@LucknowSCR लखनऊ वाले भैया एक बात कहे हमारे कानपुर के भी ट्री पॉट में थूकना चाहते है लेकिन यहाँ किसी नेता मंत्री ने ट्री पॉट लगवाया ही नहीं है इसलिए क्या करें बेचारे सड़क पर ही थूकना पड़ता है मजबूरी समझो भैया।
@kanpursneed@nagarnigamknp@OfficialUPMetro ट्रांसपोर्ट नगर से नौबस्ता तक रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर बहुत ही गंदा है जब iit से मेट्रो का संचालन शुरू हुआ था तो उधर की रोड काफी अच्छी थी। जैसे लगता है दक्षिण की किस्मत में एल० लगे हुए है।
गडकरी जी,
इतना मजाक करना भी अच्छा नहीं होता।
अगर आप स��्चे हैं तो इसका मतलब है कि कानपुर के दोनों सांसद आपसे कुछ मानते ही नहीं!
और 2022 में जिस एलिवेटेड फ्लाईओवर का आप शिलान्यास कर गए थे उसपे पिछले 4 साल में 4 CM भी काम न हुआ।
तो फेंकने की भी 1 सीमा होती है, उसे मत लाँघिये।
लखनऊ के पड़ोस में होना ही क्या कानपुर की सबसे बड़ी सज़ा बन गया है? हर बड़ा प्रोजेक्ट राजधानी की झोली में, और कभी उत्तर प्रदेश की औद्योगिक रीढ़ रहा कानपुर सिर्फ़ उपेक्षा का शिकार। आखिर कब मिलेगा कानपुर को उसका हक़?#Kanpur#Development#UttarPradesh#MyYouthMyPride#NamaazwadiParty
महोदय संज्ञान ले एक केस्को कर्मचारी बिजली खंभे से काम करते समय करेंट लगने से ��चेत अवस्था में है
स्थान=बाबू पुरवा कॉलोनी दुर्गा दूध डेरी के पास kanpur
@kesco @UPPCLLKO
महोदय संज्ञान ले एक केस्को कर्मचारी बिजली खंभे से काम करते समय करेंट लगने से अचेत अवस्था में है
स्थान=बाबू पुरवा कॉलोनी दुर्गा दूध डेरी के पास kanpur
@kesco@UPPCLLKO
@JagoKanpurJago मॉल रोड की तरफ से लाया गया होगा फिर वी आई पी रोड से तिलकनगर होते हुए विश्विद्यालय ले गए होगे उधर विकसित कानपुर दिखा कर अधिकारियों ने वह वाही लूटी होगी और गड्ढे छुपा कर मेट्रो का निर्माण कार्य ��ता दिया होगा।
@kanpursneed भाई अधिकारियों ने नीचे और सामने देखने का मौका ही नहीं दिया होगा सीधे ऊपर मेट्रो दिखाते हुए लाये होगे। बीच में बता दिया होगा कि गोल चौराहा से रामादेवी तक फ्लाई ओवर का निर्माण होना है और जरीब चौकी आर ओ बी का शिलान्यास तो हो ही गया है इस लिए इस रूट पर अब पैसा लगाना ठीक नहीं होगा।
चुप्पी तोड़ो कानपुर!
लखनऊ और वाराणसी की तरह हमारे शहर को वो प्राथमिकता क्यों नहीं मिलती? इसका सबसे बड़ा कारण है हमारे स्थानीय नेताओं की रीढ़विहीन राजनीति। वे बड़ी पार्टी के नाम पर वोट तो ले आते हैं, लेकिन लखनऊ-दिल्ली के दरबार में कानपुर का हक मांगने की हिम्मत नहीं जुटा पाते।
जब तक हम जाति-धर्म और बड़ी पार्टियों के बड़े चेहरों के नाम पर चुपचाप वोट देते रहेंगे, हमारे साथ ऐसा ही सौतेला व्यवहार होता रहेगा।