इस फ़रेबी दुष्टात्मा को मानव जाति का हिस्सा मानना बड़ी भूल होगी!
कैसे दहाड़ रहा है अन्ना हजारे और बाबा रामदेव के अनशन को लेकर जैसे इसका दिल फटा जा रहा हो उन आन्दोलनकारियों की तकलीफ़ देखकर! और अपने शासन काल में यह zee_no_cidal agenda चला रहा है!
इसको जितनी बददुआ दी जाए कम है!
Breaking news 🚨
नितिन गडकरी के दावे झूठे साबित हुये
Live test मे माइलेज में लगभग 35% की गिरावट
@cars24india ने 10 साल पुरानी, non-E20 compliant Swift Dzire पर E20 और शुद्ध पेट्रोल (E0) की टेस्टिंग की
26 sept 2025 को जैसे ही ये वीडियो वायरल होने लगा था , अचानक प्राइवेट कर दिया गया था
@tehseenp
“जो आज मेरी बेटी के साथ हुआ, मेरे साथ जो हुआ, वो किसी दूसरे के साथ ना हो…
मेरी बेटी के साथ और भी बच्चों ने अपनी जान दी है, उनके लिए श्रद्धांजलि का एक शब्द तक नहीं है?”
यह एक शोकाकुल पिता के शब्द नहीं, पूरे देश की अंतरात्मा की आवाज़ हैं। यह आवाज़ सड़कों से लेकर सदन तक गूंजनी चाहिए।
#ChhatronKiGoonj
अभिनय सर ने जलवा बिखेर दिया !
राहुल गाँधी के साथ देहरादून में उठाई छात्रों की आवाज !
NTA जैसी एजेंसियां अपनी गलती के लिए आपसे पैसे वसूलती है। हिंदुस्तान में 'पेपर लीक उद्योग' चल रहा है।
NEET पेपर लीक होता है तो BJP के लोग दलील देते हैं कि इसमें शिक्षा मंत्री की गलती नहीं, उन्होंने पेपर लीक नहीं किया- ये तो सिस्टम की कमी है।
अगर ऐसा है तो शिक्षा मंत्री की जरूरत ही क्या है?
जिन भाजपाइयों और उनके संगी-साथियों ने भगवान के ख़जाने में हाथ डालकर ‘धर्म-धन’ चुराने तक का दुस्साहस कर लिया, वो किसी पुजारी और इंसान का मान क्या करेंगे। बेहद निंदनीय!
वैधानिक कार्रवाई हो।
जो भाजपा का साथी, वो रामघाती!
#CC_to_CC
@sabeer In general “Character” has become extinct in this country or might be it never was there . People here not living like in a country rather different type of groups of people confined in a geographical boundary, just focused on their survival .
@sabeer Sir , For them this royal life upto 75-80 is better than miserable life upto 90 . Lying is their only quality . So what else they could have done in their alternate long miserable life .
Iranian woman making 5 kilo watt solar invertors but i wont consider them empowered until they make onlyfans to show their bodies for 3 Irani rials.. go naked in parades and have body count of 23 before they turn 18.
वैचारिकताओं के आग्रह-दुराग्रह के इस दौर में मुझे कमलेश्वर जी के उपन्यास 'कितने पाकिस्तान' की याद आ रही है। याद इसलिए भी कि जब वे इस उपन्यास को लिख रहे थे उस दौर में मैं उनके यहाँ खूब आता-जाता था। मैंने सुधीश पचौरी के निर्देशन में उत्तर-आधुनिकता पर शोध किया था। अब शोध जैसा भी किया हो उस समय के बड़े-बुजुर्ग लेखकों में उस समय उत्तर आधुनिकता का बड़ा आकर्षण था और वे उसके बारे में जानना-पढ़ना चाहते थे। मुझे याद है कमलेश्वर जी ने भी मुझसे कहा कि कुछ किताबें ला दो। उन दिनों डीयू के पास एक किताब की दुकान थी(आज भी है) जहां नई से नई किताब की फोटो प्रति बुक फॉर्म में कम कीमत पर उपलब्ध हो जाती थी। मैं वहीं से फ़ोटोस्टेट किताबों की प्रतियाँ वागीश शुक्ल, सुधीश पचौरी, मनोहर श्याम जोशी को पहुंचाया करता था। ये सब के सब बड़े पढ़ाकू थे। मुझे याद है कमलेश्वर जी को मैंने फ्रांसिस फुकुयामा की किताब 'एंड ऑफ हिस्ट्री एंड द लास्ट मैन' और अंबर्तो इको की किताब 'ट्रेवेल्स इन हाइपर रियलिटी' ले जाकर दी। उन्होने पढ़ी या नहीं यह मेरे जानने का क्षेत्र नहीं था। मैं तब तक बहुवचन का संपादक बन गया और काम में व्यस्त हो गया। बाद में जब कमलेश्वर जी का उपन्यास 'कितने पाकिस्तान' प्रकाशित हुआ तो उसकी धूम मच गई। वह सोशल मीडिया का जमाना नहीं था तब भी खूब चर्चा हुई उस उपन्यास की। लेकिन मुझे उस उपन्यास में बिखराव लगता था। कमलेश्वर जी मुझे सबसे सुगठित लेखक लगते थे। ऐसे कि उनको पढ़कर कहानी लिखनी सीखी जा सके। लेकिन 'कितने पाकिस्तान' में बिखराव था।
एक दिन मैंने उनसे पूछा कि आपके इस उपन्यास में बिखराव बहुत है। पुराने कमलेश्वर की झलक भी नहीं है इसमें। उन्होने चश्मे के अंदर से कुछ देर मुझे देखा और बोले। असल में मैं भारतीयता के अंतःसूत्रों की तलाश कर रहा था इस उपन्यास में। भारत हजारों साल से एक जीवंत सभ्यता के रूप में मौजूद है। उसकी वह ताकत क्या है। मुझे यह महसूस होने लगा है कि वैचारिकता, कट्टरता ने भारत की अखंड छवि को बिखेर दिया है। फिर रुककर बोले, फ्रांसिस फुकुयामा की किताब 'एंड ऑफ हिस्ट्री एंड द लास्ट मैन' किताब यह स्थापित करती है कि विचार के आधार पर स्थापित राष्ट्रों के पतन के बाद लिबरेल डेमोक्रेसी दुनिया भर में सबसे स्वीकार्य विचारधारा बन जाएगी। देखना, इस ग्लोबलाइज़ेशन के अंतिम दौर में राष्ट्रीयताओं का दौर शुरू होगा। तब तुम इस उपन्यास को पढ़ना और समझने की कोशिश करना कि राष्ट्र के रूप में भारत के जीवंत बने रहने के मूल तत्व क्या हैं! यह बिखराव का समय है। संगठित होने का दौर भी आएगा। अपने मौलिक स्वरूप को पहचानने का दौर।
मुझे याद आया जब 'कितने पाकिस्तान' उपन्यास आया था तब विश्व पुस्तक मेले में मैं उपन्यास लेकर कमलेश्वर जी से दस्तखत करवाने के लिए गया। उन्होने लिखा- 'प्रिय प्रभात के लिए, जिसे मैं इससे बेहतर और क्या दे सकता था!' दुर्भाग्य से मेरे एक अजीज मित्र के पास से वह प्रति घर शिफ्ट करने में खो गई!
उपन्यास मैंने दोबारा नहीं पढ़ा लेकिन आजकल बार बार याद आता है कि अपना अंतिम उपन्यास लिखते समय कमलेश्वर जी कितने भविष्यदर्शी हो गए थे!
POTUS is absolutely right. Whoever provides secure and safe passage of commercial vessels through the Strait of Hormuz should be compensated for this service.
Iran has always been the GUARDIAN of the Strait and will remain so FOREVER.
20% is of course too much. We will be fair