किसी को ‘क्रांति’ शब्द की व्याख्या शाब्दिक अर्थ में नहीं करनी चाहिए। जो लोग इस शब्द का उपयोग या दुरूपयोग करते हैं उनके फायदे के हिसाब से इसे अलग अलग अर्थ और अभिप्राय दिए जाते हैं।
#बलिदान_दिवस
राष्ट्रीय जीवन के हर क्षेत्र में हिन्दुत्व के आध्यात्मिक और आदर्शों से स्पंदित हुए बिना स्वातंत्रय की कोई कीमत नहीं” - डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार
#अपने_डॉक्टर_जी#भारतीय_नववर्ष
सौर मंडल के ग्रहों और नक्षत्रों की चाल, निरंतर बदलती उनकी स्थिति पर ही हमारे दिन, महीने और साल आधारित हैं। इस वैज्ञानिक आधार के कारण ही हिन्दू पंचांग को सबसे सटीक माना जाता है| #VarshaPratipada2023
संत तुकाराम महाराष्ट्र के एक महान संत और कवि थे।
संत तुकाराम अभंग लिखते थे उन्हें फिर भक्तों के मध्य बैठकर स्वर सहित गाना, इसी में इनका मन लगा रहता था।
#संत_तुकाराम_जयंती
“केवल भूमि के किसी टुकड़े को तो राष्ट्र नहीं कहते| एक वि��ार एक आचार,एक सभ्यता एवं एक परम्परा से जो लोग पुरातन काल से चले आये हैं , उन्हीं लोगों से राष्ट्र बनता है|इस देश को हमारे ही कारण हिंदुस्तान नाम दिया गया है” - डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार
#अपने_डॉक्टर_जी
#भारतीय_नववर्ष
@cg_vsk
वैचारिक परिवर्तन लाने के लिए समाज के प्रत्येक घटक में अपनी भूमि, अपने समाज, अपनी परम्परा और अपने राष्ट्र के प्रति उत्कृष्ट प्रेम जागृत करना पड़ेगा |जितने विपरीत संस्कार हैं, उन्हें अन्त: करण से उखाड़कर फेंकना होगा -#श्री_गुरूजी
स्वामी दयानन्द जी अपने प्रवचनों में श्रोताओं को प्राय: राष्ट्रीयता का उपदेश देते और देश के लिए मर मिटने की भावना जागृत करते थे।
#Swami_Dayananda_Saraswati_Jayanti
शिक्षा को प्रोत्साहित करते हुए सावित्रीबाई फुले लिखती है "शिक्षा वह मार्ग है जो निराश लोगों का उत्थान करती है।" एक और जीवन दर्शन को विस्तृत करते हुए कहा गया है | #SavitribaiPhuleJayanti
गुरु गोबिंद सिंह जहां विश्व की बलिदानी परम्परा में अद्वितीय थे, वहीं वे एक महान लेखक, मौलिक चिंतक तथा संस्कृत सहित कई भाषाओं के ज्ञाता भी थे। #PrakashParvGuruGobindSingh
गुरु गोबिंद सिंह जहां विश्व की बलिदानी परम्परा में अद्वितीय थे, वहीं वे एक महान लेखक, मौलिक चिंतक तथा संस्कृत सहित कई भाषाओं के ज्ञाता भी थे। #PrakashParvGuruGobindSingh