-देश के छात्रों व युवाओं केे आन्दोलन के चलते आज केन्द्रीय शिक्षा मन्त्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान द्वारा इस्तीफा दिये जाने का फैसला उचित, जो यह पहले ही ले लिया जाता तो बेहतर होता। साथ ही, हमारी पार्टी केन्द्र सरकार से यह भी अपेक्षा करती है कि जिन पुलिसकर्मियों ने जन्तर-मन्तर पर शान्तिमय ढंग से प्रदर्शन कर रहे निहत्ते लड़के व लड़कियों पर बरबर्तापूर्वक लाठी, डन्डों आदि से चोट पहुँचायी है जिससे ये बड़ी संख्या में गम्भीर रूप से घायल हुए, उनपर सख़्त कार्रवाई की जानी चाहिये।
-और ख़ास तौर से जिन पुरूष पुलिसकर्मियों ने लड़कियों के साथ बेहूदा व शर्मनाक बदसलूकी की और बल प्रयाग किया, उनको चिन्हित करके, उनके खिलाफ अनुशासनिक एवं क्रिमनल ��ेस चला कर सख़्त से सख़्त क़ानूनी कार्रवाई की जानी चाहिये, जिससे कि भविष्य में इस तरह की घिनौनी हरकत करने की कोई हिम्मत ना कर सके।
- इसके साथ-साथ, सरकार को आन्दोलन कर रहे छात्रों व युवाओं के ख़िलाफ जो भी FIR या complaint दायर की गई है, उन सभी को वापस ले लिया जाये, जिससे इनको आगे चल��र थानों व कोर्ट कचहरी के चक्कर ना काटने पड़े और इस वजह से उनका भविष्य भी ख़राब ना हो, जिससे फिर देश में सौहार्दपूर्ण वातावरण बन सके।
- साथ ही मेरा सभी आन्दोलनकारियों से यह कहना है कि वो इस मामले में किसी भी पार्टी को उनके इस संघर्ष का राजनीतिकरण ना करने दें तथा अपने भविष्य को भी ख़राब ना होने दें।
1.देश में नीट-यूजी सहित विभिन्न परीक्षाओं के पेपरलीक व उसके उपरान्त परीक्षार्थियों द्वारा होने वाली आत्महत्याओं से उपजे छात्र-छात्राओं/���ुवाओं के ’कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) आन्दोलन के नई दिल्ली जन्तर-मन्तर में लगातार जारी शान्तिपूर्ण धरना को हालाँकि लोगों की व्यापक सहानुभूति हासिल है, किन्तु सरकारी जवाबदेही के रूप में केन्द्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की उनकी ज़िद्दी माँग को लेकर विपक्ष व सरकार दोनों के बीच ज़बरदस्त राजनीति का बाज़ार काफी गर्म है, जिससे शिक्षा व्यवस्था में ज़रूरी व्यापक सुधार का असली मुद्दा ही कहीं लुप्त ना हो जाये?
2.वैसे इस गर्म मुद्दे को भुनाने हेतु ��िशेषकर विरोधी पार्टियों में सड़क से लेकर संसद तक में ज़बरदस्त होड़ लगी हुई है, उससे भी सरकार व विपक्ष के बीच तनाव व टकराव की भी परिस्थिति हिंसक होकर किसी न किसी रूप में राज्यों में भी फैल रही हैै, जिससे अपनी पार्टी के लोगों को सचेत व सजग रहने की सलाह।
3.इस प्रकार इस मुद्दे का पूरी तरह से राजनीतिकरण हो जाने के साथ ही जन्तर-मन्तर में आन्दोलनकारियों के विरुद्ध पुलिस की कार्रवाईयों ने स्थिति को औ�� अधिक गर्म व गंभीर बना दिया है।
4.इस भारी तनाव व टकरावपूर्ण स्थिति के कारण संसद का वर्तमान मानसून सत्र अभी तक एक दिन भी सही व सुचारू रूप से नहीं चल पाया है, जिससे देश व जनहित के और भी अनेकों महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही एक प्रकार से रुक सी गयी है।
5.इसके साथ ही, सरकार सीजेपी के आन्दोलन से निपटने हेतु जो उपाय ढूंढने का प्रयास कर रही है वह भ्रष्टाचार एवं अयोग्यता आदि के कारण होने वाले पेपरलीक होने के बाद की सख़्त कार्रवाई के द्योतक हैं, जबकि पेपरलीक के जघन्�� अपराध ना हों इसके नियंत्रण हेतु उचित उपाय नहीं होता दिखने से भी लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।
6.इसलिये वर्तमान राजनीतिक हालात में उग्र व निराश होने के बजाय अपने लागों को अपने मिशन के प्रति पूरी लगन व तन, मन, धन से लगातार डटे रहना है, यही अपील।
बहुजन समाज के लोग आज जिस गर्व और जोश के साथ जय भीम का नारा लगा रहे हैं, उसके पीछे मुख्य रूप से मान्यवर कांशीराम साहब और बहन मायावती जी का संघर्ष है। जहाँ-जहाँ उनका आंदोलन पहुँच पाया, वहाँ बहुजन समाज राजनीतिक और सामाजिक रूप से मजबूत हुआ। कई राज्यों में बहुजन समाज के ने��ा मुख्यमंत्री तक बने, और यह दशकों के ��ंघर्ष का परिणाम है।
इसलिए बहन जी की बात को शांत मन से समझिए। वह जो कहती हैं, उसमें आपके और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की चिंता और हित निहित है।
1.काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का देश की राजधानी नई दिल्ली में संसद के नज़दीक जन्तर मन्तर में पिछले कई दिनों से, ख़ासकर मेडिकल की नीट जैसी विशेष परीक��षा आदि में पेपरलीक व अन्य गड़बडियों के दुष्परिणामों से छात्र-छात्राओं व उनके परिवार के काफी बुरी तरह से प्रभावित हो रहे जीवन को लेकर जारी अनिश्चितकालीन आन्दोलन के कारण सड़क से लेकर संसद तक में ज़बरदस्त हंगामा बरपा है और अब इसका राजनीतिकरण करने से यह मुद्दा सरकार के साथ सीधे टकराव का हो गया है, जिस विषम स्थिति से देश को निकालना ज़रूरी है, क्योंकि इससे दिल्ली में ही नहीं बल्कि विभिन्न राज्यो��� में भी आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है।
2.वैसे चाहे पूरे देश में अयोध्या श्रीराम मन्दिर में चढ़ावा चोरी/ग़बन आदि का गर्म मामला हो या फिर आल-इण्डिया व राज्यों की परीक्षाओं आदि में पेपरलीक का मुद्दा हो, यह सभी मूलतः भ्रष्टाचार के हर स्तर पर पनपने का ही परिणाम है।
3.इसके साथ ही यह संवैधानिक नैतिकता (constitutional morality) से भी जुडा़ मामला है, जिसके अभाव में यह देश को दीमक की तरह खाता चला आ रहा है, जबकि संविधान नि��्माता परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने गुड गवरनेन्स हेतु इस पर ख़ास ध्यान देने की ज़रूरत पर विशेष बल दिया है।
4.संक्षेप में मेरा यही कहना है कि देश व जनहित से जुड़े वर्तमान विकट हालात के सौहार्दपूर्ण समाधान हेतु सरकार तथा माननीय कोर्ट जैसी संवैधानिक संस्थाओं को अपनी भूमिका निभाने की पहल करनी चाहिये तो यह बेहतर होगा।
5.साथ ही, सीजेपी के व्यापक हो रहे आन्दोलन का अब विभिन्न राजनीतिक पार्टियों द्वारा अपने-अपने संकीर्ण स्वार्थ में राजनीतिकरण करके सड़क से लेकर संसद तक में टकराव व हिंसा किया जाना घोर अनुचित। सरकार व आन्दोलनकारी दोनों मिलकर इसका शान्ति व सौहार्दपूर्ण समाधान जितना जल्द निकालें उतना ही उचित।
1.आज से जब संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है, सदन से लेकर सड़कों व दिल्ली के जन्तर-मन्तर तक में विभिन्न ज्वलन्त मुद्दों को लेकर ज़बरदस्त टकराव की स्थिति है, जिसे देश के विकट राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक हालात के मद्देनज़र ज़रूर बेहतर सूझबूझ से टाला जाना चाहिये।
2.वैसे भी सर्वसमाज के करोड़ों परिवारों के लिये जीवनदायी मेडिकल आदि की अति-महत्वपूर्ण व विशेष आल-इण्डिया परीक्षायें सहित राज्यों में नौकरी सम्बंधी परीक्षायें आदि भी लगातार हो रहे पेपरलीक/गड़बड़ी आदि के कारण रद्द होने की अनिश्चितता से ख़ासकर युवा वर्ग व बेरोज़गार लोग लगातार काफी ज़्यादा परेशान हैं, जो विभिन्न जगहों पर अनेकों प्रकार से व्यक्त किये जा रहे उनके आक्रोश व आन्दो���न आदि से भी प्रकट है और यह देश व जनहित से जुड़ा ऐसा अति-गंभीर मामला है जिसपर पूरी तरह से क़ाबू में करने के लिये सरकारों को तत्काल सख़्त क़दम उठाना नितान्त आवश्यक है।
3.साथ ही, इसके लिये ज़िम्मेदारी भी ज़रूर तय होनी चाहिये तथा ख़ासकर परीक्षा व्यवस्थाओं से जुड़े उच्च पदों पर बैठे लोगों के विरुद्ध भी कड़ी क़ानूनी सज़ा हो ताकि देश की तरक्की की नींव युवा पीढ़ी का भविष्य इस प्रकार की अनिश्चितता और अंधकार से आगे बच पाये।
4.इसी क्रम में यूपी, राजस्थान, दिल्ली सहित देश के विभिन्न राज्यों/शहरों में जिस प्रकार से, अच्छे सरकारी स्कूलों व सरकारी स्कूलों में अच्छी पढ़ाई के घोर अभाव में, प्राइवेट स्कूल एवं बड़ी-छोटी कोचिंग संस्थायें, तेज़ी से पनप रही हैं, उससे यह स्पष्ट है कि देश का युवा वर्ग व उनका परिवार, ज़बरदस्त महंगाई के इस दौर में भी अपना पेट काटकर एवं अन्य परेशानियों को झेलकर भी, अपने स्तर से पूरा जी-जान लगाकर आगे बढ़ने हेतु प्रतिबद्ध है।
5.वे लोग आउटसोर्सिंंग की शोषणकारी छोटी-मोटी नौकरी आदि से आगे बढ़कर स्थाई व स्वाभिमानी नौकरी में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं ताकि इज्ज़त से दो वक्त की रोटी कमाकर अपना व अपने परिवार का पेट पाल सकें, जो सराहनीय है।
6.ऐसे में सरकारें कोचिंग संस्थाओं आदि पर भय भ्रष्टाचार-मुक्त कड़ी निगरानी ज़रूर रखें, किन्तु प्राइमरी से लेकर उच्च शिक्षा स्तर पर सम्पूर्ण सरकारी शिक्षा व्यवस्था को हर स्तर पर बेहतर बनाने के साथ-साथ छात्र-छात्राओं को आगे बढ़ाने में भी अपना अहम् दायित्व निभाने का ईमानदार प्रयास ज़रूर करें।
7.वैसे भी यह स��्वविदित है कि देश व समाज को शिक्षित बनाना अनवरत प्रक्रिया है और जिसमें सरकारों द्वारा समुचित बजट प्रावधान के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता को भी अच्छे से अच्छा बनाने जैसी सही सोच रखना भी बहुत ज़रूरी है, तभी युवाओं के उज्जवल भविष्य के सहारे परिवार, समाज, प्रदेश व देश का भविष्य संवर पायेगा, वरना जीडीपी ग्रोथ देश की नैया का सही खिवैया क्या बना पायेगा, इसमें शक है।
8.इसीलिये यूपी व देश में भी विकास का मूल आधार संविधान निर्माता परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के उद्देश्यों के अनुसार शिक्षित, सुरक्षित, कल्याणकारी व सभ्य भारत हो तो यह हमेशा ही बेहतर होगा।
9.और अगर इन बातों पर तत्काल ज़रूरी ध्यान दिया जाये तो जन्तर-मन्तर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के हो रहे आन्दोलन जैसी कार्रवाईयों के लिये लोगों में भी ख़ासकर युवा पीढ़ी को बाध्य नहीं होना पड़ेगा। सरकार इनके प्रति सहानुभूति का रवैय�� अपनाकर स्थिति का सही समाधान करें तो यह उचित होगा।
1.अब जबकि संसद का मानसून सत्र कल दिनांक 20 जुलाई से शुरू हो रहा है, एक बार फिर यह देश व आमजन की चिन्ता है कि क्या इस बार भी फिर से संसद का सत्र हंगामा व स्थगन आदि की भेंट चढ़ जायेगा, या फिर ज़बरदस्त महंगाई, ग़रीबी, बेरोज़गारी, महिला असुरक्षा, महत्वपूर्ण परीक्षाओं के भी पेपरलीक आदि से जुड़े देश के ज्वलन्त मुद्दों से उत्पन्न उत्तेजित, आक्रोशित व आन्दोलित माहौल को शान्त करने व इनके संतोषजनक समाधान हेतु गंभीरता दिखाई जायेगी।
2.वैसे ख़ासकर अयोध्या श्रीराम मन्दिर में चढ़ावा की चोरी, हेराफेरी व ग़बन आदि को लेकर व्यापक जन आक्रोश ने भी यूपी व देश को काफी झकझोर कर रख दिया है और लोग, धर्म का चुनावी स्वार्थ हेतु राजनीतिकरण करने वालों को इसके लिये कठघ���े में खड़ा करके, उनसे दिल दुखाने की जवाबदेही माँग रहे हैं, जिसकी गूंज सड़कों से लेकर अदालत तक में है और संसद में भी यह मुद्दा ज़रूर गर्म होगा, जिसपर भी लोगों की पैनी नज़र है।
3.इतना ही ��हीं बल्कि बंगाल में विधानसभा आमचुनाव के बाद के हालात्, राजस्थान में सरकार की लापरवाही के कारण गर्भवति महिलाओं की मौत सहित विभिन्न राज्यों में बढ़ती महिला असुरक्षा, काफी आपाधापी में की जाने वाली चुनावी रेवड़ियों में भारी गड़बड़ी, सरकारी योजनाओं आदि में चर्चित भ्रष्टाचार, पुलिस मुठभेड़ का प्रचलन, वर्षों से बसे-बसाये लोगों को उजाड़कर उनके कालोनियों का ध्वस्तीकरण आदि जैसे सरकारी रवैयों स�� चरमराई संविधान की जनकल्याणकारी व्यवस्था के साथ ही,
https://t.co/zbwuw6xrFA की अर्थव्यवस्था व यहाँ के जनजीवन को बुरी तरह से प्रभावित करती हुई अमेरिका-इज़राइल का ईरान के विरुद्ध लगातार युद्ध व रुपया का अवमूल्यण आदि देश व जनहित के ऐसे ख़ास मुद्दे हैं जिनपर राजनीतिक द्वेष, स्वार्थ व आरोप-प्रत्यारोप की संकीर्णता/वैमनस्य को त्यागकर सत्ता और विपक्ष दोनों को एकजुट होकर अच्छा उपाय ढूंढ कर सराहनीय कार्य करना होगा, वरना लगभग 140 करोड़ की जन��ंख्या वाले अपने देश में बहुजनों का जीवन यहाँ और भी अधिक बुरे दिन वाला बनकर उनका भविष्य अधर में लटकायेगा, जिसकी आशंका भी व्यक्त की जा रही है।
5.अतः देश को त्रस्त करने वाली इन भारी चुनौतियों व उसके प्रति चेतावनियों को ध्यान में रखकर संसद के मानसून सत्र को, बिना किसी उत्तेजना, रोष व विद्वेष के, सुचारू, शान्तिपूर्ण एवं स्वस्थ्य लोकतांत्रिक परम्परा के मुताबिक चलना सुनिश्चित किया जाना चाहिये, जो वक्त की अहम् ज़रूरत के हिसाब से सभी की ज़िम्मेदारी भी बनती है।
6.साथ ही, इस सम्बंध में सभी संस्थाओं को ऐसा प्रयास ज़रूर करना चाहिये कि देश के कठिन सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक हालात से त्रस्त भारतीयों के जीवन का बोझ व नित्य दिन की उनकी परेशानी/दिक्कतें और अधिक नहीं बढ़ने पायें।
7.इसी क्रम में संसद को भी इन ज्वलन्त राष्ट्रीय मुद्दों पर पूरी तरह से गंभीर व संवेदनशील होना ज़रूरी है और इसकी शुरूआत अ���र संसद के वर्तमान मानसून सत्र से ही हो तो यह अवश्य ही बेहतर होगा। जनहितैषी गुड गवरनेन्स हेतु संसद का प्रभावी होना ज़रूरी। जय भीम, जय भारत।
मदद की अपील;
एक साथी ने मैसेज किया कि उनका भांजा संदीप कनौजिया पिछले 5 दिनों से लापता है। वह यूपी के गोंडा का निवासी है। लड़का स्कूल पढ़ने गया था, लेकिन वापस नहीं आया।
Contact: 9670797355, 8601467556
साथ ही यूपी पुलिस से निवेदन है कि इसे अपने सभी जिला पुलिस के अकाउंट से पोस्ट करे और उन्हें हाई अलर्ट पर रखे। इसके साथ ही रेल विभाग को भी सूचित करें ताकि RPF की टीम बच्चे की खोजबीन हेतु हर संभव प्रयास कर सके।
दलित मजदूर की निर्मम हत्या! 💔
राजस्थान के डीग में मनोज गुर्जर, विष्णु गुर्जर एवं उनके अन्य गुर्गों ने मिलकर धर्मवीर जाटव की निर्मम हत्या कर दी।
इन कायर जातिवादी अपराधियों ने मजदूरी करके वापस आ रहे एक निहत्थे आदमी पर बेरहमी से हमला किया। हालत गंभीर देखते हुए उन्हें जयपुर रेफर किया गया था। चूंकि हत्यारे गृहमंत्री के सजातीय हैं और स्थानीय स्तर पर उनका प्रभुत्व है, इसलिए पु��िस ने शुरुआत में इस मामले पर कोई FIR दर्ज नहीं की। इसके बाद पीड़ित परिवार ने मृतक के शव को थाने के सामने रखकर प्रदर्शन किया। भारी आक्रोश के बाद पुलिस ने FIR तो दर्ज कर ली, लेकिन अभी तक हत्यारों की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
प्रशासन के दबाव के बाद पीड़ित परिवार ने शव को अपने गाँव में रखा हुआ है। परिवार का कहना है कि जब तक मनोज गुर्जर, विष्णु गुर्जर, जवाहर गुर्जर सहित सभी कायर अपराधियों की गिरफ्तारी नह��ं हो जाती, तब तक शव का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।
भाजपा की सरकार में दलितों की हैसियत देखिए। पहले दलितों को बुरी तरह मारा जाता है, लेकिन पुलिस FIR तक दर्ज नहीं करती। जब पीड़ित की मौत हो जाती है, तो भारी प्रदर्शन के बाद FIR तो दर्ज हो जाती है, लेकिन हत्यारों को गिरफ्तार नहीं किया जाता; सिर्फ इसलिए क्योंकि वे Dominant जाति के हैं? यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है। सरकार धर्मवीर जाटव हत्याकांड में शामिल सभी दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करे, पीड़ित परिवार को सुरक्षा दे एवं मामले में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मिय��ं को तुरंत निलंबित कर उन पर सख्त कार्रवाई करे।
दलित युवक पर जानलेवा हमला!
यूपी के बरेली में संदीप शुक्ला, अजय सिंह एवं कई अन्य गुंडों ने मिलकर धोबी समाज के एक दलित युवक पर च��कूओं से जानलेवा हमला किया। युवक के हाथ और नाक कट गए हैं।
यह बेहद भयावह है। घटना में शामिल सभी जातीय आतंकियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
द्रोणाचार्यों की खैर नहीं! 🚨😡
केरल के कन्नूर डेंटल कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. कोडंडा राम ने नितिन राज को भरी क्लास में जातिगत रूप से जलील किया। वह आए दिन दलित छात्रों को जलील करता रहता था।
नितिन राज इस अपमान को बर्दाश्त नहीं कर सका, और कॉलेज की छत से कूदकर अपनी जान दे दी। यह इसी साल अप्रैल की घटना थी। जिला कोर्ट ने उस प्रोफेसर को अग्रिम ज���ानत देने से इनकार कर दिया। फिर वह हाई कोर्ट गया, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए 19 जून को हाई कोर्ट ने भी उसे राहत देने से मना कर दिया।
हालांकि जातिवादी प्रोफेसर कोडंडा को भला कैसे बर्दाश्त होगा कि किसी दलित की आत्महत्या के मामले में वह जेल जाए। दलित तो कीड़े मकोड़े होते हैं। उनकी जान की क्या ही कीमत है? अतः वह अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, लेकिन उसके तमाम कुतर्कों को खारिज करते हुए सुप्रीम क���र्ट ने भी उसे कोई राहत देने से मना कर दिया है। अब उसे कानूनी कार्रवाई तो झेलनी ही होगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस संस्थागत उत्��ीड़न को अत्यंत संवेदनशील माना और कहा:
"उस प्रोफेसर को अपने कृत्यों के नतीजों का एहसास होना चाहिए। अगर क्लासरूम में किसी स्टूडेंट की इस तरह बेइज्जती अथवा अपमान किया जाता है, तो इसका उस स्टूडेंट पर क्या असर होगा? वह टीचर इस तरह का बर्ताव करके बच नहीं सकता। समाज में एक कड़ा संदेश जाना चाहिए।"
सरकार, न्यायपालिका एवं अन्य सभी संस्थाओं को जाति के मुद्दे को लेकर अत्यंत संवेदनशील होना चाहिए। दलितों के प्रति जातीय कुंठा के भाव से घिरे हुए प्रोफेसर इस धरती पर एक कलंक हैं, जो आज भी किसी अर्जुन को महान बनाने के लिए एवं जातीय दुर्भावना के चलते किसी एकलव्य का अंगूठा काटने को तैयार हैं। सच कहें तो आज की स्थिति उससे भी अधिक भयावह है। आज के मनुवादी प्रोफेसर दलितों का सिर्फ अंगूठा नहीं काटते, बल्कि उनका गला ही काट रहे हैं। उन्हें इतना प्रताड़ित किया जा रहा है कि वे आत्महत्या करने को मजबूर हैं�� न जाने कितने दलित छात्र आज भी रोहित वेमुला की तरह प्रताड़ना के तले घुट-घुटकर जी रहे हैं।
दलित बच्ची को न्याय दो!
यूपी के बरेली में मोहम्मद मोनिश नामक दरिंदा एक दलित नाबालिग छात्रा से कई महीनों से छेड़खानी कर रहा है। विरोध करने पर वह उसे किडनैप करने की धमकी देता है।
क्या अब चंद्रशेखर आजाद आंदोलन करने नहीं जाएंगे? या फिर सेक्युलर ज़मात की तरह वह भी मौन ही बने रहेंगे?
आज दिनांक 11-07-2026 को आदरणीय बहन कुमारी मायावती जी के निर्देशानुसार जनपद बाराबंकी के विधानसभा क्षेत्र सदर बाराबंकी में बहुजन समाज पार्टी द्वारा आयोजित विशाल कार्यकर्ता सम्मेलन में शामिल होने का अवसर प्राप्त हुआ जिसमें विशेष रूप से मो.मुबाशिर जी को विधानसभा सदर बाराबंकी बहुजन समाज पार्टी का प्रभारी/ प्रत्याशी घोषित किया गया।
#जयभीम #मिशन_2027
#BSP #बाराबंकी #सदर_बाराब��की
#बहुजन_समाज_पार्टी
दिनांक 11.07.2026 : जैसाकि सर्वविदित है कि बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी), दूसरी पार्टियों की तरह अपना राजनीतिक व चुनावी स्वार्थ साधने के लिये धरना-प्रदर्शन, सड़क जाम, ह���्लाबोल, सरकारी व प्राइवेट सम्पत्तियों के तोड़फोड़ व दूसरी हिसंक घटनाओं तथा हवाहवाई वादों-दावों एवं मिथ्या प्रचार-प्रसार आदि के माध्यम से जनता को गुमराह करने आदि में विश्वास नहीं करती है।
अर्थात् बी.एस.पी. ऐसी तमाम राजनीतिक व चुनावी चालबाज़ियों से पूरी तरह से पाक-साफ देश की एकमात्र ऐसी अम्बेडकरवादी पार्टी है जो ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ के सिद्धान्त व नीति पर चलकर यहाँ सर्वसमाज में भी ख़ासकर ग़रीबों, मज़दूरों, शोषितों-पीड़ितों व उपेक्षितों के हित व कल्याण हेतु समर्पित है, और जिसका जीता-जागता प्रमाण यहाँ उत्तर प्रदेश में बी.एस.पी. के नेतृत्व में चार बार रही सरकार में व्यापक जनहित, जनकल्याण व विकास का तथा अपराध-नियंत्रण व क़ानून-व्यवस्था के मामलों में ’क़ानून द्वारा क़ानून का बेहतरीन राज’ रहा है।
इससे यहाँ ��ूपी जैसे विशाल राज्य में एक आदर्श संवैधानिक सरकार देने के साथ-साथ यह भी सूरज की रौशनी की तरह पूरी तरह से स्पष्ट है कि बी.एस.पी., विरोधी पार्टियों व उनके इशारे पर चलने वाले दलित संगठनों व पार्टियोें आदि की तरह छल व छलावा की राजनीति तथा उनके लिये मगरमच्छ के आँसू नहीं बहाती और ना ही संकीर्ण स्वार्थ हेतु गिरगिट की ही तरह रंग बदलती है, बल्कि करोड़ों दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों, मुस्लिम व अन्य ��ार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ-साथ अपरकास्ट समाज के ग़रीबों के वास्तविक हित व कल्याण के लिये ’बहुजन समाज’ में समय-समय पर जन्मे महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों में भी ख़ासकर महात्मा ज्योतिबा फुले, श्री नारायणा गुरु, राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज, परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर व बहुजन नायक मान्यवर श्री कांशीराम जी के बताये रास्तों पर चलकर मुख्यतः सत्ता की मास्टर चाबी के माध्यम से ’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक उत्थान’ का महान लक्ष्य हासिल करना चाहती है।
और अब यहाँ ख़ासकर उत्तर प्रदेश विधानसभा के आगामी आमचुनाव में बी.एस.पी के प्रभाव को तेज़ी से आगे बढ़ता हुआ देखकर विरोधी पार्टियाँ में द्वेष व बेचैनी स्वाभाविक है और इसीलिये वे अपने साम, दाम, दण्ड, भेद आदि हथकण्डों के तहत् कुछ दलित संगठनों व पार्टियों आदि को आगे करके दलित व बहुजन समाज के अन��य विभिन्न अंगों को तरह-तरह से भटकाने व गुमराह करने में लगे हुये हैं,
जबकि शोषितों-पीड़ितों व उपेक्षितों को अच्छी तरह से मालूम है कि ’मा. बहन कुमारी मायावती जी’ के नेतृत्व वाली सरकार ही उनकी सभी राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक समस्याओं का उसी प्रकार से बेहतरीन निदान है जैसाकि उनकी सभी सरकारों में होता रहा है जब सत्ता की शक्ति, संसाधन व ऊर्जा तथा सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल भी हर स्तर पर सबके साथ न्य���य एवं सबको न्याय दिलाने के लिये समर्पित व तत्पर रहा।
साथ ही, चुनाव नज़दीक आता देख विरोधी पार्टियाँ ��पने हथकण्डों आदि के साथ-साथ दलित संगठनों व गुलाम मानसिकता रखने वाले लोगों के कंधे पर बंदूक रखकर बी.एस.पी. व बाबा साहेब के मूवमेन्ट-विरोधी राजनीतिक स्वार्थ का अपना खेल आगे बढ़ाना चाहती हैं, जिससे सर्वसमाज के लोगों को व विशेषकर दलित एवं ’बहुजन समाज’ के सभी लोगों को बहुत ही ज़्यादा सचेत व सतर्क रहने की ज़रूरत है ताकि विरोधियों केे नापाक इरादे सफल ना हों सकें।
इसको लेकर बी.एस.पी. की असली चिन्ता य���ी है कि सर्वसमाज के ग़रीब, मज़दूर व बेरोज़गार नौजवान आदि के साथ-साथ समाज के शोषित-पीड़ित व अन्य उपेक्षित लोग, अपनी समस्याओं को लेकर सड़क पर उतरने के क्रम में सरकारी द्वेष, उत्पीड़न व आतंक आदि का शिकार ना बनने पायें,
क्योंकि नौजवान अगर सरकारी ज्यादती के कारण यदि मुकदमा व जेल आदि में उलझ जायेंगे तो इससे उनका भविष्य ख़तरे में पड़ जाने की आशंका है तथा अगर परिवार का मुखिया इन चक्कर में पड़ जायेगा ���ो उनका घरबार तबाह हो जायेगा और उनके पूरे परिवार के इस प्रकार से अंधकार में डूब जाने क��� खतरा है, जो बी.एस.पी. कतई भी नहीं चाहती है, क्योंकि बी.एस.पी. का अम्बेडकरवादी मिशन प्रभावित हो सकता है जो कि विरोधियों की असल चाल है।
इसके साथ ही, सर्वविदित है कि दलित-विरोधी सहारनपुर काण्ड में जातिवादी, सामंती व सरकारी आतंक के विरुद्ध बी.एस.पी. व उसके नेतृत्व ने सड़क से लेकर संसद तक में जबरदस्त लड़ाई लड़ी, किन्तु संसद में भी इसका सही से निदान नहीं मिलने के विरोध में तब बी.एस.पी. नेतृत्व ने, दलितों व अन्य पिछड़ों आदि के हक की अनदेखी करने पर परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर द्वारा देश के पहले कानून मंत्री पद से इस्तीफा देने का अनुसरण करते हुये, राज्यसभा से ही इस्तीफा दे दिया था कि जब संसद में भी हमारी बात नहीं सुनी जाती है तो ऐसी संसद में रहने का फायदा ही क्या?
इस प्रकार यह उन जबरदस्त उदाहरणों में एक है जो बी.एस.पी. नेतृत्व ने अपने संघर्ष के क्रम में दिया है अर्थात् स्पष्ट है कि बी.ए��.पी. को अपनी तरह ही मगरमच्छ के आँसू बहाने की सलाह देेने वाले संकीर्ण स्वार्थी लोग विरोधी पार्टियों के जातिवादी व विशैले षडयंत्र का शिकार ना बनें तो यह बेहतर होगा।
वैसे भी सभी जानते हैं कि मान्यवर श्री कांशीराम जी ने बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) का गठन देश में जाति के आधार पर सदियों से सताये, तोड़े व पछाड़े गये उन लोगों को ’बहुजन समाज’ को आपसी भाईचारा के आधार पर एकता में जोड़कर राजनीतिक शक्ति अर्थात् ’’हुकमरान जमात’’ बनाने के लिये इसलिये किया था ताकि इन वर्गों के मसीहा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के सत्ता की मास्टर चाबी के माध्यम से आत्म-सम्मान व स्वाभिमान मूवमेन्ट को मंज़िल तक पहुँचाया जा ���के, और यह क्रम लगातार जारी है, जिसकी राह में रोड़ा बनकर खड़ा होना बी.एस.पी के मिशन 2027 को प्रभावित करने का घोर बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर-विरोधी अनुचित कृत्य होगा। जय भीम, जय भारत।
आज मैंने मेरठ में दलितों पर बर्बरता और गाली-गलौज करने वाले जातिवादी IPS अविनाश पांडेय को बर्खास्त करने एवं उस पर विधिक कार्रवाई हेतु गृहमंत्री अमित शाह जी को पत्र लिखा है। समाज उसकी बदतमीजी को बर्दाश्त नहीं करेगा।
रक्षक को भक्षक बनने की इजाजत कतई नहीं दी जा सकती!
. @AMRUTCityGzb यह नन्द ग्राम गाजियाबाद का डाक्टर अम्बेडकर भवन है जिसमें भगवान बुद्ध और बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर जी की प्रतिमा लगी है और इसका क्या हा��� बना दिया आप के कर्मठ कर्मचारियों ने.. कुछ तो मर्यादा रखिए @myogiadityanath 10..10 साल से जमे अफसर कैसे काम करेंगे @dm_ghaziabad @SBM_UP @aksharmaBharat
@bspindia के कार्यकर्ताओं जरा इनको समझाओ ये हमारे लिय कितना महत्पूर्ण स्थान है
दलितों के अपमान पर सवर्णों का जश्न!
कल मैंने दलित युवकों को थप्पड़ मारने और वैन में घुसकर उन पर हमला करने वाले SSP अविनाश पांडेय पर एक्शन की मांग करते हुए फेसबुक पर एक पोस्ट किया था।
इस पोस्ट पर ठहाके लगाकर हंस रहे लोगों के नाम देखिए। बस ��ही इनका हिंदुत्व है। जागो रे दलितों!