मेरठ मामला वर्षों की लापरवाही का नतीजा है।
1978 के प्लॉट पर अवैध कॉम्प्लेक्स खड़े हुए।
नोटिस के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।
2024 में सुप्रीम कोर्ट सख्त हुआ।
अब 2026 में अवैध निर्माण हट रहा है।
अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मेरठ में नई व्यवस्था लागू होने जा रही है।
योगी सरकार ने प्रभावितों को भरोसा दिया है कि उन्हें अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। पुनर्वास के साथ साथ सरकार खुद उनके केस की पैरवी कर रही है।
स्कूल बैंक और अस्पताल जैसी जगहों को अलग करने के लिए घेराबंदी का प्रस्ताव रखा गया है।
सपा का रुख केवल राजनीतिक नजर आ रहा है जबकि योगी जी समाधान पर काम कर रहे हैं।
मेरठ के मामले में योगी सरकार ने संवेदनशीलता दिखाई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। प्रभावित लोगों के लिए पुनर्वास और कानूनी सहायता दोनों उपलब्ध कराई जा रही हैं। सार्वजनिक सुविधाओं की घेराबंदी का प्रस्ताव भी सामने आया है। सपा इस पूरे मुद्दे पर केवल राजनीति कर रही है जबकि सरकार समाधान दे रही है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद मेरठ में कार्रवाई की तैयारी तेज हो गई है। योगी सरकार ने प्रभावित परिवारों के साथ खड़े रहने का भरोसा दिया है और उनके लिए पुनर्वास का विकल्प भी रखा है। स्कूल बैंक और अस्पताल जैसी संपत्तियों के लिए घेराबंदी का प्रस्ताव भी दिया गया है। यूपी सरकार खुद केस लड़ रही है जबकि सपा केवल आरोपों में उलझी है। योगी जी का यह फैसला कानून और जनहित दोनों को साधता है।
मेरठ में अवैध निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन सक्रिय हो गया है। योगी सरकार ने साफ किया है कि प्रभावित लोगों को हर संभव सहयोग दिया जाएगा। पुनर्वास की व्यवस्था के साथ साथ सरकार खुद उनकी तरफ से केस भी लड़ रही है। वहीं सपा इस गंभीर मुद्दे पर भी राजनीति करने से पीछे नहीं हट रही है। योगी जी का यह संतुलित और जिम्मेदार रुख भरोसा बढ़ाता है।
What is happening in Meerut today is the result of corruption in the previous government. The foundation of this issue was laid during that tenure. When the Awas Vikas authorities raised complaints, they were threatened and pressured, and encroachments were allowed under protection in exchange for money. The government ignored the concerns of the Awas Vikas Parishad.
To correct this, the UP government introduced bylaws in 2025. However, due to earlier violations and disregard for rules, the Supreme Court delivered its verdict, and the demolition action is being carried out under its orders.
At the same time, the UP government is continuously trying in the Supreme Court to ensure that people’s livelihoods and homes are protected as much as possible.
अवैध व्यावसायिक निर्माण भू-उपयोग नियमों का स्पष्ट उल्लंघन था, जिसे 1978 की आवासीय योजना के खिलाफ 1980-90 के दशक में अनदेखा किया गया।
भाजपा सरकार नियमों का पालन सुनिश्चित कर रही है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक स्टंट बता रहा है���
मेरठ में जो हो रहा है, वह सपा शासन में पनपे भ्रष्टाचार और संरक्षण की देन है। आवास विकास की शिकायतों को दबाया गया, अवैध कब्जों को बढ़ावा मिला। अब Supreme Court of India के आदेश पर ध्वस्तीकरण हो रहा है, जबकि यूपी सरकार लगातार प्रयास कर रही है कि आम लोगों की रोजी-रोटी और आशियाना बचाया जा सके।
मेरठ का यह मामला दशकों पुरानी लापरवाही और अवैध निर्माण का परिणाम है।
1978 में आवासीय प्लॉट दिए गए, लेकिन 80-90 के दशक में नियमों को तोड़कर बड़े व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स खड़े कर दिए गए।
1990 में विरोध करने गए अधिकारी के साथ अभद्रता ने इस विवाद को और गहरा कर दिया।
2013 में नोटिस जारी हुआ, लेकिन उ�� समय ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी और अतिक्रमण बढ़ता गया।
दिसंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश दिया।
अक्टूबर 2025 में प्रशासनिक स्तर पर देरी हुई, जिस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई।
अब 2026 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर अवैध निर्माण सील और हटाने की कार्रवाई जारी है।
यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि कानून से ऊपर कोई नहीं, और देर से ही सही न्याय लागू हो रहा है।
मेरठ का मामला वर्षों की लापरवाह�� का नतीजा है।
1978 में दिए गए आवासीय प्लॉट पर नियम तोड़कर अवैध निर्माण किए गए।
नोटिस और चेतावनियों के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं हुई।
2024 में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया।
अब 2026 में अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई जारी है।
मेरठ का मामला उस समय के पूरे सिस्टम की नाकामी का प्रतीक है।
दशकों तक नियम तोड़े गए, सबने आंखें मूंदी।
अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई हो रही है—कानून से बड़ा कोई नहीं।
अखिलेश जी के कार्यकाल में तो महिलाओं को सामाजिक न्याय तक नहीं मिला रही बात गैस सिलेंडर की तो सपा के शासनकाल में उत्तर प्रदेश की महिलाएं धुएं में ���ाना बनाने को मजबूर थी उसके लिए गोबर के उपले और जंगल से लड़कियां लाती थी और धुएं में खाना बनाती थी जिससे उनकी आंखें ��ी खराब होती थी उनका स्वास्थ्य भी ।
आज भाजपा की डबल इंजन सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के माध्यम से 10 करोड़ परिवारों को इसका लाभ मिल चुका है अकेले उत्तर प्रदेश में लगभग 1.70 लाख से ज्यादा लोगों को इसका लाभ मिल चुका है और तो और दिवाली और होली के अवसरों पर उजाला लाभार्थियों को मुक्त सिलेंडर देने का भी काम बीजेपी के सरकार ने किया है,
लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं जिन्हें ना तो विकास पसंद है और ना उत्तर प्रदेश की जनता को खुश देखना चाहते हैं
यह बात आपको तब क्यों नहीं याद आती है जब आप अवधेश प्रसाद जो आपके पिता के उम्र के हैं बुजुर्ग हैं उनको बार-बार संसद में मजाक बनाते हैं उनको ट्रॉफी बना बना ��र दिखाते हैं ??
और कहते हैं अब उठ जाओ अब बैठ जाओ
ऐसी भाषा अपने पिता की उम्र के एक सांसद के साथ तब आपको याद नहीं आता कि अवधेश प्रसाद जनता का प्रतिनिधि है उसके साथ इस तरह का मजाक नहीं करना चाहिए
उसको इस तरह से ट्रॉफी बना कर दुनिया को नहीं दिखना चाहिए
लेकिन आप की पार्टी अयोध्या में जीत क्या गई आपने अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद को एक मजाक वाली ट्रॉफी बना कर ही पेश किया और उनके साथ उठ जा बैठ जा व���ली भाषा ही प्रयोग करते हैं
अवधेश प्रसाद दलित है इसीलिए आप उनको इस तरह क��� भाषा बोलते हैं
जब 10 साल से सत्ता से खदेड़ दिए गए हैं तब अखिलेश यादव को सामाजिक न्याय की याद आ रही है
जब मुख्यमंत्री थे तब खुद को राजा समझते थे अपने निर्वाचन क्षेत्र कन्नौज आना होता था तब 5 साल 8 साल के बच्चो�� से गधा मजदूरी करवाते थे बेगारी करवाते थे
तब इनको याद नहीं आता था कि सामाजिक न्याय में बच्चों से मजदूरी नहीं कराई जाती
यह बच्चे भारत का भविष्य है उत्तर प्रदेश का भविष्य है उनके हाथों में काफी किताब होना चाहिए
लेकिन तब अखिलेश यादव ने बच्चों के हाथ में हंसिया दरांती और खुरपी दे दिया था झाड़ू दे दिया था की जाओ बे मेरे सभा स्थल की सफाई करो घास छीलो
प्रवीण य��दव अपनी पत्नी प्रतिमा मिश्रा के जरिए सपा का एजेंडा चलाते हैं, यही उनकी असली सच्चाई है। जब खुद के लिए एजेंडा चलाना मुश्किल होता है अखिलेश को तो रोना और शिकायत करना इनका स्वाभाविक है।
असलियत यही है कि सत्ता और मीडिया की समझ में फर्क है, और वही अखिलेश को नागवार गुजरता है, प्रतिमा ने आज अपनी सच्चाई सामने ला दी कि वह अखिलेश के एजेंट है।
अखिलेश जी मणिपुर का असली गुनहगार अमेरिका का ईसाई मिशनरी सीआईए एजेंट मैथ्यू वैनडाइक है
टोटल 15 लोगों की टीम थी जो कुकी आतंकियों को म्यांमार में प्रशिक्षण दे रहे थे और उन्हें अमेरिकी हथियार दे रहे थे
बांग्लादेश में सफल ऑपरेशन के बाद सीआईए ने भारत में भी पूर्वोत्तर राज्यों को स���थिर करने की पूरी प्लानिंग किया
लेकिन CIA का एजेंट मैथ्यू गिरफ्तार हो गया
और व्हीलचेयर पर बैठा हुआ पहला CIA ।
यह अमेरिकी भाड़े का सैनिक और CIA एजेंट म्यांमार में विद्रोहियों को भारत के खिलाफ लड़ने के लिए प्रशिक्षित करने आया था, लेकिन अब लंगड़ाते हुए व्हीलचेयर पर देखा गया है।
इस मैथ्यू ने बांग्लादेश यूक्रेन रूस मध्य पूर्व के कई देश जिसमें अल्जीरिया लीबिया इराक शामिल है वहां CIA के एजेंट के तौर ��र सरकार के खिलाफ या किसी खास विपक्षी दल जो अमेरिका के सिद्धांत के खिलाफ है उनके खिलाफ अभियान चला चुका है
यह समझ रहा था कि भारत में भी पूछताछ अमेरिका की तरह होता है यानी बाकायदा किसी सभ्य व्यक्ति की तरह जिसका टेलीकास्ट भी होता है और कोई थर्ड डिग्री नहीं कोई 4th डिग्री नहीं
यह भूल गया कि भारत में पूछताछ करने की अलग स्टाइल होती है
वैसे अगर योगी की पुलिस के हत्थे आया होता तो अब तक तो इसका हाफ एनकाउंटर हो गया होता
और यह जो अभी मणिपुर में हमला हुआ है वह कुकी आतंकियों ने अपने इसी नेटवर्क की गिरफ्तारी के बाद माहौल को खराब करने के लिए किया है
आप चिंता मत करिए एक-एक अपराधियों को सजा दी जाएगी
अभी भारत सरकार ने नक्सलियों की कमर तोड़ दी है
अब यह पूर्वोत्तर में चल रहे जो मिशनरी अलगाववादी हैं उनकी भी कमर तोड़ी जाएगी
यानी अखिलेश यादव के अनुसार चुनाव आयोग को कहना चाहिए कि
“बंगाल में इस बार चुनाव
भय के साथ
दंगों के साथ
धमकियों के साथ
प्रलोभनों के साथ
बूथ लूटने के साथ होंगे ???
एक पूर्व मुख्यमंत्री होकर इतनी बड़ी मूर्खता कर रहे हो??
आज तृणमूल कांग्रे��� का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिलने गया था जिसमें वह चुनाव आयोग पर अपनी मनमर्जी करने का दबाव डाल रहा था
चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधियों से साफ कह दिया कि आपकी मनमर्जी नहीं चलेगी
पश्चिम बंगाल में चुनाव भयरहित हिंसा रहित प्रलोभन से रहित धमकी से रहित छापा रहित ईमानदारी से होंगे
तो इसमें गलत क्या कहा ??
आपको इसमें मिर्ची कहां पर लग गई ????
सपा के ल्यारी राज में कानून नहीं, गुंडों का राज चलता था।
बेटियां असुरक्षित, माफिया बेखौफ और जनता परेशान थी।
जातिवाद और अराजकता ने यूपी को पीछे धकेल दिया था।
#सपा_का_ल्यारी_राज
याद हैं कि भूल गए....
जब @yadavakhilesh राज में सिर्फ अपराध हावी था।
जब लड़कियां घर से बाहर निकलने से भी डरती थी।
माफिया थाने जेब में लेकर चलते थे। रोज 100 से ज्यादा महिलाओं का शीलभंग होता था।
केवल था तो सिर्फ अखिलेश यादव का ल्यारी राज।
#सपा_का_ल्यारी_राज