कबीर जी ने कहा है:-
कबीर बेद मेरा भेद है, मैं ना बेदों माहीं।
जौण बेद से मैं मिलु, ये बेद जा��ते नाहीं।।
भावार्थ:- परमेश्वर कबीर बन्दी छोड़ जी ने कहा है कि जो चार वेद है ये मेरे विषय में ही ज्ञान बता रहे हैं परन्तु इन चारों वेदों में वर्णित विधि द्वारा मैं (पूर्ण ब्रह्म) प्राप्त नहीं हो सकता। जिस वेद (स्वसम अर्थात् सूक���ष्म वेद) में मेरी प्राप्ति का ज्ञान है। उस को चारों वेदों के ज्ञाता नहीं जानते।
#अनसुना_पाँचवाँ_वेद
चार वेद ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद को सभी जानते हैं लेकिन पाँचवाँ वेद "सूक्ष्मवेद" कौन सा है?
जानने के लिए पढ��िए पुस्तक "हिन्दू साहेबान नहीं समझे गीता, वेद, पुराण"
सूक्ष्म वेद
#अनसुना_पाँचवाँ_वेद
चार वेद ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद को सभी जानते हैं लेकिन पाँचवाँ वेद "सूक्ष्मवेद" कौन सा है?
जानने के लिए पढ़िए पुस्तक "हिन्दू साहेबा��� नहीं समझे गीता, वेद, पुराण"
सूक्ष्म वेद
वेद, गीता, पुराण, कुरआन आदि सभी सद्ग्रंथों में अधूरा ज्ञान है यही कारण है कि ये सभी सद्ग्रंथ हमें तत्त्वदर्शी संत की शरण में जाने के लिए संकेत करते हैं। जबकि पांचवें वेद "सूक्ष्मवेद" में अध्यात्म का सम्पूर्ण गया है।
#अनसुना_पाँचवाँ_वेद
सूक्ष्म वेद
वेद, गीता, पुराण, कुरआन आदि सभी सद्ग्रंथों में अधूरा ज्ञान है यही कारण है कि ये सभी सद्ग्रंथ हमें तत्त्वदर्शी संत की शरण में जाने के लिए संकेत करते हैं। जबकि पांचवें वेद "सूक्ष्मवेद" में अध्यात्म का सम्पूर्ण गया है।
#अनसुना_पाँचवाँ_वेद
सूक्ष्म वेद
#अनसुना_पाँचवाँ_वेद
पांचवें वेद "सूक्ष्मवेद" में कहा गया है:
कबीर, गंगा कांठै घर करें, पीवै निर्मल नीर।
मुक्ति नहीं सत्यनाम बिन, कह सच्च कबीर।।
कबीर, तीर्थ कर-कर जग मुआ, ऊडै़ पानी न्हाय।
सत्यनाम जपा नहीं, काल घसीटें जाय।।
सूक्ष्म वेद
#अनसुना_पाँचवाँ_वेद
पांचवें वेद "सूक्ष्मवेद" में कहा गया है:
कबीर, गंगा कांठै घर करें, पीवै निर्मल नीर।
मुक्ति नहीं सत्यनाम बिन, कह सच्च कबीर।।
कबीर, तीर्थ कर-कर जग मुआ, ऊडै़ पानी न्हाय।
सत्यनाम जपा नहीं, काल घसीटें जाय।।
सूक्ष्म वेद
#अनसुना_पाँचवाँ_वेद
पाँचवें वेद "सूक्ष्मवेद" में अध्यात्म का रहस्य युक्त सम्पूर्ण ज्ञान है। जो गीता, वेद, पुराणों सहित अन्य धर्मग्रंथों में भी नहीं है।
"स���क्ष्मवेद" के ज्ञान को जानने के लिए देखिए Sant Rampal Ji Maharaj Youtube Channel
सूक्ष्म वेद
#अनसुना_पाँचवाँ_वेद
पाँचवें वेद "सूक्ष्मवेद" में अध्यात्म का रहस्य युक्त सम्पूर्ण ज्ञान है। जो गीता, वेद, पुराणों सहित अन्य धर्मग्रंथों में भी नहीं है।
"सूक्ष्��वेद" के ज्ञान को जानने के लिए देखिए Sant Rampal Ji Maharaj Youtube Channel
सूक्ष्म वेद
#अनसुना_पाँचवाँ_वेद
सूक्ष्म वेद
वेद, गीता, पुराण, कुरआन आदि सभी सद्ग्रंथों में अधूरा ज्ञान है यही कारण है कि ये सभी सद्ग्रंथ हमें तत्त्वदर्शी संत की शरण में जाने के लिए संकेत करते हैं। जबकि पांचवें वेद "सूक्ष्मवेद" में अध्यात्म का सम्पूर्ण गया है।
ज��नने के लिए Sant Rampal Ji
#अनसुना_पाँचवाँ_वेद
गीता अ��्याय 4 श्लोक 34 में कहा है कि उस तत्वज्ञान यानी सूक्ष्मवेद के ज्ञान को तू तत्त्वदर्शी संतों के पास जाकर प्राप्त कर समझ ।
तो उस तत्वज्ञान अर्थात "सूक्ष्मवेद" के ज्ञान को जानने के लिए देखिए
सूक्ष्म वेद
#अनसुना_पाँचवाँ_वेद
पांचवें वेद "सूक्ष्मवेद" में कहा गया है:
कबीर, गंगा कांठै घर करें, पीवै निर्मल नीर।
मुक्ति नहीं सत्यनाम बिन, कह सच्च कबीर।।
कबीर, तीर्थ कर-कर जग मुआ, ऊडै़ पानी न्हाय।
सत्यनाम जपा नहीं, काल घसीटें जाय।।
सूक्ष्म वेद
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सूक्ष्म वेद
वेद, गीता, पुराण, कुरआन आदि सभी सद्ग्रंथों में अधूरा ज्ञान है यही कारण है कि ये सभी सद्ग्रंथ हमें तत्त्वदर्शी संत की शरण में जाने के लिए संकेत करते हैं। जबकि पांचवें वेद "सूक्ष्मवेद" में अध्यात्म का सम्पू���्ण गया है।
जानने के लिए Sant Rampal Ji
#अनसुना_पाँचवाँ_वेद
गीता अध्याय 4 श्लोक 34 में कहा है कि उस तत्वज्ञान यानी सूक्ष्मवेद के ज्ञान को तू तत्त्वदर्शी संतों के पास जाकर प्राप्त कर समझ ।
तो उस तत्वज्ञान अर्थात "सूक्ष्मवेद" के ज्ञान को जानने के लिए देखिए
सूक्ष्म वेद
#अनसुना_पाँचवाँ_वेद
पांचवें वेद "सूक्ष्मवेद" में कहा गया है:
कबीर, गंगा कांठै घर करें, पीवै निर्मल नीर।
मुक्ति नहीं सत्यनाम बिन, कह सच्च कबीर।।
कबीर, तीर्थ कर-कर जग मुआ, ऊडै़ पानी न्हाय।
सत्यनाम जपा नहीं, काल घसीटें जाय।।
सूक्ष्म वेद
गुरू संग ज्ञान गर्ब दिखावै।
कोटि जन्म शूकर (सूअर) के पावै।।
जो गुरू के सामने यह सिद्ध करने की कुचेष्टा करे कि मैं अधिक ज्ञानवान हूँ, वह करोड़ों जन्म सूअर के भोगता है।
गुरू संग ज्ञान गर्ब दिखावै।
कोटि जन्म शूकर (सूअर) के पावै।।
जो गुरू के सामने यह सिद्ध करने की कुचेष्टा करे कि मैं अधिक ज्ञानवान हूँ, वह करोड़ों जन्म सूअर के भोगता है।
@SaintRampalJiM