्य आकस्मिक नहीं है, बल्कि राहुल गांधी का सीधा आदेश है।