मनमोहन सिंह के दौर में, सिर्फ एक भारतीय नौकरशाह के साथ बदसलूकी पर अमेरिका को कड़ा सबक सिखाया गया था।
मनमोहन सिंह ने अमेरिकी दूतावास से सुरक्षा हटा ली थी और अमेरिका से बिना शर्त माफी मांगने को कहा था।
आज अमेरिका द्वारा हमले में 3 भारतीयों की मौत पर भी PM Modi ने एक ट्वीट तक न���ीं किया।
और संघी, मनमोहन सिंह को असफल प्रधानमंत्री कहते हैं।
ऐसा लग रहा है जैसे Stranger Things वेब सीरीज का कोई क्लाइमैक्स सीन हो।
लेकिन नहीं, ये एक बेहद दुर्लभ प्राकृतिक घटना है।
तिब्बत के ऊपर आसमान में शक्तिशाली बिजली कड़कने और ऊपरी वायुमंडल में बनने वाली विद्युत गतिविधियों की वजह से ऐसे विशाल लाल मकड़ी जैसे दृश्य बनते हैं।
फिर से टैरिफ बढ़ोतरी!
एयरटेल का 319 वाला प्लान 419 में।
जियो का 299 वाला 359+ में।
वोडाफोन का 340 वाला 419 में।
बढ़ोतरी दिसंबर 2025 में होने की संभावना है।
तीन की तिकड़ी मिलकर फिर ��ूट रही है।कॉम्पिटिशन खत्म कर दिया अब मोनोपॉली का मजा ले रहे हैं।
जनता की जेब पर डाका और बोलते हैं "डिजिटल इंडिया"
🚨Airtel | Jio | Vodafone - रेट अलग, स्क्रिप्ट एक।
❗20 टेलीकॉम कंपनियों से 3 पर लाया गया बाजार।
कॉम्पिटिशन मरा — मोनोपोली जिंदा।
SIM बदलो या रोओ, लूट हर तरफ एक जैसी।
📌 जब सरकार बाजार नहीं चलाती, कार्टेल चलने देती है।
और कीमत? हर महीने जनता देती है।
👉🏻अब असली खेल समझिए: 2010 के आसपास भारत में 20 से ज़्यादा ट���लीकॉम कंपनियां थीं। Tata, Reliance (पुरानी), Aircel, Docomo, Idea, BSNL, MTNL…
फिर एक कंपनी लाई गई — सरकारी संरक्षण + नियमों में ढील + बकाया माफी + स्पेक्ट्रम खेल
बाकी कंपनियां
• कर्ज में डुबोई गईं
• नीलामी में कुचली गईं
• कोर्ट-कचहरी में फंसाई गईं
और धीरे-धीरे कॉम्पिटिशन खत्म।
आज मार्केट में क्या है?
👉 Jio
👉 Airtel
👉 दम तोड़ती Vodafone
BSNL? - उसे जानबूझकर पंगु बना कर रखा गया।
⚠️ कॉम्पिटिशन खत्म = लूट की आज़ादी
अब जनता के पास
ना सस्ता विकल्प है
ना भागने का रास्ता।
SIM पोर्ट कराओगे — दूसरी कंपनी भी उतना ही वसूलेगी।
यही वजह है कि तीनों कंपनियां एक साथ रेट बढ़ाती हैं और सरकार चुप रहती है।
क्योंकि ये “पॉलिसी फेलियर” नहीं,डिज़ाइन किया हुआ मॉडल है।
डिजिटल इंडिया का मतलब ये नहीं होता कि इंटरनेट भी टैक्स की तरह वसूला जाए।
डेटा आज
• शिक्षा है
• नौकरी है
• सूचना है
• आवाज़ है
और उसी पर मोनोपोली टैक्स लगाया जा रहा है।
📌 जब सरकार रेफरी की जगह खिलाड़ी बन जाए — तो मैच फिक्स होता है।
और इस मैच में हर महीने हारती हैं सिर्फ़ मासूम जनता ।
Minimum Recharge to talk with someone on Call in 2014
- Rupees 10
Minimum Recharge to talk with someone on Call in 2025
- Rupees 199
No one is speaking about this Open loot.
SIM कार्ड कम्पनियां (@reliancejio , @airtelindia ) पहले वादे करते थे कि लाइफटाइम सिम — बस तीन महीने में एक बार ₹10-20 का रिचार्ज कर दो, सिम चलता रहेगा।
अब वही कंपनियाँ हर महीने ₹250-₹350 का “मैंडेटरी रिचार्ज” थोप रही हैं।
डाटा जो कभी ₹250 में 1GB मिलता था, पूरे महीने चलता था। अब 1GB बड़ी मुश्किल से 1 दिन चलता है।
इनकमिंग कॉल पहले फ्री थीं, सिम कार्ड बंद नहीं होते थे लेकिन अब हर चीज़ “कंडीशन अप्लाई” में बदल गई।
TRAI और सरकार चुप हैं , जैसे सब कुछ कॉरपोरेट सुविधा बन गया हो।
कहाँ गए वो डिजिटल इंडिया और सस्ता इंटरनेट ��े वादे?
जनता से लाइफटाइम सिम का झांसा लेकर अब हर महीने जेब काटी जा रही है।
#Khurpench #TelecomLoot #ConsumerRights
🚨 डिजिटल क्रांति का असली चेहरा 🚨
रिलायंस जियो ने शुरुआत में “फ्री इंटरनेट” और “फ्री कॉल” का सपना दिखाया — देश ने इसे डिजिटल आज़ादी समझा।
लेकिन असल में ये डिजिटल गुलामी की चाल थी।
पहले ₹149 का प्लान, फिर ₹249, फिर ₹349 — अब ₹899 तक जा पहुँचा। नेटवर्क वहीं, स्पीड वहीं — बस लूट की दर बढ़ गई।
TRAI और सरकार दोनों मौन हैं — क्योंकि इस खेल के दोनों हिस्सेदार हैं। “डिजिटल इंडिया” के नाम पर जनता को डेटा की लत लगा दी गई — अब बिना नेट कुछ नहीं चलता।
वॉयस-ओनली रिचार्ज गायब, हर काम के लिए डेटा ज़रूरी — यानी मजबूरी का नेटवर्क युग।
गरीब से लेकर मध्यम वर्ग तक रोज़ाना क�� रहा है,
और कॉर्पोरेट साम्राज्य अरबों कमा रहा है।
ये “Digital India” नहीं — 👉 Corporate India है,
जहाँ जनता यूज़र नहीं, शिकार बन चुकी है। 🕳️📶
चाहो तो इसका टैगलाइन रखो —
#JioSeJudaDesh, JaalMeinPhansaDesh 🤡
जियो ने फ्री कॉल और अन��िमिटेड इंटरनेट देकर लोगों को जाल में फँसाया। अब प्लान महंगे, स्पीड वही और सरकार-TRAI खामोश।
डिजिटल इंडिया के नाम पर जनता अब कॉर्पोरेट इंडिया की मजबूर ग���राहक बन चुकी है।
कब तक Telecom कपानियों की जनता से मनमानी लूट जारी रहेगी?
क्यों हर टेलीकॉम कंपनी जबरदस्ती डेटा पैक थोप रही है, जबकि करोड़ों गरीब लोगों को उसकी जरूरत ही नहीं?
👉 सिर्फ कॉल करने वालों के लिए सस्ता वॉयस प्लान क्यों नहीं है?
👉 30 दिन का न्यूनतम रिचार्ज प्लान सभी कंपनियों पर लागू क्यों नहीं किया जाता?
👉 क्या सरकार जानबूझकर चुप है क्योंकि इन कंपनियों से भारी चंदा आता है?
👉 TRAI और दूरसंचार मंत्रालय आखिर कर क्या रहे हैं — क्या उन्हें नहीं दिखता कि ये “मोनोपॉली” बन चुकी है?
👉 जो लोग सिर्फ कॉल करना चाहते हैं, उनसे हर महीने 200–300 रुपए वसूलना क्या लूट नहीं है?
👉 क्या अब मोबाइल रखना भी अमीरों का हक़ बन जाएगा?
जनता पूछ रही है — जब डेटा नहीं चाहिए तो डेटा के नाम पर मजबूरी क्यों?
सरकार जवाब दे, ये कंपनियां नहीं — पब्लिक प्रॉब्लम बन चुकी हैं।
Dear Jio,
Two Suggestions:
- Most Indians have Wifi access. Senior Citizens use Wifi mostly. Please provide an affordable 1 GB per day plan with options to choose (28 days onwards). Also a yearly plan.
- Provide affordable Voice only plans for less than ₹100 every month. Anything above this is forcing people to take data, even if they don't need it.
There are many who use only voice and also less than 1 GB per day. Need inclusive plans. Let users decide.
Urging my audience to repost this (if you also feel this way) until @JioCare ACTUALLY Cares 👍
#FI
🚨⚡️ The West once bragged about "isolating" Russia.
Now, Moscow is dictating the agenda for a major summit—right on American soil.
💥🇷🇺 Russia writes history, not headlines.
गुजरात के जूनागढ़ में सीमेंट फैक्ट्री के बाहर एक आदमी और शेर का आमना-सामना हुआ
◆ दोनों ने एक-दूसरे को देखकर घबराकर तेजी से भागना शुरू किया
◆ यह डरावना मंजर CCTV में कैद हो गया और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है
#Gujarat | Lion | #Junagadh