अब टीबी देखभाल हुई और ���ी आसान, पारदर्शी और डिजिटल!
#TBMuktBharat App के माध्यम से
निःक्षय मित्र, वॉलंटियर्स, जिला प्रशासन और मरीज — सभी एक ही प्लेटफॉर्म पर जुड़कर टीबी मुक्त भारत अभियान को दे रहे हैं नई गति।
आज ही ऐप ड��उनलोड करें और जनभागीदारी से बनाएं स्वस्थ भारत।
#TBMuktBharat
मध्यप्रदेश में भर्ती परीक्षाओं को लेकर फिर वही सवाल खड़े हो रहे हैं—क्या व्यवस्था सच में पारदर्शी है या सिर्फ नाम बदलने से काम ��लाया जा रहा है? मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (पूर्व व्यापम) की वन रक्षक भर्ती में नोटिफिकेशन में ST अभ्यर्थियों के लिए 250 + 60 रुपए फीस तय बताई गई, लेकिन ऑनलाइन आवेदन के दौरान 560 रुपए मांगे जा रहे हैं। यह सीधा-सीधा विरोधाभास है, जो अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब विधानसभा चुनाव के दौरान वन टाइम एग्जाम फीस का वादा किया गया था, तो फिर हर परीक्षा में अलग-अलग शुल्क क्यों वसूला जा रहा है? क्या यह वादा सिर्फ चुनावी भाषण तक सीमित था?
गरीब, आदिवासी और ग्रामीण युवाओं के लिए 300-400 रुपए भी मायने रखते हैं। भर्ती की तैयारी कर रहे युवा पहले ही बेरोजगारी और संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं, ऊपर से इस तरह की छिपी हुई फीस उनकी उम्मीदों पर चोट है।
मैं मप्र सरकार से मांग करता हूं कि इस फीस विसंगति की तत्काल जांच कर सही शुल्क लागू किया जाए, अतिरिक्त राशि वापस की जाए और वन टाइम एग्जाम फीस के वादे को जमीन पर लागू किया जाए, ताकि भर्ती प्रक्रिया भरोसेमंद बन सके।
सरकार का कहना है कि वो जनता के लिए लड़ती है जनता के हित में काम करती है ,
फिर जनता को सरकार के खिलाफ आवाज क्यों उठाना पड़ रही है क्यों सड़कों पर उतरना पड़ रहा है या तोह सरकार वो सब नहीं कर रही जो वो बोल रही है।
21वीं सदी डॉ. बाबा साहब अंबेडकर, बिरसा मुंडा और ज्योतिराव फुले के विचारों और संघर्ष की सदी है। समानता, न्याय और हक़ की लड़ाई अब और तेज़ होगी। नमन बाबा साहब।
https://t.co/xxTdOLkZo3
राघव चड्ढा जैसे 10-15 सांसद लोकसभा और राज्यसभा में भेज दिए जाएँ…
जो आम लोगों के बीच के मुद्दे लगातार सदन के पटल पर रखते रहे…
और सोशल मीडिया पर इनके बारे मे ज़्यादा से ज़्यादा बातें होती रहे…
तो सरकार चाहे कोई भी हो…
उसे इन मुद्दों को Solve करना ही पड़ेगा…
भारत के लोग टेलीकॉम कंपनियों से कितना परेशान है 🤑 इसका अंदाजा इस पोस्ट से लगाया जा सकता है 👇👇
ये पोस्ट रुकने का नाम नहीं ले रहा है और लोग अपनी प्रतिक्रिया दे रहे है ❓
वास्तव में सरकार को इसमें सुधार की जरूरत है?
क्या सुधार होने चाहिए जरूर बताएं ⁉️
मध्य प्रदेश में बड़वानी की DM जयती सिंह ने कहा –
"शादियों में इंडक्शन चूल्हा, डीजल भट्टी का उपयोग कर सकते हैं। ज्यादा ईंधन खर्च वाले रोटी, प��ा��े की जगह कुछ और खा सकते हैं"
बाकी गैस की कोई दिक्कत नहीं है...
@madanmohansoni
कमेंट करके बताएं, क्या आप भी चाहते है जीरो बैलेंस पर इनकमिंग कॉल 🤙 बंद ना हो?
राघव चड्ढा की इस बुलंद आवाज को क्या आप भी सपोर्ट करत��� हैं 🤔
.
.
#RaghavChadha
#Airtel
#jio
#TELICOM
93 हज़ार सरकारी स्कूल बंद हो गए… लेकिन हम फिर भी दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था हैं।
सवाल यह नहीं कि स्कूल क्यों बंद हुए, सवाल यह है कि बच्चों को पढ़ाना अब ज़रूरी है भी या नहीं?
शायद नए भारत में डिग्री से ज़्यादा ज़रूरी है ‘डिजिटल सर्टिफिकेट’ और ‘जुमलों की यूनिवर्सिटी।’
वरना 93 हज़ार स्कूल बंद होने पर भी अगर सन्नाटा है, तो यह सिर्फ़ आंकड़ा नहीं… एक द��र की कहानी है।
follow @saltbylutyens
Today in Parliament, I raised concerns affecting India’s prepaid recharge customers, who account for nearly 90% of the country’s 125 crore mobile users.
(1)
If a recharge expires, stopping outgoing calls may be understandable. But why are incoming calls stopped as well? Once validity ends, people cannot be reached, and even essential messages like bank OTPs may not come through. In emergencies or urgent situations, this can leave a person completely cut off.
My demands: First is that incoming calls and SMS should continue for at least one year after the last recharge so essential communication does not stop. Second, a mobile number should not be deactivated for at least three years after the last recharge. Third, telecom operators should introduce a low cost “incoming only” plan for users who simply need their number to remain active for essential calls, OTPs and government services.
(2)
I also raised the issue of 28 day recharge “monthly” plans. If something is called monthly, it should follow the calendar month of 30–31 days. Because of the 28 day cycle, consumers effectively end up paying for 13 recharges in a year. (28 days × 13 recharges = 364 days)
Telecom Operators should sync up their Recharge Plans with the true calendar months, and not 28 day plans.
A mobile phone today is not a luxury. It is a lifeline.
Prepaid recharge customers deserve fairness and transparency. Not clever fine print.
Prepaid Recharge Customers के साथ हो रही लूट का मुद्दा आज मैंने Parliament में उठाया।
(a) अगर आपका recharge खत्म हो जाए तो Outgoing Calls बंद होना समझ में आता है, लेकिन Incoming Calls बंद करना मनमानी है।रिचार्ज खत्म होते ही न कोई आपसे संपर्क कर सकता है और न ही आपके फोन पर OTP जैसे जरूरी मैसेज आ पाते हैं। Emergency के हालातों में व्यक्ति बेसहारा हो जाता है।
(b) 28 दिन का Recharge plan एक scam है। साल में महीने 12 होते हैं लेकिन रिचार्ज 13 बार करवाना पड़ता है (28 days x 13 times = 364 days).
Recharge plan की वैधता calender months (30–31 दिन) के हिसाब से होनी चाहिए, क्योंकि 28 दिन के चक्कर में लोगों को साल भर में एक अतिरिक्त रिचार्ज करवाना पड़ता है।
मोबाइल आज के समय में Luxury नहीं, बल्कि आम नागरिक की Necessity बन चुका है।
इसलिए टेलीकॉम कंपनियों को उपभोक्ताओं के साथ Fair और Transparent रवैया रखना चाहिए।