हिमाचल प्रदेश/उत्तराखंड –
शिमला में एक घर से एक करोड़ रुपए की ज्वेलरी/कैश की चोरी हुई। चोर जब नेपाल भाग रहे थे तो रुद्रपुर (उत्तराखंड) में उन्हें आबकारी विभाग की टीम ने रोक लिया। चेकिंग के नाम पर ज्वेलरी/कैश अपने कब्जे में कर लिया।
असली आरोपियों ने नेपाल पहुंचकर शिमला वाले मकान मालिक को फोन किया और बताया कि उनका कैश/ज्वेलरी उत्तराखंड आबकारी टीम के पास है। मकान मालिक ने हिमाचल पुलिस को खबर दी। HP पुलिस ने जांच की तो बात सही पाई गई।
आज शिमला पुलिस ने रुद्रपुर (उत्तराखंड) के आबकारी विभाग में तैनात दरोगा देवेंद्र कुमार, कांस्टेबल बलजीत सिंह, PRD जवान नईम, कर्मचारी पप्पू लाल को गिरफ्तार किया है। 80% माल रिकवर हो गया है। "असली चोर" फरार हैं।
"मैंने तेरे ही भरोसे, हनुमान..."
◆ उत्तराखंड के एक स्कूल की प्रेयर में गूंजा हनुमान अंश का गाना
◆ वीडियो सोशल मीडिया पर हुआ वायरल
#Uttarakhand | Uttarakhand | #HanumanAnsh | Hanuman Ansh | #ViralVideo
🚨 योगी का मंच से सीधा संदेश! 🔥
“आपकी जगह मैं DGP होता तो डंडा मारकर सीधा कर देता!” 👊
जब CM Yogi Ji के शब्दों में इतना सख्त तेवर हो, तो समझ लीजिए—Law & Order पर समझौता नहीं, Action चाहिए! ⚡
बयान गूंजा है… अब असर देखना बाकी है! 🚩
#YogiAdityanath#DGP#Action#LawAndOrder
रात में पूरा परिवार सो रहा था, किसी को भनक तक नहीं लगी।😳👇
एक बदमाश लूटपाट कर रहा था, जबकि दूसरा सो रहे व्यक्ति पर लोहे की रॉड ताने खड़ा था। 😨
करीब 20 मिनट तक लूटपाट होती रही।
पूरी घटना कैमरे में कैद है, वीडियो जरूर देखिए।👇
"DRDO के साथी बताते हैं कि हम जो भी टेक्नोलॉजी डेवलप करते हैं, बाहर वाले आकर उसे तहस-नहस करवा देते हैं। हमारी लीडरशिप इतनी भ्रष्ट और बिकाऊ है कि वह सिर्फ अपने बारे में सोचती है। टेक्नोलॉजी विकसित करनी है तो उच्च शिक्षा चाहिए जिसे ये नष्ट कर रहे हैं। ये सवाल उठाने की इजाजत नहीं देते और सवाल उठाने बिना नये आविष्कार नहीं होते। हमारे लिए सबसे जरूरी है शिक्षा जिसे ये बर्बाद कर रहे हैं।"
~ प्रो. अरुण कुमार, अर्थशास्त्री
बड़े होटलों के किचन में सड़े आलू, एक्सपायर्ड फिश-चिकन चूहों के अवशेष और मक्खियां मिलीं: ताबड़तोड़ छापेमारी लेकिन कार्रवाई न के बराबर, 5 साल में 9,406 सैंपल फेल, दोषसिद्धि सिर्फ 243 मामलों में; दैनिक भास्कर ने एक्सपर्ट्स से बात कर इसकी वजह समझी और अफसरों से भी इस मामले में जवाब लिया।
पूरा वीडियो देखने के लिए लिंक पर क्लिक करें- https://t.co/e7dCyIyE4q
#MPNews #HindiNews #FSSAI #UnHygienic #HygieneControll
विधायक हो तो मैथिली ठाकुर जैसा!
बिहार बाढ़ की मार झेल रहा है, और बिहार की युवा विधायिका मैथिली ठाकुर बिहार के लोगों की सेवा करने का कोई भी मौका छोड़ना नहीं चाहतीं।
जनता के सुख-दुख में साथ खड़ा होना ही असली जनप्रतिनिधि की पहचान है !❤️
@maithilithakur 🫡
📍अपन को LoP देवता जैसा चाहिए, मुखिया तो 'विदूषक' भी चलेगा..!
अपन ने सुना है कि इंदौर में राहुल के मंच पर एक कॉमेडियन की चंद सेकंड की मौजूदगी से धरती हिल रही है।
नैतिकता के ध्वजवाहकों ने कलप कलप कर महा जलप्लावन कर दिया है।
तो अपन भी राहुल को लानत भेजते हैं।
जी बिल्कुल ऐसी मिमिक्री और वो भी देश के मुखिया की नहीं होना चाहिए।
उस कॉमेडियन ने किसी की मां का नाम लेकर भी कुछ हास परिहास किया। ये भी नहीं होना चाहिए।
वैसे कॉमेडियन ने मुखिया जी की मां की बारे में कुछ नहीं कहा।
('मां के लिए कुर्सी लाओ' माननीय की आमसभा के उस स्क्रिप्टेड ड्रामा पर तंज था जिसमें माननीय एक ऐसी महिला के लिए कुर्सी लाने को कह रहे थे जिसके गले में VIP पास का पट्टा तक लटका था।)
फिर भी कितना शुभ संकेत है कि हमारा समाज नैतिकता के ऐसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है जहां उसे विपक्ष के नेता के मंच से बित्ते भर की घटियाई मंज़ूर नहीं।
अपन भी चाहते हैं कि विपक्ष का नेता चौबीस कैरेट सोने जैसा हो, कोहिनूर जैसा हो, देवता समान हो, भले ही देश का मुखिया कीचड़युक्त कोयला हो।
अपन भी चाहते हैं कि विपक्ष के नेता के मंच से सुई की नोंक के बराबर घटियापन न हो भले ही ख़ुद देश का मुखिया छिछोरियाई की मिसाल कायम करता रहे।
इस नैतिकता के तकाजे पर आप सबको एक हज़ार सलाम।
(देश के मुखिया की कथनी करनी पर इस आगे सुबूतों के साथ सब बताएंगे।)
अब कुछ सवाल..
१) क्या इंदौर में राहुल गांधी ने अपने मुंह से एक भी शब्द ऐसा बोला जो अनुचित हो?
२) क्या राहुल गांधी ने अपने पूरे सार्वजनिक, राजनैतिक जीवन में कभी कोई एक भी शब्द स्त्री विरोधी कहा है?
अगर कहा हो तो प्लीज बताएगा।
३) क्या राहुल से पहले किसी नेता ने किसी प्रधानमंत्री की खिल्ली नहीं उड़ाई?
क्या ख़ुद माननीय ने कभी किसी पूर्व प्रधानमंत्री के लिए आपत्तिजनक शब्द नहीं कहे?
▪️
आइए अब माननीय जी के स्वयं के करतब और बोल वचन याद कर लीजिए।
अगर आप 'गजनी' के संजय सिंघानिया नहीं बन गए हैं तो आपको याद होगा कि...
१) एक बार भरे मंच से माननीय ने एक हाथ की उंगलियां मोड़ कर छेद जैसा बनाया और उस पर दूसरे हाथ की हथेली ठोकते रहे।
ये कैसा किस बात का 'शालीन' इशारा था क्या आप बता सकते हैं?
इसका वीडियो आप ख़ुद ढूंढ लीजिए।
२) माननीय ने संसद में विपक्ष के नेता की खिल्ली उड़ाने को दोनों हाथों की उंगलियां नचा नचा कर जो प्रहसन किया था वो क्या था?
(वीडियो संलग्न है )
२) माननीय ने अपने श्रीमुख से सोनिया गांधी को जर्सी गाय कहा, पार्टी की विधवा कहा था।
३) माननीय ने अपनी पवित्र जिह्वा से किसी दिवंगत महिला को पचास करोड़ की गर्लफ्रेंड कहा था।
४) माननीय ने संसद में एक महिला सांसद को शूर्पणखा कहा था। क्या ये किसी महिला का सम्मान बढ़ाने वाला शब्द था?
५) माननीय ने संसद के भीतर विपक्ष के नेता को बाल बुद्धि कहा, बाहर खड़े होकर कहा कि मैं किसी 56 साल के युवा की बात नहीं कर रहा।
क्या आज़ाद भारत के इतिहास में किसी प्रधानमंत्री ने विपक्ष के नेता पर ऐसे स्तरहीन व्यंग्य बाण चलाए हैं?
६) माननीय ने डिसलेक्सिया से पीड़ित बच्चों का मज़ाक बनाते हुए नेता प्रतिपक्ष पर निशाना साधा था और उस समय उनकी मां तक पर कटाक्ष किया था।
ये किस स्तर की राजनीति थी?
७) माननीय ने डॉ मनोहन सिंह को मौन मोहन कहा, देहाती औरत कहा था।
क्या ये किसी पूर्व प्रधानमंत्री का अपमान नहीं था?
८) संसद में खड़े होकर माननीय ने मनमोहन सिंह के लिए कहा था कि वे बाथरूम में रैन कोट पहन कर नहाने हैं।
ये किस नैतिकता के उच्चतम स्तर की भाषा थी?
९) एक महिला मुख्यमंत्री को भरी सभा में सड़कछाप शोहदों की तरह दीदी ओ दीदी कह कर बुलाना किस भाषाई संस्कार की नुमाइश थी?
आज़ाद भारत के इतिहास में पहली बार किसी प्रधानमंत्री को एक अख़बार की हैडलाइन में 'कमेंटमारा ब्यॉय' लिखा गया। मतलब सड़क पर लड़कियों पर कमेंट करने वाले लफंगा।
(देखें द टेलीग्राफ)
१०) अंतर्राष्ट्रीय दौरों पर माननीय के क्रियाकलाप की सूची बनाने का काम आप खुद कर लीजिए।
विदूषकों जैसे करतबों की इतनी लंबी फेहरिस्त है कि आप गिनते गिनते थक जायेंगे।
लेकिन इन अनगिनत स्तरहीन हरकतों और बोल वचन को हमारा नैतिकतावादी समाज अमृत समझ कर पी जाता है।
कल से अब तक जितने लोग राहुल के मंच पर मिमिक्री से मचल रहे हैं उनमें से किसी ने भी माननीय के विदूषकों जैसे व्यवहार पर कभी एक शब्द नहीं लिखा।
काहे...?
🚨 Missing Child SOS 🚨
Deepesh, a 16-year-old from Palwal, Haryana, has been missing since 11 September 2026 morning after leaving home for school.
Please help locate him and share this widely. If seen, contact the family immediately:
📞 9813798744 | 9813195866
@PalwalPolice@HaryanaPolice@DC_Palwal@nayabsaini@dgpharyana #missingchild
👋#कुर्सी चली गई तो कमरा खाली क्यों रह गया..??_⚡️
🌔श्री राकेश मेहता IAS ( Rtd. Chief Secretary Delhi Govt ) की कहानी से एक सीख 🌑 👀
_एक कहानी जो झकझोर देती है 🎯_
दिल्ली की सड़कों पर जो आज लाल लो-फ्लोर बसें दौड़ती हैं, जिसने खतरनाक ब्लू लाइन को हटाया था, 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए जिस अफसर ने पूरी दिल्ली का कायाकल्प कर दिया था, उस अफसर का नाम था - श्री राकेश मेहता, IAS (1975 बैच)।
सेंट स्टीफेंस, JNU और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़े, MCD कमिश्नर, DTC के CMD, बिजली सचिव और फिर 2007 से 2010 तक दिल्ली के मुख्य सचिव। शीला दीक्षित जी के सबसे भरोसेमंद अफसरों में से एक। मीडिया उन्हें तेज-तर्रार और विजनरी कहता था। एक इशारे पर पूरी दिल्ली का प्रशासन हिल जाता था।
और उसी शख्सियत का आखिरी अध्याय क्या रहा ?
74 साल की उम्र में, नोएडा सेक्टर-82 के केंद्रीय विहार में एक किराए के फ्लैट में अकेले। पत्नी, जो खुद दिल्ली कैडर की रिटायर्ड IAS हैं, बेटे के साथ देहरादून में। बेटी लंदन में। बेटा-बेटी कामयाब, परिवार में किसी चीज़ की कमी नहीं।
5 सितंबर, [शनिवार रात] पत्नी से आखिरी बार फोन पर बात हुई। रविवार को जब लगातार फोन नहीं उठा, तो गार्ड को भेजा गया।
एक पन्ने के नोट में उन्होंने किसी को दोष नहीं दिया। बस लिखा - BP, शुगर और हाथ-पैर में कंपन से थक गया हूँ।
वो हाथ जिसने दिल्ली के लिए बड़े-बड़े फैसले लिखे, आखिर में अपने ही कांपते हाथों से लड़ रहा था।
ये कहानी हमें क्या सिखाती है?
हम सब यही करते हैं।
दिन-रात दौड़ते हैं, सोचते हैं कि बच्चों का भविष्य बना दें, थोड़ा नाम कमा लें, थोड़ा पैसा जोड़ लें, फिर आराम से जिएंगे।
पर ये 'फिर' कभी आता ही नहीं।
इसलिए वक़्त रह्ते समझिये कि:
1. #पद रिटायर होता है, आदमी नहीं।_
हम पूरी जिंदगी कुर्सी को ही अपनी पहचान बना लेते हैं। जब कुर्सी जाती है, तो लगता है हम ही खाली हो गए। मेहता जी जैसे बड़े अफसर को भी अगर रिटायरमेंट के बाद 5 साल अकेले फ्लैट में रहना पड़ा, तो सोचिए हम क्या तैयारी कर रहे हैं? कुर्सी पर रहते हुए ही, कुर्सी के बाहर के दो-चार सच्चे रिश्ते, एक मोहल्ला, एक दोस्ती बचा कर रखिए।
2. #कामयाब बच्चे ही सब कुछ नहीं हैं।_
हम गर्व से कहते हैं - मेरा बेटा देहरादून में, मेरी बेटी लंदन में सेटल है। पर क्या उस सेटल होने में हमारे बुढ़ापे का साथ भी सेटल है? बच्चों को उड़ने दीजिए, पर अपने बुढ़ापे का घोंसला सिर्फ बच्चों की कामयाबी पर मत टिकाइए। अपना एक छोटा संसार - सुबह की सैर के साथी, शाम की चाय, किताबें, भजन, पड़ोस - जरूर बनाइए।
3. #अकेलापन सबसे बड़ी बीमारी है।_
डॉक्टर BP और शुगर की दवा दे देगा, पर अकेलेपन की कोई दवा नहीं है। आज हमारे घर में माँ-बाप जिंदा हैं, तो हम फोन तक नहीं करते। सोचते हैं - सब ठीक तो है। मेहता जी के पास भी सब फोन करते थे, पर रोज़मर्रा में साथ बैठने वाला कोई नहीं था।
इसलिए लेख का सार यही है कि -
"#कभी किसी को मुकम्मल जहान नहीं मिलता।"
○ मुकम्मल जहान किसी को नहीं मिलेगा। पर अधूरे जहान में भी अगर हम आज ही किसी अपने के पास बैठ जाएं, बिना किसी उन काम के एक कप चाय पी लें, तो वही अधूरा जहान मुकम्मल लगने लगता है।
○ दौड़ते रहिए, पर कभी-कभी रुक कर देख लीजिए, कहीं कोई अपना आपका इंतजार तो नहीं कर रहा.
पैसे से गाड़ी खरीदी जा सकती है,
लेकिन Civic Sense और तमीज़ नहीं।
नोएडा एक्सप्रेसवे पर एक दर्जन से अधिक बिना नंबर प्लेट वाली काली कारों से स्टंटबाजी का सामने आया वीडियो बेहद चिंताजनक है। सड़क कोई रेसिंग ट्रैक नहीं है। इस तरह सार्वजनिक मार्ग पर स्टंट करना न केवल यातायात नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों की जान को भी गंभीर खतरे में डालता है।
ऐसी घटनाएं संबंधित युवकों की परवरिश, सड़क सुरक्षा के प्रति लापरवाही, कानून के प्रति गैर-जिम्मेदार रवैये और समाज के प्रति उनकी सोच को भी दर्शाती हैं।
@noidapolice से अनुरोध है कि,
मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित मार्ग पर लगे CCTV कैमरों की फुटेज की जांच कर सभी वाहनों की पहचान की जाए तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मोटर वाहन अधिनियम एवं अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई की जाए।
एक वाहन की पहचान होने पर उसके साथ मौजूद अन्य वाहनों और चालकों की पहचान भी CCTV फुटेज एवं अन्य तकनीकी माध्यमों से की जा सकती है।
@Uppolice@Noidatraffic@dmgbnagar
35 लाख का हमारा इन्वेस्टमेंट था, तो फिर 36 लाख का घाटा कैसे हो गया? छत्तीसगढ़ सरकार ने इस मीम को सच करके दिखा दिया
राशन की दुकानों पर इस्तेमाल होने वाली मशीन
E- POS की बाजार कीमत 25 000 रूपये है
14000 से अधिक दुकानों पर यदि इसे खरीदकर लगाया जाता तो कुछ लागत 35 करोड़ आती
लेकिन, नहीं, इन मशीनो को रेंट पर लाया गया दिखाया गया और अब तक 92 करोड़ का भुगतान हो चुका है और 48 करोड़ का और बाकी है.
5 सालों में जिनमे से दो साल भूपेश बघेल की भी सरकार रही है और 3 साल से बीजेपी सरकार है.
दैनिक भास्कर की इस रिपोर्ट ने सरकारी सिस्टम पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है.
ना खाऊंगा ना खाने दूंगा का नारा देने वाला क्या ये करप्शन नहीं रोक सकता??
निशब्द हूं.. 🤔
>ब्रो का नाम रघुवीर मीणा है ,
>ब्रो पर आरोप है फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनवाकर नौकरी लेते रहे,
>ब्रो सेवानिवृत्त के बाद वर्तमान में मध्यप्रदेश के गुना जिले में पंचायत सदस्य है ,
>ब्रो फर्जी OBC सर्टिफिकेट लगाकर शिक्षक बने ,
>ब्रो ने दुबारा से फर्जी ST सर्टिफिकेट लगाकर 1986 में DSP पद पर चयनित हुए ,
>ब्रो का 2001 में IPS पद पर प्रमोशन हुआ ,
>ब्रो के OBC फर्जी जाति प्रमाणपत्र 2024 में जबलपुर अनुविभागीय अधिकारी ने जारी किए,
>ब्रो का फर्जी ST सर्टिफिकेट विदिशा से 1984 में बना ,
>ब्रो पर पुलिस महानिरीक्षक विजिलेंस ने 2009 में शिकायत की बाद में 2016 के गठित समिति ने दोषी माना ,
>ब्रो पर SC, ST एक्ट अनुसार मामल दर्ज हुआ है ,
>ब्रो ये फर्जी सर्टिफिकेट वाला चमत्कार कहां से सीखे है?
प्रधानमंत्री जी के गृह राज्य में 51,057 करोड़ का "विकास" !!
इसे चोरी कहें, लूट कहें, डकैती कहें या इन सबका बाप - महालूट?
दैनिक भास्कर (20-09-2026) पढ़िए, CAG खुद कह रही है,
गुजरात में GST में 51,057 करोड़ रुपयों की गड़बड़ी मिली है।
और सबसे बड़ा मजाक देखिए
इस घोटाले के 63 सबसे बड़े कारोबारियों के 97% रिकॉर्ड ही सरकारी दफ्तरों से गायब कर दिए गए! बैंक खाते गायब, हिसाब गायब, फाइल गायब!
मतलब, पहले घोटाला करो, फिर सबूत ही गायब कर दो। जांच क्या करेगी?
जो GST नंबर सरकार खुद रद्द कर चुकी थी, उन्हीं मरे हुए नंबरों से अरबों के फर्जी E-Way Bill बना कर माल इधर से उधर!
और जब CAG ने 738 मामलों में 1234 करोड़ की जांच करनी चाही तो 96.92% मामलों में दस्तावेज ही नहीं मिले।
यही है वो प्रसिद्ध गुजरात मॉडल?
जहाँ आम आदमी 5 रुपये की चाय पर भी GST देता है, ईमानदारी से रिटर्न भरता है, नोटिस आते ही डर जाता है...
और उधर 51 हजार करोड़ का हिसाब ही गायब?
अगर मंदसौर-नीमच में किसी छोटे व्यापारी का 50 हजार का मिलान नहीं हुआ तो उसका खाता सीज, नोटिस, पेनल्टी...
और वहाँ 51 हजार करोड़ में सिर्फ "रिकॉर्ड नहीं मिला" कह कर फाइल बंद?
सवाल तो बनता है,
ये चोरी है? लूट है? डकैती है?
नहीं, ये तो इन सबसे बड़ा है,सिस्टमेटिक महालूट है!
जनता पूछ रही है , जब CAG ने पकड़ लिया तो कार्रवाई कौन करेगा? क्या फाइल गायब करने वाले अफसरों पर FIR होगी...???
@PMOIndia@narendramodi@nsitharaman