सर आपका बहुत-बहुत धन्यवाद एक भी कॉकरोच को नहीं छोड़ना जिन लोगों ने हमारी आर्मी हमारे प्रधानमंत्री के खिलाफ अपशब्द कहे है उनसब पर कार्रवाई होनी चाहिए 🙏🏻
अगर इसके बाद भी हम लोग @AmitShah जी को ये लुच्चे नेता के कारण कमजोर समझते है तो हमारी मूर्खता है ।
“क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो
उसको क्या जो दंत हीन विषहीन विनीत सरल हो ”
अमित शाह जी उस सड़क छाप नेता को उत्तर क्यों दे ?
जबकि सदन में उसके लिए निशिकांत दुबे जैसे बेटे पर्याप्त है ?
@nishikant_dubey
आज अचानक मेरे टाइम लाइन पर यह पुरानी पोस्ट आ गई, सोचा याद दिला दूं।
पुरानी कहावत है "रपट गए तो हर हर गंगे"
2014 में जब यूपीए की सरकार थी और तब बीच चुनावो में विपक्ष के नेता नरेन्द्र मोदी के साथ मेरे इंटरव्यू को "हाई कमान" के इशारे पर पहले गिराने की साजिश हुई,जब उसमें सफलता नहीं मिली तब उस इंटरव्यू को बुरी तरह सेंसर कर दिया गया। और इस मुद्दे पर भी सरकार फंस गई। तब प्रसार भारती के CEO जवाहर सरकार ने। उन्होंने मौके का फायदा उठा कर यह कहना शुरू किया कि मैं तो मोदी का इंटरव्यू सेंसर कराए जाने के खिलाफ हूं। मै तो प्रसार भारती की स्वायत्तता के लिए लड़ रहा हूं।
सब झूठ ! वो लड़ नहीं रहे थे, कुर्सी पर बैठ कर सत्ता की मलाई खा रहे थे।
वो मंझे हुए ब्यूरोक्रेट थे, उन्हें आभास हो गया था कि देश की हवा बदल रही है। तब उन्होंने मेरे इंटरव्यू पर व्हिसलब्लोअर बन कर आने वाली संभावित सरकार में अपनी सेटिंग करने की कोशिश की। लेकिन वो इसमें कामयाब नहीं हुए।
तब अचानक कुछ महीने बाद वो नरेन्द्र मोदी के कट्टर विरोधी हो गए, सोशल मीडिया में मोदी जी को ट्रोल करने लगे और उनके खिलाफ फेक न्यूज फैलाने लगे। जिसका ईनाम उन्हें ममता बनर्जी ने राज्यसभा में भेज कर दिया।
Blast from the Past
🇮🇳🚩गलीवाजो को कैसे माफ किया जा सकता है।भाई साहब का गुस्सा अभी भी शांत नहीं हुआ है।
संस्कार शून्य जुबां से कभी इतिहास नहीं बनते,
नफरत फैलाने वाले कभी दिलों के खास नहीं बनते।
प्रधान का अपमान पूरे मुल्क की तौहीन है,
गालियां देने वाले कभी देश के शुभचिंतक नहीं बनते।
भगवान सत्यनारायण की कथा के माध्यम से फर्जी आंबेडकरवादी एजेंडे की ध्वस्त करते पंडित जी
काश सभी पंडित जी अपनी कथा के माध्यम से समाज को ऐसे ही जागरूक करने लगे तो आंबेडकरवादी एजेंडे की विदाई तय है।
#SuryaWithJharkhandYouth
मुझे याद है छात्र जीवन में मेरा एक मित्र दीपक दुबे UPSC का इंटरव्यू देने जा रहा था। घर आया। सामने लॉन में बैठे बतिया रहे थे। तभी सामने लगी सेम की छोटी लतर को दिखा कर पूछा, यह क्या है? गौर से देखने के बाद बोला, यह #पुदीना है।
दीपक ने चार बार IAS का इन्टरव्यू दिया। पर नहीं हुआ। हालांकि दीपक हाल ही NTPC के GM पद से रिटायर हुए।
कमी दीपक की नहीं। प्रयागराज के सेंट जोसफ से पढ़ा, वहां से सीधे इलाहाबाद यूनिवर्सिटी आ गया। भारत के बहुत बड़े जीवन से कभी साक्षात्कार का अवसर ही नहीं मिला।
यह वीडियो किसी सरस्वती शिशु मंदिर की है। इन्हीं के वॉल से मिली। मंदिर के बच्चो को धान की रोपनी करा रहे थे, वामपंथी गिरोह ने वीडियो वायरल कर दी। आरोप लगाया, शिक्षा के नाम पर #बाल_मजदूरी कराई जा रही है। मंदिर चूंकि #संघ से जुड़ा है तो मौका अच्छा था। राजनीतिक औजार मिल गया।
मेरे भी कुछ सवाल है..
● बच्चो के चेहरों की मुस्कान बता रही है, क्लासरूम की घुटती हवा से निकल, साझा होकर इस काम में क्या आनन्द अनुभव कर रहे हैं?
● ये चंद कूढ़मगज, गोलबंद शिक्षित कब तक बचपन का दम घोंटते रहेंगे?
● शिक्षा के मायनों और उद्देश्य पर नागरिक समाज "व्यापक विमर्श" क्यों शुरू नहीं कर रहा है?
● जंतर-मंतर, फिर झारखंड तक, भारत का युवा केवल #याचना करेगा? जारी "सत्ता संघर्ष" में राजनीतिक दलों की #खुराक बनता रहेगा?
● आखिर कब यह शिक्षित समाज अवसरों और व्यक्तित्व को व्यापक करने पर विमर्श शुरू करेगा? मार्गदर्शन, सक्रिय सहयोग नहीं कर सकते तो कोई बात नहीं, कम से कम सड़क का #स्पीड_ब्रेकर तो मत बनिए।
बहुत हुआ तो समर्थन में #रूमानी_कविता करेंगे।
दद्दा! हमने यह किया था। वह किया थे। अरे भाई! आपकी रुमानियत यदि #नीति_हस्तक्षेप में सक्षम नहीं तो क्या करूंगा आपके #कालजयी_संस्मरण सुन कर? या आने वाली पीढ़ी क्या करेगी?
@narendramodi@RahulGandhi
कांवड़ियों को पानी पिलाना हराम है : मुफ्ती शाहनवाज
हमारे इस्लाम में किसी गैर मुस्लिम का मदद करना, पानी पिलाना या खाना खिलाना हराम है।
यह वीडियो उन हिंदुओं तक पहुंच जाना चाहिए जो इन कट्टरपंथी मुस्लिमों को अपना भाई मानते हैं।
सीने पर शान से जनेऊ सजाकर सूरज ने स्क्वैश में गोल्ड क्या जीता, ब्राह्मणवाद का छाती-पीटू रोना रोने वाले लिब्रांडु गैंग के मुँह में अचानक दही जम गया है।
अब इन सेकुलरों को समझ नहीं आ रहा कि भारत के पहले गोल्ड मेडल पर ताली बजाएँ, या जनेऊ देखकर चुपचाप कोने में बैठकर बरनॉल मलें!
प्रिय Gen Z, Alpha
क्या कोई सरकार ऐसा भी कर सकती है, लेकिन अगर काँग्रेस की सरकार हो तो कर सकती है। अभी भी मुझे इस पर विश्वास नहीं हो रहा है कि, हिमाचल प्रदेश सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर विधवा-अनाथ सेस लगा रही है। केंद्र में राहुल गांधी की सरकार होती तो देश भर से अधिक रकम विधवा-अनाथ सेस के जरिये जुटा पाते। मोदी सरकार यह सब कर ही नहीं पा रही है।
भारत हर साल लगभग 700Cr से ज्यादा की छतरियां चीन से आयात करता है।
GTRI के रिपोर्ट के अनुसार भारत में आयात होने वाली छतरियाँ या उनके पुर्जों का 95.8% अकेले चीन से आता है।
आखिर ऐसी कौन सी स्पेस टेक्नोलॉजी छतरी बनाने में लगती है कि 150 Cr आबादी होने के बावजूद हम बुनियादी चीजें भी नहीं बना सकते हैं?