जो युद्ध हमारा ‘अश्व’ न जीत सका, वह आपके ‘हाथी’ ने जीत लिया। जो ‘सीटी’ बिहार न बजा पाया, वह तमिलनाडु ने खूब ज़ोर से बजाया। पर असली युद्ध अब शुरु हुआ है நண்பா! पॉलिसी और गवर्नेंस को जमीन पर उतारने की प्रेरणा अब आपको लेनी होगी, सीखनी होगी। அமோக வெற்றிக்கு வாழ்த்துகள்! @actorvijay
बिहार के नये सीएम के रूप में श्री सम्राट चौधरी जी को बधाई। आपके ऊपर यह बड़ी ज़िम्मेदारी होगी कि नीतीश जी ने बिहार को जहाँ छोड़ा है, बिहार वहाँ से आगे जाए न कि पीछे । क़ानून का राज बना रहे तो उद्यमशील बिहार आगे बढ़ता ही रहेगा। शुभकामनाएँ। @samrat4bjp
आपके साथ बचपन से जुड़ी, साथ काम किया, राजनीति में विरोध भी किया। आज अब न साथ हूँ, न विरोध में। जितना आपको जानती हूँ, आपको अच्छे से पता है कि 20 साल को कोई 20 दिन भी याद न रखेगा। न किसी को मार्गदर्शन चाहिए, न आप देंगे। खान-पान, हेल्थ का ध्यान रखेंगे नीतीश जी। सस्नेह! @NitishKumar
नीतीश जी अपने मानसिक हालात के कारण जो कुछ भी कर रहे हैं - चाहे वह कितना भी आपत्तिजनक और शर्मनाक क्यों न हो - इसके लिए वे ���हीं बल्कि उन्हें चुनने वाले लोग ज़िम्मेदार हैं - वे जिन्होंने उन्हें सदन का और सरकार का नेता बनाया है - यह जानते हुए भी कि वे मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं हैं।
समता पार्टी के संस्थापक-सदस्य, जदयू के पूर्व नेता, मिल्लत कॉलेज, दरभंगा में ���िन्दी के प्रोफेसर, और सर्वोपरि मेरे पितामह स्वर्गीय उमाकान्त चौधरी जी की आज 20 वीं पुण्यतिथि है। नवम्बर 2005 में अपनी पार्टी की सरकार बनने के तुरंत बाद वे गुज़र गए थे। उन्होंने हमें आदर्शवाद सिखाया। नमन।
कश्मीर से आबिद और मुशर्रफ आए। उनके पिता भी आते थे, और एक माजिद मामा भी जो हम बच्चों को अखरोट खिलाते थे। दरभंगा इनके लिए दूसरा घर है। बिहार में दशकों की परंपरा है ठंड में कश्मीरी व्यापारी ख़ूबसूरत गर्म कपड़े लेकर आते हैं। रिश्ते बन जाते हैं, यादें क़ायम रहती हैं। यही अपना भारत है। हमने अपने देश, यहाँ की भाषाओं, हिन्दी-उर्दू और भारत की साझी संस्कृति पर खूब बातें की।
दरभंगा में बूथवार वोट का फॉर्म-20 मिला। जिन मुस्लिम-बहुल बूथों पर 2020 में बीजेपी विधायक को सिंगल डिजिट (1-9) वोट थे, वहाँ 2025 में सैकड़ों वोट कैसे आए? जिन बूथों पर मेरे सैकड़ों वोट लोगों ने सत्यापित किए हैं, वहाँ मुझे सिंगल डिजिट में वोट कैसे? कोर्ट और जनता फ़ैसला करेगी। #EVM
माननीय मोदीजी की राजनीति में परिवारवाद नहीं होता, बस सत्ता बनाए रखने के लिए परिवारों को ‘सरप्राइज़’ दिया जाता है, ‘अभिभूत’ किया जाता है। बहरहाल, छोटे भाई दीपक को मंत्री पद की शुभकामनाएँ! सही रास्ता पकड़े हैं। वरना अभी आपसे पूछा जाता - “सीधे मंत्री ही बन जाइएगा! अभी संघर्ष करिए! अरे आप तो जींस पहनते हैं! जनता आपसे “कनेक्ट” कैसे करेगी?” हमारे अभिभावक-तुल्य नीतीश जी और उपेन्द्र जी को भी समय की माँग और राजनीति की सही नब्ज पकड़ने के लिए बहुत साधुवाद। 😊🙏
हम कोर्ट भी जा ही रहे हैं, इलेक्शन पिटीशन दायर करेंगे ही - बूथवार EVM में वोटों की डकैती के सबूत के साथ। पर हम राजनीतिक आवाज़ भी उठायेंगे। अगर ये झूठ बोल-बोलकर नैरेटिव गढ़ते रहते हैं तो हमें सच्चाई का हल्ला भी करना पड़े���ा। जनता को सही सूचना देना भी लीडर का ही काम है। #EVM
“यह दुस्साहस भाजपा को भारी पड़ेगा। EVM rigging की आशंका से जानबूझकर मैंने इस बार अपना होमटाउन चुना ताकि मेरे पास सबूत रहे। लगा कि यहाँ ये डरेंगे पर जीतने की ज़िद और कॉन्फ़िडेंस में ये भूल गए दरभंगा मेरा होमटाउन है, कंसी पंचायत मेरा ददिहाल, रानीपुर पंचायत मेरा ननिहाल। नाते-रिश्तेदारों के ही घर-घर से 15-20 वोट हैं। सबने झोली भर-भर कर बेटी को वोट किया। पर सारे वोट एक ही पैटर्न से ग़ायब हैं! पूरा शहर छोड़िए, परिवार का पूरा वोट भी शर्तिया हारने वाले भाजपा विधायक को ट्रांसफ़र किया गया।” #EVM
EVM का पोल खुल चुका है मेरे होमटाउन में। हर दिन दरभंगा के अनेक वोटर फ़ोन कर रहे हैं, मिलने आ रहे हैं। मैं ख़ुद हर बूथ पर आपसे मिलने आऊँगी। पर इस बीच दरभंगा के सभी प्रबुद्ध वोटरों से अपील किया है कि वे मुझे संपर्क कर बताएँ कि किस बूथ, वार��ड या पंचायत में उन्होंनें मुझे वोट किया था। एक फॉर्म सारे वोटर को भेजा जा रहा है। न्यायालय और वैधानिक सारे रास्ते अख़्तियार किए जाएँगे पर सबसे बड़ी अदालत तो जनता की ही अदालत है। चलिए दरभंगा को चोरों से मुक्ति दिलाते हैं और देश का लोकतंत्र बचाते हैं।
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“दरभंगा के किसी भी बूथ पर आज पेपर बैलेट से चुनाव करा लें। यदि उसका वोट EVM पर आए वोट के बराबर रहा या निकट भी रहा तो मैं राजनीति छोड़ दूँगी। EVM में वोट चुराने से पहले नॉन-बिहारी एजेंट को जानकारी नहीं दी गई कि इस शहर में 50 साल से राजनीति कर रहे मेरे परिवार के ही हज़ारों वोट हैं।”
बीजेपी की आँधी में भी एकदम ध्रुवीकृत बिस्फी में बीजेपी विधायक की हार हुई। क्या वहाँ महिलाओं के खाते में 10000 भी नहीं पहुँचे? नहीं। क्योंकि इस बार वहां मेरे जैसा तीसरा लोकप्रिय उम्मीदवार नहीं था जिसको मिलने वाला खूब सारा न्यूट्रल हिन्दू-मुसलमान वोट EVM में 2020 की तरह उसके नाम ट्रांसफ़र हो पाता। उस साल राजद की आँधी थी और उसका एक क़द्दावर नेता अपने गढ़ बिस्फी में हार गया। उस साल भी बिस्फी में दरभंगा की तरह ही मेरे स्वजनों के वोट भी बीजेपी कैंडिडेट के खाते में ट्रांसफ़र करा लिये गए थे। मुख्य विपक्षी दल/गठबंधन से इतर किसी एक तीसरे ल���कप्रिय उम्मीदवार/दल के अधिकतम वोट को अपने नाम कर लेने की यह रहस्यमयी तकनीक है। तब मैं सबूत रहते हुए भी खून का घूँट पी कर रह गई थी। इस बार इन्होंने मेरे घर में ही ��ोटों की डकैती की है। दुस्साहस है या बाहरी व्यक्ति में जानकारी का अभाव कि दरभंगा मेरा होमटाउन है जहां मेरे हज़ारों नाते-रिश्तेदार रहते हैं? जो भी हो, इस बार EVM से वोट चुराने का पूरा पोल मैं खोल कर रख दूँगी। इस बार इन लोगों से चूक हो गई है। #EVM
दरभंगा में नामांकन के बाद स्थानीय स्तर पर हमें बताया गया कि EVM में महागठबंधन के उमेश सहनी क�� क्रमांक 6, मेरा अर्थात् पुष्पम प्रिया का 7 और जनसुराज के आर के मिश्रा का 8 नंबर बटन होगा। पर 24 घंटे के अंदर उसे “ऊपर से” बदलकर 5,6,7 कर दिया गया। मशीन में शायद तय किया जा चुका था कि 6 नंबर के वोट नंबर 2 पर संजय सरावगी को ट्रांसफ़र करने हैं। पर महागठबंधन को 6 नंबर पर रखने से भंडाफोड़ हो जाता। यह जल्दबाज़ी में इनकी पहली ��कनीकी चूक थी। मशीन में एक बार ट्रांसफ़र का फॉर्मूला तय हुआ तो बेचारा यह गलती सुधार नहीं पाया कि मुझे अपने हज़ारों नाते-रिश्तेदारों वाले होमटाउन दरभंगा में छोटे-छोटे निर्दलीयों से भी कम वोट आना और मुस्लिम वोटरों वाले बूथ पर रिकॉर्ड वोट बीजेपी उम्मीदवार को मिल जाना राजनीतिक व सांख्यिकीय दोनों रूप से असंभव है। मतगणना के दौरान स्वयं बीजेपी उम्मीदवार के काउंटिंग एजेंट हतप्रभ थे कि जहां से कभी वोट नहीं आया वहां वोट कैसे आ रहा है? पर नियति ने इस बार तय कर लिया है कि इनका पर्दाफ़ाश कर ही देना है। इस बार इन्होंने इतनी गलती की है और मेरे पास हर बूथ पर इतने सबूत हैं कि इनका पोल खुलना तय है। #EVM
प्रिय देशवासियों,
EVM लोकतंत्र के लिए समस्या बना दिया गया है। यह मैं इसलिए नहीं कह रही कि मैं हार गई, या भावुक हो गई या मुझे सदमा लगा है। यह सब ट्रोल की भाषा है। देखिए, मैं विश्वप्रतिष्ठित संस्थानों से पढ़ी हूँ। राजनीति और चुन���व पर बढ़िया रिसर्च किया है, विशिष्टता रही है। राजनीति को क़रीब से देखा है। खूब अनुभव रहा है। परिवार में ही 13 चुनाव देखे हैं।आज भी परिवार में एक व्यक्ति चुनाव जीते हैं। पर मैंने अपनी पार्टी बनाई और दो चुनाव लड़े हैं। मैं अपने पूरे ज्ञान और राजनीतिक अनुभव से पूरी ज़िम्मेदारी से कह रही हूँ कि EVM में वोट मैनिपुलेट हो रहे हैं। साल 2020 में भी मेरे पास बूथवार सबूत थे और आज तो खूब सारे जमा किए हैं। अब चूँ���ि मतदान-प्रणाली ही गुप्त मतदान पर आधारित है, इसलिए इसे न्यायालय में सिद्ध नहीं किया जा सकता। इसका फ़ैसला राजनीतिक तरीक़े से जनता की अदालत में ही होगा - जैसे भी हो, जब भी हो, जिस रणनीति से हो।
यह EVM मैनिपुलेशन कैसे होता है यह गंभीर शोध का विषय है पर यह होता है इसमें आप कोई संदेह मत रखिए। हाँ, मेरे अनुभव से, तरीक़ा यह है कि मुख्य विपक्षी दल/गठबंधन के उम्मीदवार अर्थात् पेपर पर नंबर दो के वोट को टच नहीं किया जाता। इसका उपयोग किसी नये दल के लोकप्रिय उम्मीदवार पर किया जाता है। और यह एक सीट पर एक उम्मीदवार के साथ ही संभव होता है। इसलिए जहां दो नये लोकप्रिय उम्मीदवार हों वहां एक का ही वोट बुरी तरह प्रभावित होगा। दूसरे का या अन्य नि���्दलीय इत्यादि का यथावत रहेगा। इसलिए अन्य सीटों पर या दूसरे राज्यों या अन्य चुनावों में अगर मुख्य विपक्षी जीत रहा है तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। ख़तरे में सिर्फ तीसरा पक्ष रहेगा। पहले नैरेटिव बनाया जाएगा कि ये सब हवा-हवाई हैं, अप्रासंगिक हैं, बस सोशल मीडिया पर हैं, इत्यादि-इत्यादि ताकि चुपके से उनका वोट चुरा भी लिया जाए तो नैरेटिव यही रहे कि हाँ इनकी ज़मीनी पकड़ तो थी नहीं! या मेरे मामले में ��ि ये तो लंदन से आई हैं इत्यादि इत्यादि। या ट्रोलों और मीम ��े आपको डिस्क्रेडिट किया जाए। और इधर अपने वोटरों को लगने लगता है कि हाँ मैंने तो वोट किया पर सामने वालों ने नहीं किया होगा। पर अगर आपने वोट की गिनती की है, हर बूथ पर अंदर और बाहर आपके एजेंट हों तो आपको अच्छे से पता होता है कि 100-200 वोट 2-5 में नहीं बदल सकते। या आपके घर के वोट ग़ायब नहीं हो सकते या धुर-विरोधी बूथ पर सत्ताधारी दल को बंपर वोट कैसे मिले? ये सब आपका वोट होता है।
इसलिए नई राजनीति करने वालों क�� लिए रास्ता कठिन है। इस दौर की लड़ाई को बहुत धीरज और होशियारी से लड़ना होगा। मैं इसके लिए तैयार हूँ। राजनीति से नैतिकता आदि तो कब का जा चुकी थी, अब फ़्रॉड, ठग और किसी क़ीमत पर जीत लेने की राजनीति है। इससे डटकर दिमाग़ी मजबूती से मुक़ाबला करना होगा, हमें भी और आप सभी जनता को भी।
मैं पराजित हुई हूँ, समाप्त नहीं हुई हूँ। बस अब साम-दाम-दंड-भेद की राजनीति में रणनीति बदलने की ज़रूरत होगी। मेरे पार्टी स��र्थक और कार्यकर्ता हतोत्साहित न हों, हम वापसी करेंगे। आप सबलोग सपरिवार खुश रहें।
- पुष्पम प्रिया चौधरी
दरभंगा में मुसलमानों ने भी जो हज़ारों वोट मुझे पारिवारिक लगाव और पसंदगी से दिए, उनके बूथों पर भी वे सारे वोट बीजेपी ने बिना देखे-समझे खुद को ट्रांसफ़र करवा लिए! इस बार जिसका हारना तय था वह रिकॉर्ड जीत गया - कभी न मिलने वाले वोटों से! EVM ���ें पूरी डकैती हुई विरोधी वोटों की भी।
EVM rigging में इस बार मेरी माँ, घर व हर मुहल्ले में रिश्तेदारों तक के वोट बीजेपी उम्मीदवार को ट्रांसफ़र। हर बूथ पर सैकड़ों वोट मैनिपुलेशन का साफ़ प्रमाण! वोटर हतप्रभ कि वोट कहाँ गए? ज���ां सैकड़ों वोट मिले उन बूथों पर भी संख्या 0-2 से 5-7 तक! हर बूथ पर एक-सा पैटर्न! सांख्यिकीय रूप से भी असंभव! शायद जिसे EVM मैनिपुलेट करने का काम दिया गया उसे बताया ही नहीं गया कि इस बार मैं अपने गृहनगर से चुनाव लड़ रही हूँ जहाँ मेरे गिने हुए हज़ारों वोट हैं। इस बार आपलोगों ने बड़ी चूक कर दी है। @BJP4India @narendramodi @AmitShah